टाटा ग्रुप के परोपकारी संगठन टाटा ट्रस्ट्स में आंतरिक गतिरोध बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके करीबी माने जाने वाले दो अन्य ट्रस्टी ने दिवंगत रतन टाटा के निकट सहयोगी और प्रमुख व्यवसायी मेहली मिस्त्री की ट्रस्टी के रूप में पुनर्नियुक्ति को रोक दिया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह अप्रत्याशित विभाजन ट्रस्ट्स के भीतर सर्वसम्मति-आधारित निर्णय लेने की हालिया परंपरा से एक स्पष्ट विचलन को दर्शाता है। नोएल टाटा को पिछले साल रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट्स का नेतृत्व संभालने के लिए नियुक्त किया गया था।
ट्रस्टियों में स्पष्ट विभाजन
पुनर्नियुक्ति रोकने वाले: चेयरमैन नोएल टाटा और उनके साथ दो अन्य ट्रस्टी (जिनके नाम अज्ञात हैं)।
पुनर्नियुक्ति का समर्थन करने वाले: मेहली मिस्त्री के करीबी माने जाने वाले तीन अन्य ट्रस्टी-सिटीबैंक इंडिया के पूर्व सीईओ प्रमित झावेरी, मुंबई के वकील दारीयस खंबाटा, और पुणे के परोपकारी जहेनगीर एचसी जहेनगीर।
नोएल टाटा और मेहली मिस्त्री को टाटा ट्रस्ट्स में दो प्रमुख सत्ता केंद्र माना जाता है। यह संगठन टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स में 66% की बहुमत हिस्सेदारी को नियंत्रित करता है, जिसके कारण यह विवाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
विवाद के पहले संकेत
इस अंदरूनी कलह का पहला स्पष्ट संकेत सितंबर 2025 में दिखा, जब मिस्त्री और उनके तीन समर्थक ट्रस्टियों ने मिलकर टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड से विजय सिंह को हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था। हालांकि, इसके बाद टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन को सर्वसम्मति से जीवनभर के लिए ट्रस्टी नियुक्त किया गया था।
संभावित कानूनी चुनौती
मेहली मिस्त्री ने फिलहाल अपनी अगली कार्रवाई पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन ऐसी संभावना है कि वह इस निर्णय को कानूनी चुनौती दे सकते हैं। मिस्त्री यह तर्क दे सकते हैं कि अक्टूबर 2024 में रतन टाटा और डॉरबजी टाटा ट्रस्ट्स की संयुक्त बैठक में सभी ट्रस्टियों को जीवनभर के लिए नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था।
बड़े निहितार्थ
टाटा ट्रस्ट्स ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि यदि कोई ट्रस्टी अपने वचन (वादे) का उल्लंघन करता है, तो इससे ट्रस्ट्स द्वारा लिए गए सभी पूर्व निर्णयों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। इसमें नोएल टाटा की टाटा सन्स बोर्ड में निदेशक के रूप में नियुक्ति का निर्णय भी शामिल है। 156 साल पुराना टाटा ग्रुप, जिसके तहत 30 सूचीबद्ध कंपनियों सहित लगभग 400 कंपनियां आती हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सरकारी हस्तक्षेप
इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए सरकार भी इसमें दखल दे चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा और टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की है। सरकार ने दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यह आंतरिक विवाद सार्वजनिक न हो और ग्रुप की आर्थिक भूमिका पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।






































