Highlights
- तुला संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है
- सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही माणिक या गार्नेट रत्न पहनना चाहिए
Tula Sankranti 2022: ग्रहों के राजा सूर्य देव जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। सोमवार, 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करने वाले हैं, इसलिए इसे तुला संक्रांति कहा जाएगा। तुला संक्रांति पर पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने के बाद दान-धर्म के कार्य करने का बड़ा महत्व बताया गया है। कहते हैं कि, इस दिन दान-धर्म के कार्यों का पुण्य कई गुना अधिक मिलता है। कर्नाटक और उड़ीसा में तो तुला संक्रांति का महत्व और भी ज्यादा माना जाता है। आइए आपको तुला संक्रांति के 5 ऐसे उपाय बताते हैं जिनके प्रयोग से सोई तकदीर भी जाग जाती है।
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1-पवित्र स्नान
तुला संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। सूर्य पूरे एक महीने तक तुला राशि में रहता है। इस दौरान आप किसी भी दिन पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी ले सकते हैं।
2- सूर्य पूजा
तुला संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करना भी बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है, उनके लिए ये उपाय बहुत ही उत्तम माना गया है।
3- महालक्ष्मी पूजा
कार्तिक मास में माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान जब सूर्य तुला राशि में आते हैं तो माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी होती है। इनकी पूजा से आपको धन-संपत्ति का वरदान मिल सकता है।
4- चंदन की माला
कई बार तुला राशि में सूर्य नीच का होकर बड़ी समस्याएं खड़ी कर देता है। ऐसे में लाल चंदन की माला का प्रयोग बहुत उत्तम होता है। इस दौरान सभी राशि के जातकों को लाल चंदन की माला गले में धारण करनी चाहिए।
5- मणिक
यदि कुंडली में सूर्य की महादशा चल रही हो तो सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही माणिक या गार्नेट रत्न पहनना चाहिए।
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