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Zomato, Swiggy से खाना ऑर्डर करना होगा महंगा, Magicpin दे रहा सबसे सस्ती सर्विस

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Sep 07, 2025 02:51 pm IST,  Updated : Sep 07, 2025 02:51 pm IST

22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी के कारण जोमैटो यूजर्स के लिए प्रति ऑर्डर लगभग 2 रुपये और स्विगी ग्राहकों के लिए 2.6 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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ऑनलाइन फूड डिलीवरी चार्ज पर लगेगा 18% जीएसटी Image Source : INDIA TV

Online Food Ordering Platforms: त्योहारी सीजन से ठीक पहले ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन द्वारा प्लेटफॉर्म फीस में की गई बढ़ोतरी से देशभर के लाखों लोगों के लिए ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना महंगा हो जाएगा। 22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर 18 प्रतिशत जीएसटी (माल एवं सेवा कर) लगाए जाने से ये और भी ज्यादा महंगा हो सकता है। स्विगी ने चुनिंदा बाजारों में अपना प्लेटफॉर्म फीस जीएसटी सहित 15 रुपये कर दिया है। जोमैटो ने अपनी फीस बढ़ाकर 12.50 रुपये (जीएसटी को छोड़कर) कर दिया है, जबकि तीसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी मैजिकपिन ने भी व्यापक उद्योग रुझानों के अनुरूप, अपनी प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर 10 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। 

ऑनलाइन फूड डिलीवरी चार्ज पर लगेगा 18% जीएसटी

माना जा रहा है कि 22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी के कारण जोमैटो यूजर्स के लिए प्रति ऑर्डर लगभग 2 रुपये और स्विगी ग्राहकों के लिए 2.6 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पीटीआई द्वारा स्विगी और जोमैटो को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। मैजिकपिन के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी पहले से ही अपनी फूड डिलीवरी लागत पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर रही है। 

मैजिकपिन दे रहा है सबसे सस्ती सर्विस

प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘‘जीएसटी में हालिया बदलाव हमारी लागत संरचना को प्रभावित नहीं करती हैं। इसलिए, ग्राहकों पर जीएसटी में बढ़ोतरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हमारी प्लेटफॉर्म फीस 10 रुपये प्रति ऑर्डर ही रहेगी, जो प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियों में सबसे कम है।’’ हाल के दिनों में प्लेटफॉर्म फीस फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए रेवेन्यू का एक अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है। जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन द्वारा एक साथ की गई बढ़ोतरी भारत के फूड डिलीवरी सेक्टर में बढ़ती लागत के बढ़ते रुझान को रेखांकित करती है, जिससे ये सवाल उठता है कि क्या लाखों ग्राहकों के लिए सामर्थ्य और सुविधा अब भी साथ-साथ चल सकती है। 

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