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Rajesh Exports: ₹15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप! जानिए कौन हैं राजेश मेहता, जिनकी कंपनी की वजह से LIC को भी लगा तगड़ा झटका

 Written By: Rajesh Kumar, Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jun 04, 2026 04:50 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 05:47 pm IST

देश की जानी-मानी ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता के खिलाफ सेबी (SEBI) ने अंतरिम आदेश जारी किया है। जांच में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

राजेश मेहता कौन हैं?- India TV Hindi
राजेश मेहता कौन हैं? Image Source : ANI/CANVA

भारत की प्रमुख गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्माण कंपनियों में से एक राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी और उसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपने राजस्व और वित्तीय स्थिति को लेकर निवेशकों के सामने भ्रामक तस्वीर पेश की। इस कार्रवाई के बाद कंपनी का शेयर में गुरुवार को लोअर सर्किट लग गया। इसकी वजह से कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली LIC के शेयर्स भी आज 1% तक गिर गए।

सेबी की जांच में क्या सामने आया?

सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने कारोबार से जुड़े आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। जांच में दावा किया गया कि कंपनी ने लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू की गलत रिपोर्टिंग की। हैरानी की बात यह है कि कथित तौर पर 99.8% राजस्व असलियत से कहीं ज्यादा दिखाया गया था। SEBI का कहना है कि कंपनी के प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से फंड के इस्तेमाल को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

कौन हैं राजेश मेहता?

राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल से की। कम उम्र में ही वह अपने पिता के जूलरी कारोबार से जुड़ गए थे। 1980 के दशक में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अपने बड़े भाई से मात्र 1200 रुपये उधार लिए थे। धीरे-धीरे उनका कारोबार दक्षिण भारत, गुजरात और मुंबई जैसे बड़े बाजारों तक फैल गया।

छोटे कारोबार से अरबों डॉलर की कंपनी तक का सफर

साल 1995 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर बाजार में कदम रखा और आईपीओ के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने गोल्ड रिफाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल कारोबार में तेजी से विस्तार किया। कंपनी को दुनिया भर में पहचान तब मिली जब 2015 में उसने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी वाल्कैम्बी (Valcambi) को करीब 400 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। यह डील पूरी तरह कैश पेमेंट के जरिए हुई थी।

अब क्यों फंसे राजेश मेहता?

सेबी के आदेश के अनुसार, राजेश मेहता कंपनी के प्रमुख निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे और फाइनेंशियल एक्टिविटी पर उनका सीधा कंट्रोल था। इसी वजह से नियामक ने उन्हें अगली सूचना तक शेयर बाजार में किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री या कारोबार करने से रोक दिया है।

LIC को भी लगा झटका

राजेश एक्सपोर्ट्स में भारतीय जीवन बीमा निगम की 10.80% हिस्सेदारी है। सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट आई, जिसका असर LIC के निवेश पर भी पड़ा। आपको बता दें कि यदि मामले में आरोप सही साबित होते हैं तो यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े कॉर्पोरेट गवर्नेंस विवादों में से एक बन सकता है।

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