भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की 3 दिनों तक चलने वाली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक आज से शुरू होगी। ये बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अर्थव्यवस्था में वृद्धि पर केंद्रित केंद्रीय बजट पेश किया गया है, महंगाई कम है और हाल ही में लंबे समय से प्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाहरी अस्थिरता खत्म हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है और फिलहाल वृद्धि और महंगाई को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में ब्याज दरों को बिना बदले यथावत रखा जा सकता है।
संजय मल्होत्रा 6 फरवरी को करेंगे MPC के फैसलों की घोषणा
हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि कर्ज को और सस्ता करने के लिए आरबीआई एक और कटौती कर सकता है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का फैसला शुक्रवार, 6 फरवरी को घोषित किया जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, "एमपीसी के रेपो रेट पर कायम रहने की संभावना है और ये दर-कटौती चक्र का अंत भी हो सकता है।" मदन सबनवीस की बातों को आसाना भाषा में समझें तो यहां से रेपो रेट में पिछले साल शुरू हुए कटौती का सिलसिला खत्म हो सकता है।
रेपो रेट को स्थिर रखे जाने की संभावना ज्यादा
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि एजेंसी के अनुसार इस समय विराम उचित है ताकि जनवरी, 2026 की खुदरा महंगाई (सीपीआई) और वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त 2025-26 तक के जीडीपी आंकड़ों का आकलन किया जा सके। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि कम महंगाई आरबीआई को रेपो रेट में कटौती पर विचार करने की गुंजाइश देती है। बजट भी राजकोषीय अनुशासन के कारण महंगाई बढ़ाने वाला नहीं है और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी ठीक है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार ब्याज दरें स्थिर रखने की संभावना ज्यादा है ताकि भविष्य के लिए विकल्प खुले रखे जा सकें।



































