1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Sita Navami 2025 Stuti: सीता नवमी के दिन करें इस स्तुति का पाठ, मां जानकी के साथ भगवान राम की भी बरसेगी कृपा

Sita Navami 2025 Stuti: सीता नवमी के दिन करें इस स्तुति का पाठ, मां जानकी के साथ भगवान राम की भी बरसेगी कृपा

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : May 05, 2025 12:06 pm IST,  Updated : May 05, 2025 12:07 pm IST

Sita Navami 2025: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां सीता का जन्म हुआ था। ऐसे में सीता नवमी के दिन इस स्तुति का पाठ करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

सीता नवमी 2025- India TV Hindi
सीता नवमी 2025 Image Source : INDIA TV

Sita Navami 2025 Stuti: आज सीता नवमी है मनाई जा रही है। माना जाता है कि आज ही के दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था यानि आज ही माता सीता धरती पर आयी थीं। इसीलिए आज के दिन को सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। सीता जी राजा जनक की पुत्री थीं, इसलिए उनका एक नाम जानकी भी था, जिस कारण से इस दिन को जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। कुल मिलाकर आज माता सीता की पूजा का विधान है। वैष्णव संप्रदाय में आज माता सीता के निमित्त व्रत रखने की परंपरा भी है। आज व्रत रखकर श्री राम की मूर्ति सहित माता सीता का पूरे विधि-विधान से पूजन करना चाहिए और उनकी स्तुति करनी चाहिए। 

कहते हैं कि इस दिन जो कोई भी व्रत करता है, उसे सोलह महादानों और सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है। लिहाजा आज के दिन का आपको लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए। साथ ही माता सीता और श्री राम के मंत्र का 11 बार जप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है- श्री सीतायै नमः। श्री रामाय नमः। इस प्रकार मंत्र जप करके माता सीता और श्री राम दोनों को पुष्पांजलि चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लें। इससे आपके सारे मनोरथ सिद्ध होंगे आपकी सारी इच्छाएं पूरी होगी। इसके अलावा सीता नवमी के दिन इस स्तुति का पाठ करने से व्यक्ति पर मां जानकी के साथ ही प्रभु राम की भी अपार कृपा बरसती है।

श्री जानकी स्तुति

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ।

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥ १॥

दारिद्र्यरणसंहत्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् ।
विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥ २॥

भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम् ।
पौलस्त्यैश्वर्यसन्त्री भक्ताभीष्टां सरस्वतीम् ॥ ३॥

पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम् ।
अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम् ॥ ४॥

आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम् ।
प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम् ॥ ५॥

नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम् ।
नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम् ॥ ६॥

पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्षस्थलालयाम् ।
नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम् ॥ ७॥

आह्लादरूपिणीं सिद्धि शिवां शिवकरी सतीम् ।
नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम् ।
सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा ॥ ८॥

इति श्रीस्कन्दमहापुराणे सेतुमाहात्म्ये श्रीहनुमत्कृता
श्रीजानकीस्तुतिः सम्पूर्णा ।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

ये भी पढ़ें-

Sita Navami 2025: 5 मई को मनाई जाएगी सीता नवमी, इस शुभ मुहूर्त में करें मां जानकी की पूजा, जानें मंत्र

Baglamukhi Jayanti 2025: बगलामुखी जयंती क्यों मनाई जाती है? जानें पूजा के लाभ, मंत्र और महत्व

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म