Chanakya Niti: बचपन में कभी न कभी आपने चाणक्य के बारे में सुना या तो पढ़ा जरूर होगा कि कैसे उन्होंने अपने अपमान का बदला राजा को गद्दी से उतार कर एक गरडिये के बेटे को दिला दी। आचार्य चाणक्य को चंद्रगुप्त मौर्य को गद्दी सौंपी और उन्हें एक योग्य राजा भी बनाया। इसके साथ उन्होंने आदर्श जीवन के बारे में एक पुस्तक भी लिखी, जो चाणक्य नीति या फिर नीति शास्त्र कहलाती है। नीति शास्त्र में लिखी गई कई बातें व्यक्ति के जीवन में उतारने व्यक्ति आदर्श जीवन जी सकता है।
चाणक्य ने बताया है कि कई व्यक्ति कई कारणों से जीवन पर्यंत गरीब ही रह जाते हैं। पहला कारण है उनके कर्म, दूसरा है गलत जगह पर रहना। चाणक्य ने कहा कि गरीब रह जाने के पीछे इनका बड़ा हाथ होता है, चाणक्य नीति में उन्होंने एक पंक्ति कही है जो इस प्रकार है-
धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः।
पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसे वसेत॥
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के प्रथम अध्याय के 9वें श्लोक में कहते हैं कि कुछ पांच जगहों पर रहने वाले लोग अपने जीवन में हमेशा गरीब और दुखी ही रहते हैं। ये लोग चाहकर भी तरक्की नहीं पा सकते। ये लोग लंपट-मूर्ख समान जीवन जीते हैं। इन्हें न शास्त्र का ज्ञान रहता है और न ही ये सीखने की कोशिश तक करते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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