पहले 2019 में जहां हर एक घर की मांग पर एक से ज्यादा घर बन रहे थे, वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून तक) में ये आंकड़ा गिरकर महज 0.36 रह गया है।
इस नई बढ़ोतरी के बाद, नए ग्राहकों के लिए होम लोन की नई दरें 7.5% से 8.70% के बीच होंगी।
सस्ते घरों की तलाश में लोग अब मेट्रो सिटी से सटे लोकेशन्स को पसंद कर रहे हैं। इसके चलते टियर-2 और टियर-3 शहरों में घरों की मांग बढ़ी है।
रियल एस्टेट किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवनकाल में लिए जाने वाले सबसे बड़े निवेश निर्णयों में से एक है, फिर भी लोग जल्दबाजी कर देते हैं।
अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने कहा कि आरबीआई की आज की पॉलिसी से पहले रेपो रेट में तीन बार लगातार कटौती हुई है। इससे होम लोन सस्ता हुआ है और लोगों पर ईएमआई का बोझ कम हुआ है।
दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक दरों में एक और कटौती कर सकता है क्योंकि वृद्धि के दृष्टिकोण के लिए चुनौतियां संभावित मुद्रास्फीति जोखिमों से ज़्यादा हैं।
डेटा के अनुसार, इस साल जनवरी से जून के बीच इन आठ शहरों में घरों की बिक्री 5 प्रतिशत घटकर 2,53,119 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 2,67,219 यूनिट थी।
घर से आगे अब सोसायटी के भीतर ही मिनी थिएटर, गेमिंग लाउंज और म्यूजिक जोन जैसे ज़ोन तैयार किए जा रहे हैं ताकि परिवार एक साथ ज्यादा क्वालिटी टाइम बिता सके।
दिल्ली-एनसीआर में फ्लैट खरीदना एक महत्वपूर्ण निर्णय है, लेकिन सही जानकारी और प्लानिंग से यह अनुभव सुखद और लाभकारी बन सकता है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि घरों की बिक्री में गिरावट की वजह प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत है।
फ्लैट की बुकिंग से पहले बिल्डर से कार्पेट, बिल्ट-अप और सुपर बिल्ट-अप एरिया का ब्रेकअप मांगे। केवल सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर तुलना न करें।
अगर आप खुद की जमीन पर घर बनवाने की योजना बना रहे हैं तो सेल्फ-कंस्ट्रक्शन होम लोन एक बेहतर विकल्प है। बैंक आसानी से यह लोन देते हैं।
मध्यम आय और किफायती वर्ग के मामले में नई परियोजनाएं कम पेश हो रही हैं। साथ ही इस खंड में पहले के बचे फ्लैट की कमी के कारण आपूर्ति कम है।
रियल एस्टेट मार्केट में सुस्ती दिखाई दे रही है। प्रॉपर्टी की ऊंची कीमत के चलते बिक्री में गिरावट आ गई है।
होम लोन लंबी अवधि की एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में इनकम, बजट, रीपेमेंट की क्षमता और बाकी जिम्मेदारियों का आकलन करने के बाद ही होम लोन की राशि तय करनी चाहिए।
पहली छमाही में अधिकतर लैंड डील रेजिडेंशियल, कमर्शियल और मिक्स यूज प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए हुए हैं।
अगर प्रॉपर्टी खरीदने का मकसद साफ रहेगा, तो निवेश भी समझदारी वाला होगा और रिटर्न भी बंपर मिलेगा।
आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में आधा प्रतिशत कटौती होने के बाद तमाम बैंकों ने लोन सस्ता किया है। कई सरकारी बैंक तो सबसे सस्ती दर पर हाउसिंग लोन मुहैया करा रहे हैं।
बारिश हो रही है। यह फ्लैट देखने और बुक करने के लिए बेस्ट समय है। आप सही प्रोजेक्ट और फ्लैट का चयन आसानी से कर पाएंगे।
आरबीआई द्वारा 2025 में रेपो दर में 100 बीपीएस की कटौती किए जाने के कारण होम लोन की ईएमआई घटी है। इसके बावजूद अगर आप अधिक ईएमआई दे रहे हैं तो बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
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