Govardhan Bhagwan ki Aarti (गोवर्धन पूजा आरती): गोवर्धन पूजा प्रकृति, अन्न और भगवान कृष्ण के प्रति आभार प्रकट करने का उत्सव है। इस पर्व में गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता अनुसार, जब इंद्रदेव के प्रकोप से गोकुल वासी संकट में पड़ गए थे, तो उस समय श्री कृष्ण भगवान ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी की रक्षा की थी। इस दिन घर-घर में गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इस त्योहार को कहीं-कहीं अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। इस साल ये त्योहार 22 अक्तूबर 2025 को मनाया जा रहा है। यहां हम आपको बताएंगे गोवर्धन पूजा की आरती।
Govardhan Bhagwan ki Aarti (गोवर्धन पूजा आरती)
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- तोपे* पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
- तोपे चढ़े दूध की धार ।
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- तेरे गले में कंठा साज रेहेओ,
- ठोड़ी पे हीरा लाल ।
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,
- तेरी झांकी बनी विशाल ।
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- तेरी सात कोस की परिकम्मा,
- चकलेश्वर है विश्राम ।
- श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
- तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
- गिरिराज धारण प्रभु तेरी शरण ।
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