राजस्थान: "पापा, मैं अभी ऑन ड्यूटी हूं, बिल्कुल ठीक हूं..." यह शब्द आज भी पिता जगदीश प्रसाद के कानों में गूंज रहे हैं। किसे पता था कि 16 जून की दोपहर को हुई यह बातचीत पिता-पुत्र के बीच आखिरी संवाद साबित होगी। कुछ ही घंटों बाद रांची (झारखंड) में तैनात अग्निवीर प्रदीप कुमार एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए और देश सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर गए।
गुरुवार को उनके पैतृक गांव चिमनपुरा (बाडेट) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर परिजनों की आंखें नम हो गईं। वहीं, हजारों ग्रामीणों ने "भारत माता की जय" और "प्रदीप कुमार अमर रहें" के नारों के साथ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
"पापा, मैं स्विमिंग पूल पर ड्यूटी कर रहा हूं"
पिता जगदीश प्रसाद ने नम आंखों से बताया कि हादसे वाले दिन दोपहर करीब 3:00 बजे उनकी प्रदीप से फोन पर बात हुई थी। प्रदीप ने कहा था, "पापा, मैं अभी स्विमिंग पूल पर ऑन ड्यूटी तैनात हूं। मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं।" इसके बाद उसने अपनी मां से भी बात कर घर-परिवार का हालचाल जाना। परिवार को क्या पता था कि यह बातचीत उनकी आखिरी याद बनकर रह जाएगी। बातचीत के कुछ समय बाद ही रांची स्थित 623 ईएमई बटालियन के स्विमिंग पूल पर एक हादसा हो गया, जिसमें प्रदीप ने अपनी जान गंवा दी।
बचपन से था सेना में जाने का सपना
पिता ने बताया कि प्रदीप बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था। पढ़ाई में भी वह बेहद मेधावी था और 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। परिवार चाहता था कि वह किसी अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करे, लेकिन प्रदीप का सपना सिर्फ सेना था। पिता ने बताया कि उन्होंने एक बार बेटे से कहा था कि सेना के अलावा भी कई अच्छे विकल्प हैं, लेकिन प्रदीप का जवाब आज भी उन्हें गर्व से भर देता है। उसने कहा था, "पापा, मेरी इच्छा सिर्फ देश के लिए जीने और मरने की है। मैं देश सेवा के लिए ही सेना में जाऊंगा।" बेटे के दृढ़ संकल्प के आगे परिवार ने भी सहमति दी और 23 अप्रैल 2025 को प्रदीप भारतीय सेना में शामिल हो गया।
छुट्टी पर आने का वादा अधूरा रह गया
करीब डेढ़-दो महीने पहले ही प्रदीप ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी और पहली बार छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार के साथ समय बिताने के बाद उसने अगले महीने फिर घर आने का वादा किया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस बार वह छुट्टी मनाने नहीं, बल्कि तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटा।
"साहब, हौसला रखना... प्रदीप को हम बचा नहीं पाए"
हादसे के बाद यूनिट के सूबेदार मेजर का फोन पिता के पास आया। उन्होंने बताया कि प्रदीप स्विमिंग पूल में गिर गया है और डॉक्टर उसका उपचार कर रहे हैं। शुरुआत में परिवार को उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर लौट आएगा। लेकिन करीब आधे घंटे बाद दोबारा फोन आया। इस बार सैन्य अधिकारी की आवाज भारी थी। उन्होंने कहा, "साहब, हौसला रखना, हिम्मत मत हारना... बहुत कोशिशों के बाद भी हम प्रदीप को बचा नहीं पाए।" यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गम भी, गर्व भी
महज 19 वर्ष की आयु में अग्निवीर प्रदीप कुमार के जाने से पूरे झुंझुनूं जिले में शोक की लहर है। हर घर की आंखें नम हैं, लेकिन साथ ही गांव और परिवार को अपने वीर बेटे पर गर्व भी है। पिता जगदीश प्रसाद कहते हैं कि बेटा भले ही आज उनके बीच नहीं है, लेकिन उसने देश सेवा का जो सपना देखा था, उसे पूरा करते हुए अमर हो गया। तिरंगे में लिपटे बेटे को अंतिम विदाई देते समय पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था। गांव के लोगों का कहना था कि प्रदीप भले ही इस दुनिया से विदा हो गया हो, लेकिन उसका बलिदान और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
(रिपोर्ट- अमित शर्मा)
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