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क्या हैं लुधियाना पश्चिम सीट के समीकरण? उपचुनाव में AAP और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर

 Published : Jun 18, 2025 09:16 pm IST,  Updated : Jun 18, 2025 09:16 pm IST

लुधियाना पश्चिम उपचुनाव आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए साख का सवाल बन गया है। भाजपा और अकाली दल भी इन चुनावों के जरिए अपनी ताकत परख रहे हैं। 19 जून को मतदान के बाद 23 जून को आने वाले नतीजे बताएंगे कि पंजाब की राजनीति में किसकी पकड़ मजबूत है।

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लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में 19 जून को वोटिंग है और नतीजे 23 जून को आएंगे। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

लुधियाना: पंजाब की लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए सूबे में अपनी ताकत साबित करने का बड़ा मौका है। दूसरी ओर, कांग्रेस, जो इस शहरी सीट पर पहले 6 बार जीत चुकी है, इसे फिर से हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। हालांकि इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला AAP और कांग्रेस के बीच है, लेकिन नतीजे यह भी बताएंगे कि भारतीय जनता पार्टी का पंजाब के शहरी मतदाताओं पर कितना प्रभाव है। साथ ही, यह उपचुनाव शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व की भी परीक्षा लेगा, क्योंकि उनकी पार्टी लगातार हार के बाद खुद को मजबूत करने की कोशिश में है।

लुधियाना पश्चिम सीट पर क्यों हो रहा उपचुनाव?

लुधियाना पश्चिम उपचुनाव के लिए वोटिंग 19 जून को होगी, और वोटों की गिनती 23 जून को होगी। यह सीट AAP के विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी के जनवरी में निधन के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर कुल 14 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। AAP ने इस उपचुनाव में अपने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया है। 61 साल के अरोड़ा लुधियाना के जाने-माने उद्योगपति हैं और सामाजिक कार्यों के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह ‘कृष्ण प्राण ब्रेस्ट कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट’ चलाते हैं और 2022 से राज्यसभा सांसद हैं। वहीं, कांग्रेस ने अपने पूर्व मंत्री और पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भारत भूषण आशु को मैदान में उतारा है। 51 साल के आशु 2012 और 2017 में इस सीट से विधायक रह चुके हैं। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आप के गोगी ने 7,512 वोटों से हरा दिया था। आशु पहले की कांग्रेस सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं।

BJP और अकाली दल ने मैदान में किसे उतारा?

BJP ने अपने वरिष्ठ नेता जीवन गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो पंजाब बीजेपी की कोर कमेटी के सदस्य हैं और पहले पार्टी के प्रदेश महासचिव रह चुके हैं। शिरोमणि अकाली दल ने परोपकर सिंह घुम्मन को अपना उम्मीदवार चुना है, जो पेशे से वकील हैं और लुधियाना बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। यह उपचुनाव पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। पिछले साल नवंबर में हुए 4 विधानसभा उपचुनावों में AAP ने 3 सीटें जीती थीं, लेकिन लोकसभा चुनाव में उसे केवल 3 सीटों पर जीत मिली थी, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका था। AAP नेतृत्व ने मतदाताओं से संजीव अरोड़ा को वोट देने की अपील की है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने यह भी ऐलान किया है कि अगर अरोड़ा जीतते हैं, तो उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा।

क्या है पंजाब की विधानसभा का समीकरण?

कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल, चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, गुरजीत सिंह औजला, राणा गुरजीत सिंह और परगट सिंह जैसे बड़े नेताओं ने आशु के लिए प्रचार किया है। कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी की साख भी इस उपचुनाव में दांव पर है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रवनीत सिंह बिट्टू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा नेता तरुण चुघ जैसे नेताओं ने जीवन गुप्ता के लिए प्रचार किया है। बता दें कि पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में AAP के पास 94 विधायक हैं, कांग्रेस के 16, शिरोमणि अकाली दल के तीन, बीजेपी के दो और बहुजन समाज पार्टी का एक विधायक है। एक सीट निर्दलीय विधायक के पास है।

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