भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से शुक्रवार को नीतिगत दर यानी रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी मदद मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि रेट कट से ऑटो लोन या कार लोन सस्ते होंगे और बिक्री को अच्छा सपोर्ट मिलेगा। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने एक बयान में कहा कि रेपो दरों में इस तरह की कटौती से ऑटो क्षेत्र पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। इससे कम लागत पर फाइनेंस तक पहुंच बढ़ेगी। बाजार में उपभोक्ताओं के बीच पॉजिटिव भावना पैदा होगी।
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रेपो दर चार साल के निचले स्तर पर आया
खबर के मुताबिक, आरबीआई ने शुक्रवार को ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में 50 आधार अंकों (0.50%) की कटौती की, जो वित्त वर्ष 2025 में चार साल के निचले स्तर 5.50 प्रतिशत पर आ गई है। ब्याज दर में कटौती से घर, ऑटो और कॉर्पोरेट ऋण उधारकर्ताओं को राहत मिली है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) ने कहा कि आरबीआई द्वारा रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती करने और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को कम करने का फैसला घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक विकास को समर्थन देने की दिशा में एक समय पर और सक्रिय कदम है।
उधार लेने की लागत कम होने की उम्मीद
एसीएमए की अध्यक्ष श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि ब्याज दरों में कमी से उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों के लिए उधार लेने की लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे ऑटोमोटिव क्षेत्र को बहुत जरूरी सपोर्ट मिलेगा। यह सेक्टर एक जटिल व्यापक आर्थिक माहौल से गुजर रहा है। महिंद्रा समूह के सीईओ और एमडी अनीश शाह ने कहा कि यह कदम व्यापक आर्थिक बुनियादी बातों में आरबीआई के विश्वास और लगातार विस्तार का समर्थन करने के लिए इसके सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
एंट्री और मिड्स सेगमेंट में फाइनेंस होगा आसान
शाह ने कहा कि इससे उधार लेने की लागत कम होगी, तरलता में सुधार होगा और भारत के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण को बढ़ावा देने की गति को और मजबूत करेगा। रेनॉ इंडिया के कंट्री सीईओ और एमडी वेंकटराम ममिलापल्ले ने कहा कि नीति से तरलता मजबूत होने और उपभोक्ताओं तक कम ब्याज दरों की पहुंच में आने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी।