ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयर गुरुवार को एक बार फिर भारी दबाव में नजर आए। कारोबार के दौरान स्टॉक 5.5% टूटकर ₹31.11 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में शेयर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिसकी बड़ी वजह कंपनी के संस्थापक और प्रमोटर भाविश अग्रवाल द्वारा हिस्सेदारी बेचने की खबरें मानी जा रही हैं। भाविश अग्रवाल ने लगातार दो कारोबारी सत्रों में Ola Electric के शेयर बेचे हैं। बुधवार को उन्होंने 4.2 करोड़ शेयरों की बिक्री की, जबकि इससे एक दिन पहले मंगलवार को 2.6 करोड़ शेयर बेचे गए थे। कंपनी का कहना है कि यह बिक्री प्रमोटर-लेवल के ₹260 करोड़ के लोन को पूरी तरह चुकाने के मकसद से की जा रही है। अब तक किए गए दोनों सौदों का कुल मूल्य लगभग ₹234 करोड़ रहा है।
निवेशकों की संपत्ति से ₹55,520 करोड़ खत्म
खबर के मुताबिक, Ola Electric का शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹99.90 (26 दिसंबर 2024) से करीब 70% टूट चुका है। वहीं, अगस्त 2024 में आए IPO के इश्यू प्राइस ₹76 के मुकाबले स्टॉक लगभग 60% नीचे कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, लिस्टिंग के बाद अगस्त 2024 में बने ऑल-टाइम हाई ₹157 से अब तक शेयर करीब 80% तक गिर चुका है।
कंपनी का मार्केट कैप भी तेजी से घटा है। यह अपने शिखर स्तर ₹69,250 करोड़ से गिरकर अब लगभग ₹13,725 करोड़ रह गया है। यानी निवेशकों की संपत्ति से 55,520 करोड़ रुपये से अधिक की वैल्यू खत्म चुकी है। 30 सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स के पास कंपनी में 5.51% हिस्सेदारी थी, जबकि 19.14 लाख से अधिक रिटेल निवेशकों के पास कुल 25.25% शेयर थे।
ओला इलेक्ट्रिक पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव
प्रमोटर द्वारा शेयरों की बिक्री के अलावा, ओला इलेक्ट्रिक पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव भी है। हीरो, एथर, बजाज और टीवीएस मोटर जैसे मजबूत खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। साथ ही, कंपनी की सर्विस से जुड़ी नकारात्मक खबरों और कमजोर बिक्री वॉल्यूम के चलते ओला की बाजार हिस्सेदारी में भी गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का प्रबंधन कोर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिजनेस की बजाय बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी सेल कारोबार पर अधिक ध्यान दे रहा है। साथ ही ऊंचा कर्ज, कमजोर कैश फ्लो और कमजोर फंडामेंटल्स भी ओला इलेक्ट्रिक के टर्नअराउंड में देरी की बड़ी वजह बने हुए हैं।
जानकार के मुताबिक, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर में निकट अवधि की ग्रोथ और मुनाफे को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं। पूरे सेक्टर में आक्रामक प्राइसिंग से मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, जबकि बढ़ती इनपुट और ऑपरेटिंग लागत के कारण कमाई की तस्वीर फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। यही वजह है कि ओला इलेक्ट्रिक के शेयर लगातार दबाव में बने हुए हैं।