Ashtdhatu Ka Kada: ज्योतिष शास्त्र में अष्टधातु के कड़े को बेहद शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। अष्टधातु का कड़ा सभी ग्रहों को शांत करता है और सकारात्मक परिणाम आपको जीवन में प्राप्त होते हैं। अष्टधातु को धारण करने से भाग्य भी आपके साथ देने लगता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अष्टधातु का कड़ा किसे और कब पहनना चाहिए।
अष्टधातु का कड़ा
अष्टधातु का कड़ा सोना, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता, लोहा, टिन और पारा के मिश्रण से बनता है। इसलिए सभी ग्रहों की प्रतिकूलता को दूर करने की क्षमता इसमें होती है। इसके साथ ही सेहत के लिहाज से भी अष्टधातु को धारण करना अच्छा माना जाता है। ज्योतिष शस्त्र के साथ ही आयुर्वेद में भी अष्टधातु को शुभ माना गया है।
अष्टधातु का कड़ा कब और किसे पहनना चाहिए?
- जिन लोगों को करियर में उतार-चढ़ाव का सामना बार-बार करना पड़ता है, जो लोग बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं, जिनमें आत्मविश्वास की कमी है और जो लोग पारिवारिक जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं उन्हें अष्टधातु धारण करने की सलाह दी जाती है। अष्टधातु को धारण करने से करियर, स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। इसके साथ ही अष्टधातु आपको नजर दोष से भी बचाती है। अष्टधातु का कड़ा एक कवच की तरह आपकी सुरक्षा करता है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए अष्टधातु का कड़ा बेहद शुभ होता है। वहीं अन्य राशियां भी अष्टधातु पहन सकती हैं लेकिन पहनने से पहले इन्हें किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। अगर अष्टधातु आपके लिए शुभ है तो आप इसे पहनकर लाभ पा सकते हैं।
अष्टधातु का कड़ा पहनने के नियम
अष्टधातु का कड़ा आपको मंगलवार या शनिवार के दिन धारण करना चाहिए। अष्टधातु के कड़े को पहनने से पहले इसका शुद्धिकरण आपको दूध या गंगाजल से करना चाहिए। इसके बाद अपने इष्ट देव या फिर हनुमान जी के चरणों में इस कड़े को रखना चाहिए। इसके बाद धूप दीप दिखाकर अपने इष्ट देव या हनुमान जी की पूजा आपको करनी चाहिए। फिर अंत में अष्टधातु का कड़ा धारण करना चाहिए। महिलाओं को अष्टधातु का कड़ा बाएं हाथ में और पुरुषों को दाएं हाथ में पहनना चाहिए। अष्टधातु का कड़ा पहनने के बाद मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए वरना शुभ फलों की प्राप्ति में बाधा आ सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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