युद्ध के कारण इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।
खाड़ी देशों में हो रहे हमलों की बारीकी से निगरानी कर रही टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया ने सोमवार को अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ब्रिटेन के लिए निर्धारित सभी फ्लाइट्स का संचालन शुरू कर दिया।
गैस इंपोर्टिंग कंपनी 'पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड' ने गैस मार्केटिंग कंपनियों को सूचित किया है कि इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर लगातार किए जा रहे हमलों के बाद कतर ने अपना एलएनजी उत्पादन बंद कर दिया है।
नागर विमानन मंत्रालय के निर्देशों के बाद, एएआई ने सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ऑपरेटरों से वर्तमान फ्यूल सप्लाई के स्टेटस की डिटेल्स मांगी है।
बीएमआई ने अपनी 'इंडिया आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो इससे भारत के जीडीपी पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सोमवार को सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ 3 कंपनियों के शेयर ही बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी की सभी 27 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव की लपटें अब भारत के कृषि निर्यात तक पहुंच चुकी हैं। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में अनिश्चितता गहराती जा रही है। इसका सीधा असर भारतीय बासमती चावल कारोबार पर दिखने लगा है।
दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन ने कहा कि मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से घरेलू बाजार में अगले 3 से 4 दिनों तक गिरावट देखने को मिल सकती है।
ईरान की सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।
इजरायल और ईरान के बीच मिसाइलों से हो रहे हमलों की वजह से खाड़ी देशों ने अपने एयर स्पेस को बंद कर दिया है, जिसकी वजह से हजारों उड़ानें रद्द की गई हैं।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) सुरक्षा एवं परिचालन नियमों के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइन कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
ईरान पर हुए इस हमले की वजह से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं।
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के ताजा हमलों ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। लेकिन इस बार गोलाबारी की गूंज सिर्फ तेहरान या तेल अवीव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आहट नई दिल्ली तक सुनाई दे रही है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने देश के तेल-तिलहन बाजार में हलचल मचा दी है।
ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। तनाव की स्थिति में सप्लाई चेन बाधित होने की चिंता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जो भारत पर काफी बुरा असर डालेगा।
इस समझौते पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके इजराइली समकक्ष बेजेलेल स्मोट्रिच ने हस्ताक्षर किए।
भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि होने से दोनों देशों के निवेशकों को उचित सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। ये मध्यस्थता के जरिये विवाद निपटान के लिए एक स्वतंत्र मंच देगा।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी मंगलवार को क्रमशः मध्य पूर्व के लिए अपनी सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। इराकी एयर स्पेस भी फिर से खुल गया है और अब फ्लाइ्ट्स का आना-जाना शुरू हो गया है।
पिछले हफ्ते शुक्रवार को सेंसेक्स 1046.30 अंकों (1.29%) की बढ़त के साथ 82,408.17 अंकों पर और निफ्टी 319.15 अंकों (1.29%) की तेजी के साथ 25,112.40 अंकों पर बंद हुआ था।
भारत में प्रतिदिन खपत होने वाले 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल में से लगभग 1.5 से 2 मिलियन होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आता है।
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