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भारत में किफायती घरों की भारी कमी, डिमांड की तुलना में सिर्फ एक-तिहाई सप्लाई

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 30, 2025 05:39 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 05:40 pm IST

पहले 2019 में जहां हर एक घर की मांग पर एक से ज्यादा घर बन रहे थे, वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून तक) में ये आंकड़ा गिरकर महज 0.36 रह गया है।

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मांग के मुकाबले सिर्फ एक-तिहाई किफायती घरों का हो रहा निर्माण (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : DDA

भारत के शहरी क्षेत्रों में किफायती घरों की भारी कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में किफायती घरों की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन उन्हें बनाने की रफ्तार बहुत धीमी हो गई है, जिससे किफायती घरों की डिमांड और सप्लाई में एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है। रियल एस्टेट की कंसल्टेशन कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया और नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) की एक रिपोर्ट में बताया गया कि देश के 8 बड़े शहरों- मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद में हालात काफी चिंताजनक हैं।

मांग के मुकाबले सिर्फ एक-तिहाई किफायती घरों का हो रहा निर्माण

पहले 2019 में जहां हर एक घर की मांग पर एक से ज्यादा घर बन रहे थे, वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून तक) में ये आंकड़ा गिरकर महज 0.36 रह गया है। इसका मतलब ये है कि मांग के मुकाबले सिर्फ एक-तिहाई घर ही बन रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में शहरी किफायती घरों की वर्तमान कमी 94 लाख यूनिट है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण 2030 तक ये कमी बढ़कर तीन करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। नारेडको के अध्यक्ष जी हरि बाबू ने कहा कि नाइट फ्रैंक और नारेडको की रिपोर्ट से भारत में सस्ते मकानों की कमी की समस्या एक बार फिर सामने आई है। 

वर्तमान में 94 लाख घरों की कमी

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 94 लाख मकानों की कमी है, जो 2030 तक बढ़कर 3 करोड़ हो सकती है। हरि बाबू ने कहा कि यs चिंता की बात है कि किफायती मकानों की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन उनकी संख्या घट रही है। इसके अलावा निजी कंपनियों का निवेश भी बहुत कम है, जिससे यs समस्या और बढ़ रही है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल ने कहा, "किफायती मकान सिर्फ एक सामाजिक जरूरत नहीं है, बल्कि एक आर्थिक जरूरत भी है। मांग के पक्ष में सरकारी समर्थन सराहनीय रहा है, लेकिन अब आपूर्ति की बाधाओं को दूर करना बेहद जरूरी है।" 

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