कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के चलते सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर सोमवार, 13 अप्रैल को भारी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सप्ताहांत में इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने और मध्य-पूर्व में नए तनाव के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इस तेजी ने निवेशकों में चिंता बढ़ा दी, क्योंकि कच्चा तेल इन कंपनियों की सबसे बड़ी इनपुट लागत है और इससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।
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बाजार की स्थिति
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सुबह के कारोबार में:
HPCL के शेयरों में सबसे अधिक 5.4% की गिरावट
BPCL में 5% की गिरावट
IOC में 3.7% की गिरावट दर्ज की गई
28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक OMC शेयरों में 23-25% तक की गिरावट आ चुकी है।
आज के भाव
ब्रेंट क्रूड वायदा: $102 प्रति बैरल (7.5% की बढ़त)
WTI क्रूड: $104.69 प्रति बैरल (8.4% या $8.12 की तेजी)
पिछले महीने ब्रेंट $120 और WTI $109 तक पहुंच चुका था।
कीमतों में उछाल की वजह
अमेरिका द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध करने की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन में 8% का उछाल आया। दुनिया के तेल ट्रांसपोर्ट का लगभग 20% हिस्सा गुजरने वाला यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चेकपॉइंट माना जाता है। पिछले सप्ताह कीमतें कुछ घटी थीं, लेकिन शांति वार्ता के विफल हो जाने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद फिर तेजी लौट आई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी शुरू कर देगी।
सरकार ने उठाया है ये कदम
घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और निर्यात पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। सरकार ने डीजल पर निर्यात शुल्क को ₹21.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर कर दिया है, जो पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। वहीं, जेट फ्यूल पर लगने वाला शुल्क ₹29.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है। इस फैसले का मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच घरेलू बाजार को स्थिर बनाए रखना है।