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इस मंदिर में दिन में 3 बार बदलता है देवी का रूप, नवरात्रि में लगती है यहां भक्तों की भीड़

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Mar 29, 2025 11:25 am IST,  Updated : Mar 29, 2025 11:25 am IST

उत्तराखंड में स्थित धारी देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं क्या हैं और इसके इतिहास के बारे में।

Dhari Devi Mandir- India TV Hindi
धारी देवी मंदिर Image Source : INDIA TV

Dhari Devi Mandir: देवभूमि उत्तराखंड में यूं तो कई मंदिर हैं लेकिन धारी देवी मंदिर का स्थान सबसे अलग है। इस मंदिर में स्थित देवी को उत्तराखंड की रक्षक देवी कहा जाता है। प्रतिदिन धारी देवी मंदिर में भक्त आते हैं लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां देवी माता के सिर की पूजा की जाती है। पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित इस प्रसिद्ध शक्ति पीठ से जुड़ी क्या मान्यताएं हैं और इसके महत्व के बारे में आज हम आपको जानकारी देंगे। 

धारी देवी मंदिर 

अलकनंदा नदी के तट पर स्थिति धारी देवी मंदिर चारधाम यात्रा मार्ग के बीच में पड़ता है। माना जाता है कि द्वापर युग से यह मंदिर धारो गांव के पास स्थित है। इस मंदिर को चारधामों का रक्षक भी माना जाता है। यहां माता रानी के धड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भयंकर बाढ़ आने के चलते मूर्ति  देवी की मूर्ति भी उस में बह गई और धारो गांव के पास एक चट्टान पर जाकर रुक गई। इसके बाद एक ईश्वरीय वाणी हुई, जिसने देवी की मूर्ति को धारो गांव के पास स्थापित करने को कहा। धारो गांव के लोगों ने ही इसके बाद माता की प्रतिमा को यहां स्थापित किया और तब से उनकी पूजा यहां शुरू हो गई।

धारी देवी में रोज होता है यह चमत्कार

धारी देवी मेंदिर में देवी की प्रतिमा दिन में 3 बार रूप बदलती है।  सुबह कन्या, दोपहर में युवती और शाम के समय माता वृद्ध महिला के रूप में नजर आती हैं।  यह चमत्कार धारी देवी मंदिर में प्रतिदिन होता है। धारी देवी मंदिर में होने वाले इस चमत्कार को देखने के लिए विशेष रूप से भक्त यहां सुबह से शाम तक रुकते हैं।  

Dhari Devi Mandir
Image Source : INDIA TVधारी देवी मंदिर

मूर्ति को हटाने से आयी थी बाढ़

उत्तराखंड के स्थानीय लोगों का मानना है कि 2013 में जो भीषण बाढ़ आयी थी उसका कारण धारी देवी मां की मूर्ति को विस्थापित किया जाना था। आपको बता दें कि 2013 में 16 जून को धारी देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाया गया था और उसी शाम को उत्तराखंड में भीषण बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में हजारों लोगों की जान गई थी। उत्तराखंड के लोग मानते हैं कि माता के क्रोध के कारण ही वह भयानक बाढ़ आयी थी। 

धारी देवी और कालीमठ का संबंध

धारी देवी मंदिर में देवी काली के सिर की पूजा की जाती है वहीं कालीमठ में माता के धड़ की पूजा की जाती है। यह दोनों ही मंदिर देवी काली को समर्पित हैं लेकिन कालीमठ में तंत्र विद्या का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। वहीं देवी धारी को चारधामों की संरक्षक देवी माना जाता है। 

धारी देवी मंदिर दर्शन का समय

भक्तों के लिए धारी देवी का मंदिर सुबह 6 बजे से खुल जाता है। वहीं लगभग शाम के 7 बजे तक मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। 

कैसे पहुंचें?

देहरादून में स्थित हवाई अड्डे से धारी देवी मंदिर की दूरी 145 किलोमीटर है। वहीं ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से यहां पहुंचने में लगभग 115 किलोमीटर की यात्रा आपको तय करनी पड़ती है। बस और टैक्सी सेवा यहां पहुंचने के लिए हमेशा उपलब्ध रहती है। आप देहरादून, ऋषिकेष, हरिद्वार, पौड़ी, कोटद्वार से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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