Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उड़िसा में इसे पणा संक्रांति तो तमिलनाडु में पुथन्डु के रूप में मनाया जाता है। केरल में इसे विषु के रूप में और बंगाल में पोहेला बोइशाख के नाम से मनाया जाता है। वहीं असम में इस संक्रांति को बिहू और पंजाब में वैसाखी के रूप में मनाते हैं। यानी ये एक ऐसी संक्रांति है जो देश के लगभग सभी राज्यों में मनाई जाती है। यहां हम आपको बताएंगे मेष संक्रांति की पूजा विधि और मुहूर्त।
मेष संक्रांति मुहूर्त 2026 (Mesh Sankranti 2026 Date And Time)
- मेष संक्रांति - 14 अप्रैल 2026, मंगलवार
- मेष संक्रान्ति पुण्य काल - 05:57 AM से 01:55 PM
- मेष संक्रान्ति महा पुण्य काल - 07:30 AM से 11:47 AM
- मेष संक्रान्ति का क्षण - 09:39 AM
मेष संक्रांति पूजा विधि (Mesh Sankranti Puja Vidhi)
- मेष संक्रांति के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें। स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
- सूर्य देव को अर्घ्य देने वाले जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम अवश्य मिलाएं।
- सूर्य को अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।
- इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना भी न भूलें।
- इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा भी जरूर करें।
- पूजा के बाद किसी जरूरतमंदर व्यक्ति को अन्न और वस्त्र आदि का दान करें।
मेष संक्रांति का महत्व (Mesh Sankranti Ka Mahatva)
मेष संक्रांति को सतुआन या सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है। यह दिन स्नान, दान और जप के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन पितरों का तर्पण करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
Chandra Gochar: अक्षय तृतीया के दिन उच्च राशि में गोचर करेंगे चंद्रमा, 3 राशियों की होगी चांदी