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हाउसिंग सेक्टर में स्लोडाउन, घरों की बिक्री में 32% की बड़ी गिरावट, इस कारण प्रॉपर्टी नहीं खरीद रहे लोग

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jul 22, 2025 05:23 pm IST,  Updated : Jul 22, 2025 05:23 pm IST

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि घरों की बिक्री में गिरावट की वजह प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत है।

Housing Sector- India TV Hindi
हाउसिंग सेक्टर Image Source : FILE

प्रॉपर्टी बाजार सुस्ती की चपेट में आ गया है। इस साल के पहले छह महीने में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत के फ्लैट्स की बिक्री में 32% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रियल एस्टेट सलाहकार जेएलएल इंडिया की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। हालांकि, इस दौरान लग्जरी घरों की बिक्री में मामूली पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-जून, 2025 में सात शहरों - मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे में घरों की बिक्री सालाना 13 प्रतिशत घटकर 1,34,776 इकाई रह गई। इन आंकड़ों में सभी श्रेणियों के अपार्टमेंट शामिल हैं। रोहाउस, विला और प्लॉट को इसमें शामिल नहीं किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-जून में फ्लैट (एक करोड़ रुपये से कम) की बिक्री सालाना 32 प्रतिशत घटकर 51,804 इकाई रह गई। हालांकि, इस दौरान प्रीमियम अपार्टमेंट (एक करोड़ रुपये से अधिक) की बिक्री छह प्रतिशत बढ़कर 82,972 इकाई हो गई। 

इस कारण लोग नहीं खरीद रहे घर 

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि घरों की बिक्री में गिरावट की वजह प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत है। मिडिल क्लास लोग चाहकर अपने सपने का आशियाना नहीं खरीद पा रहे हैं कि क्योंकि कीमत उनके बजट से बहुत बाहर निकल गया है। इससे मांग में कमी आई है। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद घरों की मांग में एकदम से उछाल आया था। इस मौके का फायदा उठाकर बिल्डर और ब्रोकर ने प्रॉपर्टी की कीमत में पिछले 4 साल में बेतहाशा वृद्धि कर दी। 40 से 50 लाख रुपये में मिलने वाला 2बीएचके फ्लैट के दाम पिछले 3 साल में बढ़कर 1 करोड़ पहुंच गए। इस तेजी से लोगों की आय नहीं बढ़ी है। अब वो चाहकर भी अपना घर नहीं खरीद पा रहे हैं। 

हिस्सेदारी 49% से घटकर 38% रह गई

जेएलएल इंडिया ने कहा कि 2025 की पहली छमाही के दौरान एक करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य के अपार्टमेंट की हिस्सेदारी कुल बिक्री में लगभग 62 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत था। समीक्षाधीन अवधि में एक करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में सालाना आधार पर 49 प्रतिशत से घटकर 38 प्रतिशत रह गई। जेएलएल इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान प्रमुख सामंतक दास ने कहा कि लक्जरी घरों की बिक्री में लगातार वृद्धि खरीदारों की बढ़ती समृद्धि, बदलती जीवनशैली की आकांक्षाओं और बड़े आवास की बढ़ती मांग का संकेत देती है। 

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