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Makar Sankranti Kyu Manate Hai: मकर संक्रांति क्योंं मनाई जाती है और क्या है इसका महत्व, जानिए यहां

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Jan 14, 2026 08:44 am IST,  Updated : Jan 15, 2026 06:54 am IST

Makar Sankranti Kyon Manate Hain: जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि आखिर मकर संक्रांति मनाई क्यों जाती है। चलिए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? Image Source : CANVA

Makar Sankranti Kyon Manate Hain: मकर संक्रांति का पावन त्योहार इस बार कोई 14 जनवरी को मना रहा है तो कोई 15 जनवरी को मनाएगा। बता दें  साल भर में कुल बारह संक्रांतियां आती हैं, जिनमें से सूर्य की मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति सबसे खास होती है। इन दोनों ही संक्रांति पर सूर्य की गति में बदलाव होता है। जब सूर्य की कर्क संक्रांति होती है, तो सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन होते हैं और जब सूर्य की मकर संक्रांति होती है, तो सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसलिए कहीं-कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। यहां आप जानेंगे मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है।

शास्त्रों में वर्षभर की 12 संक्रांतियां को चार भागों में बांटा गया है- अयन, विषुव, षडशीति – मुख और विष्णुपदी या विष्णुपद संक्रांति। जब सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन और दक्षिणायन से उत्तरायण होता है, यानि सूर्य की मकर और कर्क संक्रांति 'अयन संक्रांति' कहलाती हैं। मेष और तुला संक्रांति को 'विषुव संक्रांति' कहते हैं । इस दौरान रात और दिन बराबर होते हैं। इसके अलावा मिथुन, कन्या, धनु और मीन संक्रांति को 'षडशीति–मुख' जबकि वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ संक्रांति को 'विष्णुपदी' या 'विष्णुपद' कहते हैं। 

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है (Why Do We Celebrate Makar Sankranti)

  1. कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
  2. धार्मिक मान्यताओं अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में जा मिली थीं। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
  3. महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए भी मकर संक्रांति का ही दिन चुना था।
  4. मकर संक्रांति पर ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर उनके सिरों को मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था। इस प्रकार ये त्योहार बुराइयों और नकारात्मकता के अंत का दिन के रूप में भी मनाया जाता है।
  5. कहते हैं माता यशोदा ने जब कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था तब उस दिन मकर संक्रांति थी। कहते हैं उसी दिन से ही मकर संक्रांति व्रत का प्रचलन शुरू हो गया था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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