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डाकघर में अगस्त से काउंटर पर कर सकेंगे ऑनलाइन पेमेंट, पूरे भारत में मिलेगी सुविधा, जानें पूरी बात

 Published : Jun 27, 2025 06:22 pm IST,  Updated : Jun 27, 2025 11:47 pm IST

पोस्ट ऑफिस में इस सुविधा की शुरुआत होने से लोगों को काफी सहूलियत होगी। यह देश के हर डाकघर में लागू होने जा रहा है।

लाखों-करोड़ों ग्राहकों को डाकघर में भुगतान से जुड़ी समस्या का समाधान मिलने जा रहा है।- India TV Hindi
लाखों-करोड़ों ग्राहकों को डाकघर में भुगतान से जुड़ी समस्या का समाधान मिलने जा रहा है। Image Source : FILE

अगर आप किसी काम की वजह से डाकघर आते-जाते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। देशभर के पोस्ट ऑफिस काउंटर पर अब आगामी अगस्त महीने से ऑनलाइन पेमेंट कर सकेंगे। पीटीआई की खबर के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इंडिया पोस्ट ने अपने आईटी सिस्टम में एक नए एप्लिकेशन के रोलआउट को पूरा करने के बाद अगस्त से काउंटरों पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करना शुरू करने का फैसला किया है।

अकाउंट यूपीआई सिस्टम से हो जाएंगे सिंक

खबर के मुताबिक, डाकघर अभी डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके अकाउंट यूपीआई (यूनिक पेमेंट इंटरफेस) सिस्टम से सिंक नहीं हैं। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि डाक विभाग अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को लागू कर रहा है जिसमें नए एप्लिकेशन होंगे जो डायनेमिक क्यूआर कोड के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे। अगस्त 2025 तक सभी डाकघरों में रोलआउट पूरा हो जाएगा।

पायलट रोलआउट कर्नाटक सर्कल में शुरू

 आईटी 2.0 के तहत इस सिस्टम का पायलट रोलआउट कर्नाटक सर्कल में शुरू किया गया है। मैसूर हेड ऑफिस, बागलकोट हेड ऑफिस और इसके अधीनस्थ कार्यालयों में मेल उत्पादों की क्यूआर-आधारित बुकिंग सफलतापूर्वक की गई। डाक विभाग ने शुरुआत में, डिजिटल लेनदेन को एनेबल करने के लिए पोस्ट ऑफिस में बिक्री काउंटरों पर स्थिर क्यूआर कोड पेश किया था। लेकिन बार-बार होने वाली तकनीकी समस्याओं और ग्राहकों की शिकायतों के चलते, इस आइडिया को बंद करना पड़ा।

पोस्ट ऑफिस को लेकर सरकार ने की है यह पहल

भारत को 1.5 लाख ग्रामीण डाकघरों के साथ एक बड़े लॉजिस्टिक्स संगठन में बदलने की सरकार की योजना है। हाल के वर्षों में डाकघरों में काफी बदलाव किया गया है और उन्हें ग्रामीण भारत में समुदायों, खासकर महिलाओं के वित्तीय समावेशन के लिए बैक बोन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, जहां औसतन राष्ट्रीय बैंकों में महिलाओं के 20 प्रतिशत खाते हैं, वहीं भारत के पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के खाते खोले गए हैं। 

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