Vishu Kani 2026: मेष संक्रांति के साथ मनाया जाने वाला विषु कानी केरल का एक प्रमुख और बेहद शुभ पर्व है। यह दिन सिर्फ नए साल की शुरुआत नहीं बल्कि पूरे वर्ष के लिए सुख, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना का प्रतीक होता है। इस दिन सुबह का पहला दर्शन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जो आने वाले समय की दिशा तय करता है।
विषु कानी 2026 तिथि और मुहूर्त
विषु कानी का पर्व साल 2026 में 15 अप्रैल (बुधवार) को मनाया जाएगा। वहीं, मेष संक्रांति का समय 14 अप्रैल सुबह 09:39 बजे रहेगा। संक्रांति के अगले दिन सूर्योदय के बाद मनाया जाता है। इस पर्व का सबसे खास और शुभ पल सूर्योदय का होता है, जब परिवार के सदस्य उठकर सबसे पहले 'विषु कानी' का दर्शन करते हैं। यही परंपरा इस त्योहार की आत्मा मानी जाती है।
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
सूर्योदय- 15 अप्रैल 2026, सुबह 5:56 बजे
सूर्यास्त-15 अप्रैल 2026, शाम 6:47 बजे
क्या है विषु कानी?
'कानी' शब्द का अर्थ होता है ‘पहला दर्शन’। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विषु के दिन सुबह उठते ही जो पहली चीज हम देखते हैं, वही पूरे साल के सुख-दुख और समृद्धि को प्रभावित करती है। इसी वजह से इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और शुभ वस्तुओं को सजाकर उनका दर्शन करने की परंपरा निभाई जाती है। इसे बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
विषु कानी कैसे सजाई जाती है?
विषु कानी को बहुत ही सादगी और श्रद्धा के साथ सजाया जाता है। आमतौर पर एक बड़े पीतल के बर्तन (उरुली) में विभिन्न शुभ चीजों को व्यवस्थित रूप से रखा जाता है। इनमें भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर, चावल, नारियल, आम, केले, कटहल, सब्जियां, सोना या सिक्के, दर्पण (वलकन्नडी), पीतल का दीपक (निलाविलक्कु), फूल और धार्मिक ग्रंथ शामिल होते हैं। इन सभी वस्तुओं को इस तरह सजाया जाता है कि वे समृद्धि, संतुलन और खुशहाली का प्रतीक बनें।
विषु कानी सजाने की विधि
इस पर्व की तैयारी एक दिन पहले यानी विषु की पूर्व संध्या पर ही शुरू हो जाती है। घर का सबसे बुजुर्ग सदस्य या महिला पूजा स्थल पर सभी वस्तुओं को करीने से सजाती है। इसे घर के किसी शांत और साफ स्थान पर रखा जाता है। अगली सुबह, परिवार के सभी सदस्य आंखें बंद करके पूजा कक्ष में प्रवेश करते हैं और सबसे पहले इसी सजी हुई कानी का दर्शन करते हैं। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।
विषु कानी का धार्मिक महत्व
विषु कानी का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक सोच और नई शुरुआत का संदेश देता है। इस कानी में रखी हर वस्तु का अपना विशेष अर्थ होता है। जहां अनाज और फल उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक हैं, वहीं सोना-चांदी धन और वैभव का संकेत देते हैं। दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है, जबकि दर्पण आत्म-चिंतन और आत्मविश्वास को दर्शाता है। यह पर्व नई फसल, नई उम्मीदों और बेहतर भविष्य की कामना के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि विषु कानी का शुभ दर्शन पूरे साल को सुखमय और सफल बना सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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