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Madhvacharya Jayanti: कौन थे माधवाचार्य, कैसे मनाई जाती है इनकी जयंती? जानें हनुमान जी से क्या है इनका संबंध

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Oct 01, 2025 07:12 pm IST,  Updated : Oct 01, 2025 08:01 pm IST

Madhvacharya Jayanti: माधवाचार्य ने धार्मिक ही नहीं सामाजिक स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए। ऐसे में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। उनकी स्मृति में हर साल माधवाचार्य जयंती मनाई जाती है। चलिए जनाते हैं कैन थे संत माधवाचार्य और कैसे मनाते हैं इनकी जयंती

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कैसे मनाई जाती है इनकी जयंती? Image Source : CANVA

Madhvacharya Jayanti 2025: माधवाचार्य जयंती हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल संत माधवाचार्या की जयंती 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस बार जगद्गुरु माधवाचार्य यह 787वीं वर्षगांठ है। चलिए जानते हैं कि माधवाचार्य कौन थे और क्यों उनके जयंती इतनी धूमधाम से मनाई जाती है। इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि हनुमान जी के साथ उनका क्या संबंध है। 

2 अक्टूबर 2025 का पंचांग

ब्रह्म मुहूर्त- 04:14 एएम से 05:02 एएम

प्रातः सन्ध्या- 04:38 एएम से 05:50 एएम
अभिजित मुहूर्त- 11:23 एएम से 12:11 पीएम
विजय मुहूर्त- 01:46 पीएम से 02:33 पीएम
गोधूलि मुहूर्त- 05:44 पीएम से 06:08 पीएम
सायाह्न सन्ध्या- 05:44 पीएम से 06:56 पीएम
अमृत काल-11:01 पीएम से 12:38 एएम, 3 अक्टूबर 
निशिता मुहूर्त- 11:23 पीएम से 12:11 एएम, 3 अक्टूबर
रवि योग- दिन भर

क्यों मनाई जाती है माधवाचार्य जयंती?

माधवाचार्य का जन्म कर्नाटक के उडुपी के गांव पजका में 1238 ईस्वी में हुआ था। वह द्वैत वेदांत दर्शन के प्रवर्तक और भक्ति आंदोलन के महान संत कहलाते हैं। जगद्गुरु श्री माधवाचार्य की स्मृति में उनकी जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर माधवाचार्य की विशेष पूजा-अर्चना की जाती हैं। 

माधवाचार्य ने कहा था कि आत्मा और परमात्मा दोनों अलग-अलग हैं और प्राणी को ईश्वर भक्ति ही मोक्ष के द्वार तक ले पहुंचा सकती है। उन्होंने सामाजिक और धार्मिक स्तर पर सुधार कार्य किए, जो आज भी प्रासंगिक हैं। माधवाचार्य ने यज्ञ के दौरान होने वाली पशुबलि का घोर विरोध किया। समाज में उनके द्वारा दिए बेहतरीन योगदान के कारण ही उनकी जयंती पूरी श्रद्धा-भक्ति से मनाई जाती है।

कैसे मनाते हैं माधवाचार्य जयंती?

माधवाचार्य जयंती के अवसर पर भारत के दक्षिणी राज्यों में बड़े पैमाने पर उत्सव आयोजित किए जाते हैं। खासतौर में कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र में इस अवसर पर बड़ी धूम देखने को मिलती है। इस दिन संत के अनुयायी उनके विचारों और शिक्षाओं को याद करते हैं। उडुपी कृष्ण मंदिर और द्वैत दर्शन मठों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। शास्त्रों का पाठ किया जाता है। इसके साथ ही भजन-कीर्तन और प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 माधवाचार्य का हनुमान जी से क्या है संबंध?

कहा जाता है कि माधवाचार्य वायु देव के तीसरे अवतार थे। जबकि, हनुमान जी वायु के पहले और पांडु पुत्र भीम उनके दूसरे अवतार बताए गए हैं। माधवाचार्य द्वारा लिखा गया है कि श्री विष्णु ने स्वयं माधवाचार्य को यह बताया था कि उन्होंने वायु देव के तीसरे अवतार के रूप में धरती पर जन्म लिया है। ऐसा कहा जाता है कि संत माधवाचार्य को अलौकिक शक्तियां प्राप्त थी।  

माधवाचार्य का छोटा परिचय

जगतगुरु माधवाचार्य ने छोटी सी उम्र में ही वेद आदि की शिक्षा हासिल कर ली थी। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने द्वैतवाद के प्रचार-प्रसार के लिए एक मठ का निर्माण किया, जिसे 'द्वैत दर्शन' नाम दिया गया। द्वैतवाद का सिद्धांतः अद्वैतवाद के विपरीत यह आत्मा और परमात्मा के बीच अंतर बताता है। माधवाचार्य ने सभी सनातन धर्म ग्रंथों का भाष्य किया। इसके बाद एक ग्रन्थ 'अनुव्याख्यान' की रचना की, जिसमें उनकी व्याख्याएं तार्किक स्पष्टता के साथ लिखी गई थी।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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