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केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू को 4 धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेकने की सजा, पुलिस के खिलाफ की थी जातिसूचक टिप्पणी

 Reported By: Puneet Pareenja Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jun 24, 2026 02:24 pm IST,  Updated : Jun 24, 2026 02:42 pm IST

जातिसूचक टिप्पणी के विवाद के मामले मं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब SC आयोग के सामने पेश हुए। आयोग ने बिट्टू को धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेकने की सजा सुनाई।

SC कमीशन के समक्ष पेश हुए रवनीत बिट्टू- India TV Hindi
SC कमीशन के समक्ष पेश हुए रवनीत बिट्टू Image Source : PTI

चंडीगढ़ः केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू बुधवार को पंजाब राज्य अनुसूचित जाति (SC) आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी के सामने पेश हुए। उन्होंने जातिसूचक से जुड़ी अपनी हालिया टिप्पणियों पर खेद जताया और अनुसूचित जाति समुदाय से माफ़ी मांगी। पेशी के दौरान बिट्टू ने हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बिट्टू को चार प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेकने के निर्देश दिए। बिट्टू को अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) में मत्था टेकने और समानता व सामाजिक सद्भाव के प्रतीक के तौर पर सामुदायिक लंगर में भाग लेने का भी निर्देश दिया गया। रवनीत सिंह बिट्टू ने आयोग के निर्देशों को स्वीकार किया और उनका पालन करने पर सहमति जताई।

पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में आयोग ने उनका पक्ष सुनने के बाद धार्मिक सेवा के रूप में उन्हें चार धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक होने के निर्देश दिए। आयोग के आदेश के अनुसार, रवनीत बिट्टू को निम्नलिखित धार्मिक स्थलों पर जाकर माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त करना होगा। 

  • श्री दरबार साहिब (गोल्डन टेंपल)
  • डेरा ब्रह्मदास
  •  भगवान वाल्मिकी जी डेरा
  •  डेरा बल्लन

26 मई को हुई थी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस

यह विवाद 26 मई की एक घटना से जुड़ा है। उस दिन धुरी में बीजेपी नेता ओंकार सिंह को छुड़ाने की मांग करते हुए बिट्टू की पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई थी। केंद्रीय मंत्री पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। ओंकार सिंह को नगर निकाय चुनावों से पहले 'साइलेंट पीरियड' के दौरान कथित तौर पर प्रचार करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। 

आयोग के सामने पेशी के बाद बिट्टू ने कहा, "एक SHO ने मेरी गाड़ी रोक दी थी। जब मैंने उन्हें गाड़ी हटाने के लिए कहा तो मेरे पीछे खड़े लोग कहने लगे कि वे सरदार हैं। इस पर मैंने जवाब दिया कि क्या इस देश में कोई सरदार, SC, हिंदू या OBC किसी से कम है? उस गरमा-गरमी के माहौल में मैंने दो ऐसी बातें कह दीं जो मुझे नहीं कहनी चाहिए थीं। मुझे अगले ही दिन इसका एहसास हो गया। मैंने तुरंत माफ़ी मांग ली और आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया।"

 

 

बिट्टू ने आयोग चेयरमैन के सामने क्या दी सफाई

बिट्टू ने कहा कि उनके शब्द कानूनी तौर पर गलत थे। उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और संबंधित वीडियो भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से डिलीट कर दी। उन्होंने बताया कि सबसे पहले संगरूर में एक एसपी रैंक के अधिकारी ने उन्हें रोका और जानकारी दी कि ओएसडी ओंकार को बलिया थाने में हिरासत में रखा गया है। बिट्टू के अनुसार, जब वह बलिया थाने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि ओएसडी ओंकार को वहां से संगरूर ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि दोबारा संगरूर पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने उनका रास्ता रोकते हुए बताया कि ओंकार धूरी में मौजूद हैं। 

बिट्टू ने आरोप लगाया कि धूरी पहुंचने पर एक SHO रैंक के अधिकारी ने उनकी गाड़ी के सामने वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने दावा किया कि इस दौरान उनके साथ बदतमीजी की गई और कुछ ऐसे शब्द कहे गए, जिनसे उन्हें ठेस पहुंची। बिट्टू ने कहा कि उस समय हालात काफी तनावपूर्ण थे और पुलिस के व्यवहार से वह भावुक हो गए थे। उन्होंने आयोग के सामने कहा कि यदि उनकी ओर से भी कोई आपत्तिजनक शब्द निकले हों तो इसके लिए वह पहले ही मीडिया के सामने माफी मांग चुके हैं।

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