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शिरोमणि अकाली दल में दो फाड़, बागी धड़े ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को चुना अध्यक्ष, सुखबीर बादल के खिलाफ खोला मोर्चा

 Reported By: Puneet Pareenja Edited By: Pankaj Yadav
 Published : Aug 11, 2025 03:01 pm IST,  Updated : Aug 11, 2025 03:07 pm IST

शिरोमणि अकाली दल के बागी धड़े से जुड़े नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को अपना अध्यक्ष घोषित किया। जल्द ही शिरोमणि अकाली दल का ये बागी धड़ा पार्टी के अधिकार के लिए चुनाव आयोग के समक्ष दावा कर सकता है।

सुखबीर सिंह बादल- India TV Hindi
सुखबीर सिंह बादल Image Source : X/@OFFICEOFSSBADAL

पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के भीतर चल रही अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के बागी धड़े ने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को अपने गुट का अध्यक्ष घोषित कर दिया है। यह कदम सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई वाले शिअद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि बागी धड़ा अब पार्टी के आधिकारिक अधिकार के लिए चुनाव आयोग के समक्ष दावा पेश करने की तैयारी में है।

पार्टी में बगावत हुई कैसे

शिरोमणि अकाली दल पिछले कुछ समय से आंतरिक संकट से जूझ रहा है। 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के दौरान लिए गए कुछ फैसलों, खासकर बरगाड़ी बेअदबी और बहबल कलां पुलिस फायरिंग जैसे मामलों ने सिख समुदाय के बीच पार्टी की साख को नुकसान पहुंचाया। इन घटनाओं के लिए सुखबीर सिंह बादल को जिम्मेदार ठहराते हुए श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें 'तनखैया' (धार्मिक कदाचार का दोषी) घोषित किया था। इसके बाद, श्री अकाल तख्त साहिब ने 2 दिसंबर 2024 को एक पांच सदस्यीय भर्ती समिति गठित की थी, जिसे पार्टी में नए सिरे से सदस्यता अभियान चलाकर अगले अध्यक्ष का चयन करने का जिम्मा सौंपा गया था।

हालांकि, सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले शिअद ने इस समिति को दरकिनार करते हुए अपना अलग सदस्यता अभियान चलाया और सुखबीर को फिर से अध्यक्ष चुन लिया। इस कदम ने बागी नेताओं को और भड़का दिया, जिन्होंने इसे पार्टी के संविधान और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अवहेलना बताया।

बागी धड़े का नया कदम

आज, 11 अगस्त 2025 को अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पांच सदस्यीय भर्ती समिति की अगुवाई में बागी धड़े ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में भर्ती समिति के सदस्यता अभियान के आधार पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह को शिरोमणि अकाली दल (बागी गुट) का अध्यक्ष घोषित किया गया। बागी धड़े का दावा है कि उनका सदस्यता अभियान पारदर्शी और श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुरूप था, जिसके आधार पर वे खुद को असली शिरोमणि अकाली दल मानते हैं। बागी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका गुट शिअद के मूल संविधान के आधार पर ही चलेगा और सिख पंथ की भावनाओं और पंजाब के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा। उन्होंने सुखबीर बादल पर पार्टी को "बादल परिवार के इशारों पर चलाने" और पंथिक मूल्यों से समझौता करने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग में दावेदारी की तैयारी

बागी धड़ा अब शिरोमणि अकाली दल के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग के समक्ष दावा पेश करने की योजना बना रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह गुट अपनी सदस्यता और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए पहले ही 15 लाख सदस्यों का दावा कर चुका है। बागी नेताओं का कहना है कि सुखबीर बादल के नेतृत्व ने पार्टी को कमजोर किया, जिसके चलते 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों में शिअद को लगातार हार का सामना करना पड़ा।

सुखबीर सिंह बादल
Image Source : X/@OFFICEOFSSBADALसुखबीर सिंह बादल

ज्ञानी हरप्रीत सिंह: बागी धड़े का नया चेहरा

श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को बागी धड़े का नेतृत्व सौंपा जाना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह का सिख समुदाय में गहरा प्रभाव है, और उनकी धार्मिक विश्वसनीयता बागी धड़े को पंथिक समुदाय का समर्थन दिलाने में मदद कर सकती है। बागी नेताओं में प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जागीर कौर, परमिंदर सिंह ढींडसा और सुरजीत सिंह रखड़ा जैसे दिग्गज शामिल हैं, जो लंबे समय से सुखबीर बादल के नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

सुखबीर बादल का जवाब

सुखबीर बादल ने बागी धड़े के इस कदम को "भाजपा द्वारा प्रायोजित साजिश" करार दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ अवसरवादी तत्व केंद्रीय एजेंसियों के इशारे पर पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सुखबीर ने श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए सभी बागी नेताओं से मतभेद भुलाकर पंथ और पंजाब के हित में एकजुट होने की अपील की थी। हालांकि, बागी धड़ा सुखबीर के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है और उनका कहना है कि "सुखबीर बादल के नेतृत्व में पार्टी का भविष्य अंधकारमय है।"

आगे की चुनौतियां

शिरोमणि अकाली दल के लिए यह फूट एक गंभीर संकट का संकेत है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को अपनी एकता और साख को फिर से स्थापित करने की बड़ी चुनौती है। बागी धड़े के चुनाव आयोग में दावेदारी पेश करने से शिअद का आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा, सिख समुदाय के बीच बढ़ती नाराजगी और कट्टरपंथी ताकतों का उभरना भी पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

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