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Satuan Parv 2026: आज है सतुआन पर्व, जान लें इसकी पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Apr 13, 2026 08:07 am IST,  Updated : Apr 14, 2026 11:53 am IST

Satuan Parv 2026: सतुआन पर्व को सतुआनी और सतुआ संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। ये पर्व मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग सत्तू का सेवन करते हैं।

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सतुआन पर्व पूजा विधि और मुहूर्त Image Source : FACEBOOK

Satuan Parv 2026: सतुआनी पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। ये एक पारंपरिक त्योहार है जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के दौरान मनाया जाता है। यह पर्व गर्मी की शुरुआत और नई फल का प्रतीक है। इस दिन सुबह स्नान के बाद सत्तू, आम का टिकोरा और गुड़ का सेवन और दान किया जाता है। जिससे शरीर को ठंडक मिलती है। इसके पर्व के बाद से ही लोग सत्तू का सेवन शुरू करते हैं। चलिए जानते हैं इस साल सतुआन पर्व कब है और इसकी पूजा विधि क्या है।

सतुआन पर्व 2026 (Satuani 2026 Date And Time)

सतुआन पर्व 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। पुण्य काल 05:57 AM से 01:55 PM तक रहेगा। मेष संक्रान्ति का क्षण 09:39 AM है।

सतुआन पर्व पूजा विधि (Satuan Parv Puja Vidhi)

सतुआनी पर्व के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इस पर्व से एक दिन पहले मिट्टी के घड़े में जल भरकर रखा जाता है। जिसे अगले दिन घर का कोई एक सदस्य स्नान के बाद पूरे घर में छिड़कता है। कहते हैं इससे घर की शुद्धि हो जाती है। इस दिन कई जगहों पर बासी भोजन करने की भी परंपरा है। इस दिन मुख्य रूप से सत्तू और कच्चे आम का सेवन किया जाता है।

सतुआन का महत्व (Satuan Ka Mahatva)

इस दिन खरमास का समापन हो जाता है। जिससे शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा यह त्योहार लोगों को गर्मी के मौसम के लिए तैयार करता है, इसलिए इस दिन ठंडी तासीर वाली चीजों जैसे सत्तू, कच्चे आम, मूली और गुड़ का सेवन किया जाता है। 

सतुआन के दिन दान (Satual Ke Din Kya Daan Kare)

इस दिन मिट्टी का नया घड़ा लाकर उसमें जल भरें। फिर उस पर कलावा बांधें और उसकी पूजा करें। पूजा के बाद इस घड़े को दान कर दें। कहते हैं सतुआन पर्व पर घड़े का दान करने से खूब पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा इस दिन सत्तू, गुड़, हाथ वाला पंखा, चप्पल और छाता दान करना भी बेहद पुण्य का काम माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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