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Jagannath Rath Yatra 2025: हर साल क्यों 15 दिन के लिए बीमार होते हैं भगवान जगन्नाथ? जानें इसके पीछे की प्राचीन कथा

 Published : Jun 16, 2025 08:29 am IST,  Updated : Jun 16, 2025 08:29 am IST

भगवान जगन्नाथ हर साल की तरह इस साल भी इन दिनों बीमार चल रहे हैं। करीबन 15 दिनों तक आराम करने के बाद वह अपने भक्तों के बीच निकलते हैं और सभी को आशीष देते हैं।

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भगवान जगन्नाथ Image Source : PTI

Jagannath Rath Yatra: भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा इन दिनों बीमार हो गए हैं। परंपरा के मुताबिक, अब वे 14 दिन तक आराम करेंगे। भगवान की तबीयत खराब होने के कारण पुरी मंदिर को भक्तों के लिए बंद कर दिया गया है। अब केवल पुजारी और वैद्य जी ही इलाज के लिए सुबह-शाम भगवान के पास जा सकते हैं। बता दें कि इस बार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून को निकाली जाएगी।

स्नान के बाद होते हैं बीमार

पुरी के श्रीमंदिर में हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा 108 कलशों से स्नान कराए जाते हैं, जिसे स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस स्नान के बाद भगवान 15 दिनों के लिए अनवसर यानी बीमार हो जाते हैं और 14 दिनों तक आराम करते हैं और उनका इलाज भी चलता है। इस परंपरा के पीछे एक प्राचीन कथा भी है, आइए जानते हैं...

क्या है इसके पीछे की कथा?

कहते हैं कि एक बार पुरी में माधवदास नाम का एक भक्त रहा था, वह रोज भगवान जगन्नाथ की पूजा करता था। एक दिन उन्हें अतिसार का गंभीर रोग लग गया और वे इतने कमजोर हो गए कि चलने में उन्हें दिक्कत होने लगी। लेकिन उन्होंने किसी से मदद नहीं ली और अपने से ही स्वयं सेवा करते रहे।

भगवान ने खुद की भक्त की सेवा

जब माधवदास एकदम लाचार हो गए, तब स्वयं भगवान जगन्नाथ एक सेवक बनकर उनके घर आए और माधवदास की सेवा करने लगे। जब भक्त माधव को आया तो वह प्रभु को पहचान गया और भावविभोर होकर पूछा, "हे प्रभु आप तो त्रिलोक के स्वामी है, फिर भी मेरी सेवा क्यों कर रहे हैं? यदि आप चाहें तो मेरा रोग तुरंत खत्म कर सकते थे।" इस पर भगवान बोले- "भक्त की पीड़ा मुझसे देखी नहीं जाती, इसलिए मैं खुद सेवा करने आ गया। लेकिन हर व्यक्ति को अपना प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है, पर तुम्हारे प्रारब्ध में जो 15 दिन का रोग शेष हैं वह अब मैं स्वयं सहन करूंगा।"

इसी घटना के बाद से यह परंपरा बनी कि भगवान जगन्नाथ हर साल स्नान पूर्णिमा के बाद बीमार हो जाते हैं और 'अनवसर काल' में आराम करते हैं। यही कारण है हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को जब भगवान ठीक होते हैं तो वह अपने भक्तों के बीच भ्रमण के लिए रथ पर विराजित हो यात्रा के लिए निकलते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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