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NCLAT का अडाणी एंटरप्राइजेज की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार, वेदांता ने कहा- नियम की हुई अनदेखी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 24, 2026 11:40 pm IST,  Updated : Mar 24, 2026 11:40 pm IST

अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि फिलहाल समाधान योजना पर काम जारी रहेगा, लेकिन ये वेदांता ग्रुप द्वारा दायर अपीलों के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

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कर्जदाताओं ने 89% वोटिंग के साथ अडाणी के प्लान को चुना था Image Source : PTI

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने मंगलवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अडाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। वेदांता ग्रुप ने NCLT के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसने अडाणी की बोली को मंजूरी दी गई थी। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने जेएएल के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की गई है। पीठ ने कहा, "मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर जल्द सुनवाई की जरूरत है।" 

अदालत ने सभी पक्षों से मांगी दलीलें

अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले अपनी दलीलों का संक्षिप्त नोट जमा करें, जो 5 पन्नों से ज्यादा न हो। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि फिलहाल समाधान योजना पर काम जारी रहेगा, लेकिन ये वेदांता ग्रुप द्वारा दायर अपीलों के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। सुनवाई के दौरान वेदांता के वकील ने दलील दी कि उन्हें कर्जदाताओं की समिति ने सबसे बड़ा बोलीदाता घोषित किया था। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अडाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी। वेदांता का तर्क है कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) का मुख्य मकसद कर्ज में डूबी कंपनी की संपत्तियों की 'ज्यादा से ज्यादा कीमत' वसूलना है, लेकिन बैंकों ने कम बोली (अडाणी की बोली) को चुनकर इस नियम की अनदेखी की है। 

कर्जदाताओं ने अपने फैसले के बचाव में क्या कहा

कर्जदाताओं ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत थी। बैंकों का तर्क है कि केवल ऊंची बोली देना ही जीत की गारंटी नहीं है। अडाणी की योजना को इसलिए पसंद किया गया क्योंकि वे 6,000 करोड़ रुपये नकद और दो साल के भीतर भुगतान की पेशकश कर रहे थे, जबकि वेदांता का भुगतान समय 5 साल तक लंबा था। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने सोमवार को वेदांता को निर्देश दिया था कि वो इस मामले में अडाणी एंटरप्राइजेज को भी पक्षकार बनाए, क्योंकि उनके पक्ष को सुने बिना एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। 

कर्जदाताओं ने 89% वोटिंग के साथ अडाणी के प्लान को चुना था

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता ग्रुप शुरू से ही जेएएल की दौड़ में शामिल था, लेकिन पिछले साल नवंबर में कर्जदाताओं ने 89 प्रतिशत वोटों के साथ अडाणी के प्लान को चुना था। इलाहाबाद एनसीएलटी ने 17 मार्च को अडाणी की बोली को आधिकारिक मंजूरी दी थी, जिसे अब वेदांता ने एनसीएलएटी में चुनौती दी है। जयप्रकाश एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, होटल और बिजली क्षेत्र में बड़ी संपत्तियां हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा में 'जेएपी ग्रीन्स', नोएडा में 'विशटाउन' और जेवर हवाई अड्डे के पास 'इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी' जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। कंपनी पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, जिसके चलते जून, 2024 में इसे दिवाला प्रक्रिया में डाला गया था।

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