Kajari Teej Vrat Katha (कजरी तीज की कहानी): कजरी तीज का व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं को समर्पित है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रहती हैं। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से होती है और इसका समापन चंद्रोदय के साथ होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर भूखी प्यासी रहकर शाम के समय शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करती हैं और फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना उपवास खोलती हैं। यहां हम आपको बताएंगे कजरी तीज की पूजा के समय कौन सी कथा पढ़ना जरूरी माना जाता है।
कजरी तीज की व्रत कथा (Kajari Teej Vrat Katha)
कजरी तीज की पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ किसी गांव में रहता था। उसकी महिला बहुत धर्मपरायण और भगवान शिव-पार्वती की उपासक थी। जब भाद्रपद का महीना शुरू हुआ तो उस स्त्री ने कजरी तीज का व्रत करने का संकल्प लिया। उस स्त्री का ऐसा विश्वास था कि इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति आती है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया के दिन वह प्रात: काल स्नान कर, निर्जल उपवास रख शिव-पार्वती की पूजा करने लगी। लेकिन उसे मन ही मन ये चिंता सताई जा रही थी कि पूजा में भगवान को भोग में क्या अर्पित करें क्योंकि उसके घर में खाने को कुछ भी नहीं था।
बहुत खोजने के बाद उसे अपने घर में एक कच्चा पेठा मिला जिसे उसने अच्छे से साफ किया और पूरी श्रद्धा से उसका भगवान को भोग लगाया। उसी गांव की रानी भी कजरी तीज का व्रत कर रही थी। उसने सोने-चांदी के बर्तनों में भव्य पकवान बनाए और रत्नों से सजे मंदिर में भगवान की पूजा की, लेकिन उस रानी का मन दिखावे और अहंकार से भरा था। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों भक्तों की भक्ति की परीक्षा लेने का सोचा।
वे ब्राह्मण स्त्री के घर एक साधु के रूप में पहुंचे और उससे कच्चा पेठा मांगा जो उसने भोग में चढ़ाया था। स्त्री ने बड़े ही प्रेमपूर्वक वह पेठा उन्हें दे दिया। साधु रूप में आए भगवान ने उस स्त्री से कहा कि तुम्हारी श्रद्धा और समर्पण से हम अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारा घर शीघ्र ही धन-धान्य से भर जाएगा और तुम्हारे पति को दीर्घायु की प्राप्ति होगी। जिसके बाद उस गरीब दंपत्ति के सारे कष्ट दूर हो गए और उनका घर धन-धान्य से भर गया।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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