Cheque Bounce: भारत में चेक बाउंस होना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है। अभी हाल ही में, बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस होने के मामले में जेल जाना पड़ा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी पाया था, जिसके बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया था। यहां हम जानेंगे कि चेक बाउंस होने पर क्या सजा होती है और इसे लेकर भारत में क्या नियम-कानून हैं?
क्या है चेक बाउंस
भारत में चेक बाउंस होना 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881' की धारा 138 के तहत एक अपराध है। जब कोई चेक प्राप्तकर्ता भुगतान के लिए बैंक में अपना चेक जमा करता है और बैंक द्वारा उस चेक को देने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में 'अपर्याप्त धनराशि' (Insufficient Funds) का मेमो लगाकर बिना भुगतान के वापस कर दिया जाता है, इसे ही चेक बाउंस होना कहते हैं। उदाहरण के लिए, आपके दोस्त ने आपको 2 लाख रुपये का चेक दिया, जिसे क्लियर कराने के लिए आप अपने बैंक गए। लेकिन, जब आपका बैंक चेक को क्लियर करने का प्रोसेस शुरू किया तो मालूम चला कि आपके दोस्त के बैंक खाते में 2 लाख रुपये हैं ही नहीं। ऐसे में आपका बैंक उस चेक को अपर्याप्त धनराशि का मेमो लगाकर वापस कर देगा।
चेक बाउंस होने पर क्या हो सकती है सजा
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने की स्थिति में 3 तरह की सजाएं हो सकती हैं। क्लियरटैक्स के मुताबिक, चेक बाउंस होने की स्थिति में पहली सजा के रूप में दोषी को चेक अमाउंट की दोगुना राशि का फाइन भरना होगा। दूसरी सजा के तौर पर दोषी को 2 साल तक की जेल हो सकती है और तीसरी सजा के तौर पर दोषी को अमाउंट की दोगुना राशि का फाइन भरने के साथ-साथ दो साल तक जेल में भी बिताने पड़ सकते हैं। चेक बाउंस जैसे गंभीर अपराध से बचने के लिए इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि आप सामने वाले को जिस बैंक खाते का चेक दे रहे हैं, उस खाते में पर्याप्त पैसे जमा हों।