शुक्रवार का दिन झूंझुनूं जिले के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। तिरंगे में लिपटी भारतीय नौसेना के जवान कुलदीप दिवाच (28) की पार्थिव देह जैसे ही उनके पैतृक गांव घरडू पहुंची, पूरा गांव गम में डूब गया। हर आंख नम थी, हर जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी- देश ने अपना एक वीर सपूत खो दिया। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब महज 18 माह की मासूम बेटी को अपने पिता के अंतिम दर्शन कराने लाया गया। तिरंगे में लिपटे पिता को देखकर वह मासूम बार-बार "पापा... पापा..." कहकर पुकारती रही। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें छलक उठीं।
'देखो बेटी बुला रही है... वापस आ जाओ', बेसुध होकर गिर पड़ी पत्नी
उधर पत्नी अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी। वह बिलखते हुए बार-बार कहती रही- "देखो... बेटी बुला रही है... वापस आ जाओ..."। पति को अंतिम विदाई देते-देते वह बेसुध होकर गिर पड़ी। मां, भाई और अन्य परिजन भी फूट-फूटकर रो पड़े। पूरे माहौल में सिर्फ सिसकियां और "भारत माता की जय" तथा "कुलदीप अमर रहें" के जयघोष सुनाई दे रहे थे।
हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई
शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे सूरजगढ़ थाने से जवान कुलदीप दिवाच की पार्थिव देह के साथ तिरंगा यात्रा शुरू हुई। करीब 3 किलोमीटर लंबी यात्रा में हजारों लोग और सैकड़ों वाहन शामिल हुए। रास्ते में सामाजिक संगठनों, स्कूली बच्चों और आमजन ने पुष्पवर्षा कर वीर सपूत को अंतिम श्रद्धांजलि दी। करीब 10:30 बजे पार्थिव देह गांव घरडू पहुंची, जहां अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर श्मशान घाट तक भारतीय नौसेना के बैंड के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार
श्मशान घाट पर भारतीय नौसेना की ओर से जवान कुलदीप दिवाच को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सेना के अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार, पिलानी विधायक पितराम सिंह काला, पूर्व सांसद संतोष अहलावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश कुमार जांगिड़, भाजपा नेता राजेश दहिया, सूरजगढ़ प्रधान बलवान सिंह पूनिया, डीएसपी विकास धींधवाल तथा थानाधिकारी रणजीत सिंह सेवदा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।
दोपहर करीब 1 बजे बड़े भाई प्रदीप, जो स्वयं भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं, ने अपने छोटे भाई को मुखाग्नि दी। इस क्षण मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
10 जुलाई... जीवन का सबसे खास और सबसे दर्दनाक दिन
सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार ने बताया कि 10 जुलाई कुलदीप दिवाच के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन रहा। 10 जुलाई 1999 को उनका जन्म हुआ था, 10 अगस्त को ही उनका भारतीय नौसेना में चयन हुआ और नियति का ऐसा संयोग कि 10 जुलाई को ही उनका अंतिम संस्कार भी हुआ।

मुंबई में ड्यूटी पर जाते समय हुआ हादसा
गौरतलब है कि 6 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे कुलदीप दिवाच स्कूटी से मुंबई में अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान तेज अंधड़ में सड़क किनारे खड़ा एक पेड़ उनके ऊपर गिर पड़ा। गंभीर रूप से घायल कुलदीप का इलाज चल रहा था, लेकिन 9 जुलाई की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। गुरुवार को लेफ्टिनेंट कमांडर रजत तोमर के नेतृत्व में भारतीय नौसेना की टीम विशेष वाहन से उनकी पार्थिव देह दिल्ली होते हुए सूरजगढ़ लेकर पहुंची थी।
2018 में नौसेना में हुए थे भर्ती
10 जुलाई 1999 को जन्मे कुलदीप दिवाच 2018 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। वे लीडिंग एयर ऑर्डनेंस मैकेनिक (LAOM) के पद पर कार्यरत थे और भारतीय नौसेना पोत शिकरा पर तैनात थे। यह पद नौसेना की विमानन शाखा में विमानों के हथियारों और गोला-बारूद के रखरखाव से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है। कुलदीप अपने पीछे मां सुभीता देवी, पत्नी संगीता , 18 माह की बेटी हर्षिता और भारतीय वायुसेना में कार्यरत बड़े भाई प्रदीप को छोड़ गए हैं।
एक वीर जवान की यह विदाई सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे झुंझुनूं और देश का दर्द बन गई। तिरंगे में लिपटे कुलदीप दिवाच ने अंतिम यात्रा में भी हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया, लेकिन उनकी मासूम बेटी की "पापा..." की पुकार लंबे समय तक हर आंख को नम करती रहेगी।
(रिपोर्ट- अमित शर्मा)
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