Wednesday, March 18, 2026
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गणेश उत्सव का सातवां दिन आज, सुबह की पूजा के समय जरूर करें जय गणेश देवा आरती

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Updated : Sep 06, 2025 10:25 am IST

गणेशोत्सव या गणेश उत्सव की शुरुआत 27 अगस्त 2025 से हो चुकी है और इसका समापन 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दौरान श्रद्धालु घर पर सुबह-शाम गणेश जी की आरती करते हैं। यहां आप देखेंगे जय गणेश जय गणेश आरती के लिरिक्स।

Ganesh Ji Ki Aarti Live- India TV Hindi
Image Source : CANVA गणेश जी की आरती Live

हर साल गणेशोत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इन दस दिनों में भक्त गणेश भगवान की विधि विधान पूजा करते हैं और सुबह-शाम उनकी आरती जरूर गाते हैं। कहते हैं जो भी भक्त इस दौरान सच्चे मन से गणपति बप्पा की आरती करता है उसके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। यहां आप देखेंगे गणेश जी की आरती जय गणेश देवा के पूरे लिरिक्स।

गणेश जी की आरती लिरिक्स (Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics)

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,

चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे,

मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,

और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे,

संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,

कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत,

निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,

सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,

शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो,

जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

 

सुख करता दुखहर्ता आरती (Sukh Karta Dukh Harta Aarti Lyrics Hindi)

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची ।

नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ।

सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची ।

कंठी झलके माल मुकताफळांची ।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति ।

दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा ।

चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ।

हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा ।

रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया ।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति ।

दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना ।

सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ।

दास रामाचा वाट पाहे सदना ।

संकटी पावावे निर्वाणी, रक्षावे सुरवर वंदना ।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति ।

दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

गणाधीश गजानन दीनदयाल आरती (Ganadhish Gajanan Deendayal Aarti Lyrics Hindi)

गणाधीश गजानन दीनदयाल आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल लिरिक्स आरती

ॐ गणाधीश गजानन दीनदयाल,

आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……

लम्बोदर चतुर्भुज लीला तेरी न्यारी है,

वक्रतुण्ड महाकाय मूसे की सवारी है।।

भक्त जन भर भर लाये लड्डुअन के थाल

आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……..

रिद्धि सिद्धि पत्नी तेरी यश लाभ दो है सुत

तेरी पूजा करने वाला हो जाये पापों से मुक्त।।

बुद्धि के प्रदाता तेरी जय हो ओमकार

आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल।।बोलो गणाधीश…..

ब्रम्हा विष्णु रुद्र से भी पहले पूजा तेरी है

कार्य सिद्ध हेतु तेरी कृपा भी जरूरी है।।

शंख बाजे घंटा बाजे झाँझरो के ताल

आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल ।। बोलो गणाधीश…

माटी से बनाया तुमको माटी तेरी पूजा है

तेरे जैसा एकदन्त और नहीं दूजा है ।

शंकर के दुलारे प्यारे गौरा जी के लाल

आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल। बोलो गणाधीश..

आरती श्री गणपति जी (Ganpati Ji Ki Aarti)

गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।

तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।

धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।

सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।

लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।

श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।

देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।

पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।

चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं

पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।

सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

Ganesh Ji Ki Aarti

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  • 6:30 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    आज गणेश जी के इस मंत्र का जरूर करें जाप

    ‘गं गणपतये नमः’ आज आपको इस मंत्र का एक माला जाप करना चाहिए और मंत्र जाप के बाद भगवान को दुर्वा की गांठ अर्पित करनी चाहिए।

  • 10:16 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    आरती: श्री गणेश शेंदुर लाल चढ़ायो (Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo)

    शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।
    दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।
    हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको ।
    महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥
    जय देव जय देव..
    जय देव जय देव,
    जय जय श्री गणराज
    विद्या सुखदाता
    धन्य तुम्हारा दर्शन
    मेरा मन रमता,
    जय देव जय देव ॥

    अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।
    विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।
    कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।
    गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥
    जय देव जय देव..

    जय देव जय देव,
    जय जय श्री गणराज
    विद्या सुखदाता
    धन्य तुम्हारा दर्शन
    मेरा मन रमता,
    जय देव जय देव ॥

    भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
    संतत संपत सबही भरपूर पावे ।
    ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
    गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥

    जय देव जय देव,
    जय जय श्री गणराज
    विद्या सुखदाता
    धन्य तुम्हारा दर्शन
    मेरा मन रमता,
    जय देव जय देव ॥

  • 8:55 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    नामावलि: श्री गणेश अष्टोत्तर नामावलि (108 Shri Ganesh Ji)

    गजानन- ॐ गजाननाय नमः ।
    गणाध्यक्ष- ॐ गणाध्यक्षाय नमः ।
    विघ्नराज- ॐ विघ्नराजाय नमः ।
    विनायक- ॐ विनायकाय नमः ।
    द्वैमातुर- ॐ द्वैमातुराय नमः ।
    द्विमुख- ॐ द्विमुखाय नमः ।
    प्रमुख- ॐ प्रमुखाय नमः ।
    सुमुख-ॐ सुमुखाय नमः ।
    कृति- ॐ कृतिने नमः ।
    सुप्रदीप- ॐ सुप्रदीपाय नमः ॥ 10 ॥

    सुखनिधी- ॐ सुखनिधये नमः ।
    सुराध्यक्ष- ॐ सुराध्यक्षाय नमः ।
    सुरारिघ्न- ॐ सुरारिघ्नाय नमः ।
    महागणपति- ॐ महागणपतये नमः ।
    मान्या- ॐ मान्याय नमः ।
    महाकाल- ॐ महाकालाय नमः ।
    महाबला- ॐ महाबलाय नमः ।
    हेरम्ब- ॐ हेरम्बाय नमः ।
    लम्बजठर- ॐ लम्बजठरायै नमः ।
    ह्रस्वग्रीव- ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः ॥ 20 ॥

    महोदरा- ॐ महोदराय नमः ।
    मदोत्कट- ॐ मदोत्कटाय नमः ।
    महावीर- ॐ महावीराय नमः ।
    मन्त्रिणे- ॐ मन्त्रिणे नमः ।
    मङ्गल स्वरा- ॐ मङ्गल स्वराय नमः ।
    प्रमधा- ॐ प्रमधाय नमः ।
    प्रथम- ॐ प्रथमाय नमः ।
    प्रज्ञा- ॐ प्राज्ञाय नमः ।
    विघ्नकर्ता- ॐ विघ्नकर्त्रे नमः ।
    विघ्नहर्ता- ॐ विघ्नहर्त्रे नमः ॥ 30 ॥

    विश्वनेत्र- ॐ विश्वनेत्रे नमः ।
    विराट्पति- ॐ विराट्पतये नमः ।
    श्रीपति- ॐ श्रीपतये नमः ।
    वाक्पति- ॐ वाक्पतये नमः ।
    शृङ्गारिण- ॐ शृङ्गारिणे नमः ।
    अश्रितवत्सल- ॐ अश्रितवत्सलाय नमः ।
    शिवप्रिय- ॐ शिवप्रियाय नमः ।
    शीघ्रकारिण- ॐ शीघ्रकारिणे नमः ।
    शाश्वत - ॐ शाश्वताय नमः ।
    बल- ॐ बल नमः ॥ 40 ॥

    बलोत्थिताय- ॐ बलोत्थिताय नमः ।
    भवात्मजाय- ॐ भवात्मजाय नमः ।
    पुराण पुरुष- ॐ पुराण पुरुषाय नमः ।
    पूष्णे- ॐ पूष्णे नमः ।
    पुष्करोत्षिप्त वारिणे- ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः ।
    अग्रगण्याय- ॐ अग्रगण्याय नमः ।
    अग्रपूज्याय- ॐ अग्रपूज्याय नमः ।
    अग्रगामिने- ॐ अग्रगामिने नमः ।
    मन्त्रकृते- ॐ मन्त्रकृते नमः ।
    चामीकरप्रभाय- ॐ चामीकरप्रभाय नमः ॥ 50 ॥

    सर्वाय- ॐ सर्वाय नमः ।
    सर्वोपास्याय- ॐ सर्वोपास्याय नमः ।
    सर्व कर्त्रे- ॐ सर्व कर्त्रे नमः ।
    सर्वनेत्रे- ॐ सर्वनेत्रे नमः ।
    सर्वसिद्धिप्रदाय- ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।
    सिद्धये- ॐ सिद्धये नमः ।
    पञ्चहस्ताय- ॐ पञ्चहस्ताय नमः ।
    पार्वतीनन्दनाय- ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः ।
    प्रभवे- ॐ प्रभवे नमः ।
    कुमारगुरवे- ॐ कुमारगुरवे नमः ॥ 60 ॥

    अक्षोभ्याय- ॐ अक्षोभ्याय नमः ।
    कुञ्जरासुर भञ्जनाय- ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः ।
    प्रमोदाय- ॐ प्रमोदाय नमः ।
    मोदकप्रियाय- ॐ मोदकप्रियाय नमः ।
    कान्तिमते- ॐ कान्तिमते नमः ।
    धृतिमते- ॐ धृतिमते नमः ।
    कामिने- ॐ कामिने नमः ।
    कपित्थपनसप्रियाय- ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः ।
    ब्रह्मचारिणे- ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।
    ब्रह्मरूपिणे- ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः ॥ 70 ॥

    ब्रह्मविद्यादि दानभुवे- ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः ।
    जिष्णवे- ॐ जिष्णवे नमः ।
    विष्णुप्रियाय- ॐ विष्णुप्रियाय नमः ।
    भक्त जीविताय- ॐ भक्त जीविताय नमः ।
    जितमन्मधाय- ॐ जितमन्मधाय नमः ।
    ऐश्वर्यकारणाय- ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः ।
    ज्यायसे- ॐ ज्यायसे नमः ।
    यक्षकिन्नेर सेविताय- ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।
    गङ्गा सुताय- ॐ गङ्गा सुताय नमः ।
    गणाधीशाय- ॐ गणाधीशाय नमः ॥ 80 ॥

    गम्भीर निनदाय- ॐ गम्भीर निनदाय नमः ।
    वटवे- ॐ वटवे नमः ।
    अभीष्टवरदाय- ॐ अभीष्टवरदाय नमः ।
    ज्योतिषे- ॐ ज्योतिषे नमः ।
    भक्तनिधये- ॐ भक्तनिधये नमः ।
    भावगम्याय- ॐ भावगम्याय नमः ।
    मङ्गलप्रदाय- ॐ मङ्गलप्रदाय नमः ।
    अव्यक्ताय- ॐ अव्यक्ताय नमः ।
    अप्राकृत पराक्रमाय- ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः ।
    सत्यधर्मिणे- ॐ सत्यधर्मिणे नमः ॥ 90 ॥

    सखये- ॐ सखये नमः ।
    सरसाम्बुनिधये- ॐ सरसाम्बुनिधये नमः ।
    महेशाय- ॐ महेशाय नमः ।
    दिव्याङ्गाय- ॐ दिव्याङ्गाय नमः ।
    मणिकिङ्किणी मेखालाय- ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः ।
    समस्त देवता मूर्तये- ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः ।
    सहिष्णवे- ॐ सहिष्णवे नमः ।
    सततोत्थिताय- ॐ सततोत्थिताय नमः ।
    विघातकारिणे- ॐ विघातकारिणे नमः ।
    विश्वग्दृशे- ॐ विश्वग्दृशे नमः ॥ 100 ॥

    विश्वरक्षाकृते- ॐ विश्वरक्षाकृते नमः ।
    कल्याणगुरवे- ॐ कल्याणगुरवे नमः ।
    उन्मत्तवेषाय- ॐ उन्मत्तवेषाय नमः ।
    अपराजिते- ॐ अपराजिते नमः ।
    समस्त जगदाधाराय- ॐ समस्त जगदाधाराय नमः ।
    सर्वैश्वर्यप्रदाय- ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः ।
    आक्रान्त चिद चित्प्रभवे- ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः ।
    श्री विघ्नेश्वराय- ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः ॥ 108 ॥

    ॥ इति श्रीगणेशाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

  • 7:53 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    भगवान श्री गणेश स्तुति मंत्र

    • विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय!
    • नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते!!
    • भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय!
    • विद्याधराय विकटाय च वामनाय , भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते!!
    • नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नम:!
    • नमस्ते रुद्राय्रुपाय करिरुपाय ते नम:!!
    • विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारणे!
    • भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक!!
    • लम्बोदर नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय!
    • निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!
    • त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति ,
    • भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति!
    • विद्याप्रत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति,
    • तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव!!
    • गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम !
    • तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोSस्तु सदा मम !!
  • 7:09 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गजानन गणेशा हैं गौरा के लाला भजन

    • गजानन गणेशा है गौरा के लाला,
    • दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥
    • है सबसे जुदा और सबसे ही न्यारी,
    • है शंकर के सूत तेरी मूषक सवारी,
    • होती देवों में प्रथम तेरी पूजा,
    • नहीं देव कोई है तुमसे निराला,
    • गजानन गणेशा हैं गौरा के लाला,
    • दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥
    • जो है बाँझ संतान उनको मिली है,
    • जो है सुने आँगन वहां कलियाँ खिली है,
    • कोढ़ी तुम देते कंचन सी काया,
    • भूखे को देते हो तुम ही निवाला,
    • गजानन गणेशा हैं गौरा के लाला,
    • दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥
    • रिद्धि और सिद्धि हो तुम देने वाले,
    • ये तन मन ये जीवन है तेरे हवाले,
    • ‘अविनाश’ गाए और छूटे ना सरगम,
    • बना दे ‘बिसरया’ तू गीतों की माला,
    • गजानन गणेशा हैं गौरा के लाला,
    • दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥
    • गजानन गणेशा है गौरा के लाला,
    • दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥
  • 2:18 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश भगवान के 5 शक्तिशाली मंत्र

    1. वक्रतुण्ड गणेश मन्त्र
    श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

    2. गणेश शुभ-लाभ मन्त्र
    ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
    वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥

    3. गणेश गायत्री मन्त्र
    ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
    तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

    4. श्री महागणपति मूल मन्त्र
    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये
    वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥

    5. ऋणहर्ता गणपति मन्त्र
    ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥

  • 1:12 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    घर में पधारो गजानन जी मेरे घर में पधारो लिरिक्स | Ghar Me Padharo Gajanan Ji Mere Ghar Me Padharo Lyrics

    घर में पधारो गजानन जी मेरे घर में पधारो 
    रिद्धि सिद्धि लेके आओ गणराजा मेरे घर में पधारो 

    राम जी आना लक्ष्मण जी आना 
    संग में लाना सीता मैया 
    मेरे घर में पधारो घर में पधारो गजानन जी…

    ब्रम्हा जी आना विष्णु जी आना 
    भोले शंकर जी को ले आना 
    मेरे घर में पधारो घर में पधारो गजानन जी…

    लक्ष्मी जी आना गौरी जी आना
    सरस्वती मैया को ले आना 
    मेरे घर में पधारो घर में पधारो गजानन जी…

    विघन को हरना मंगल करना 
    कारज शुभ कर जाना 
    मेरे घर में पधारो घर में पधारो गजानन जी…

  • 12:14 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Om Jai Jagdish Hare Aarti: ॐ जय जगदीश हरे आरती

    ॐ जय जगदीश हरे
    स्वामी जय जगदीश हरे
    भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट
    क्षण में दूर करे
    ॐ जय जगदीश हरे
    ॐ जय जगदीश हरे
    स्वामी जय जगदीश हरे
    भक्त ज़नो के संकट दास ज़नो के संकट
    क्षण में दूर करे
    ॐ जय जगदीश हरे
    जो ध्यावे फल पावे दुःख बिन से मन का
    स्वामी दुख बिन से मन का
    सुख सम्पति घर आवे
    सुख सम्पति घर आवे
    कष्ट मिटे तन का
    ॐ जय जगदीश हरे
    मात पिता तुम मेरे
    शरण गहूं किसकी
    स्वामी शरण गहूं किसकी
    तुम बिन और ना दूजा
    तुम बिन और ना दूजा
    आस करूँ जिसकी
    ॐ जय जगदीश हरे
    तुम पूरण परमात्मा
    तुम अंतरियामी
    स्वामी तुम अंतरियामी
    पार ब्रह्म परमेश्वर
    पार ब्रह्म परमेश्वर
    तुम सबके स्वामी
    ॐ जय जगदीश हरे
    तुम करुणा के सागर
    तुम पालन करता
    स्वामी तुम पालन करता
    मैं मूरख खलकामी
    मैं सेवक तुम स्वामी
    कृपा करो भर्ता
    ॐ जय जगदीश हरे
    तुम हो एक अगोचर
    सबके प्राण पति
    स्वामी सबके प्राण पति
    किस विध मिलु दयामय
    किस विध मिलु दयामय
    तुम को मैं कुमति
    ॐ जय जगदीश हरे
    दीन बन्धु दुःख हर्ता
    ठाकुर तुम मेरे
    स्वामी रक्षक तुम मेरे
    अपने हाथ उठाओ
    अपनी शरण लगाओ
    द्वार पड़ा तेरे
    ॐ जय जगदीश हरे
    विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा
    स्वामी पाप हरो देवा
    श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
    श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
    सन्तन की सेवा
    ॐ जय जगदीश हरे
    ओम जय जगदीश हरे
    स्वामी जय जगदीश हरे
    भक्त ज़नो के संकट
    दास ज़नो के संकट
    क्षण में दूर करे
    ॐ जय जगदीश हरे
    ॐ जय जगदीश हरे
    स्वामी जय जगदीश हरे
    भक्त ज़नो के संकट
    दास जनो के संकट
    क्षण में दूर करे
    ॐ जय जगदीश हरे

  • 11:34 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    भगवान गणेश के 21 नामों की सूचि

    1. ॐ सुमुखाय नमः
    2. ॐ गणाधीशाय नमः
    3. ॐ उमा पुत्राय नमः
    4. ॐ गजमुखाय नमः
    5. ॐ लम्बोदराय नमः 
    6. ॐ हर सूनवे नमः
    7. ॐ शूर्पकर्णाय नमः 
    8. ॐ वक्रतुण्डाय नमः
    9. ॐ गुहाग्रजाय नमः 
    10. ॐ एकदन्ताय नमः 
    11. ॐ हेरम्बराय नमः 
    12. ॐ चतुर्होत्रै नमः 
    13. ॐ सर्वेश्वराय नमः 
    14. ॐ विकटाय नमः 
    15. ॐ हेमतुण्डाय नमः
    16. ॐ विनायकाय नमः 
    17. ॐ कपिलाय नमः 
    18. ॐ वटवे नमः
    19. ॐ भाल चन्द्राय नमः 
    20. ॐ सुराग्रजाय नमः 
    21. ॐ सिद्धि विनायकाय नमः 
  • 10:59 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Chalisa: गणेश चालीसा

    दोहा

    जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।

    विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

    चौपाई

    जय जय जय गणपति गणराजू।

    मंगल भरण करण शुभ काजू॥1॥

    जय गजबदन सदन सुखदाता।

    विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥2॥

    वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।

    तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥3॥

    राजत मणि मुक्तन उर माला।

    स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥4॥

    पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।

    मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥5॥

    सुन्दर पीताम्बर तन साजित।

    चरण पादुका मुनि मन राजित॥6॥

    धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।

    गौरी ललन विश्व-विख्याता॥7॥

    ऋद्घि-सिद्घि तव चंवर सुधारे।

    मूषक वाहन सोहत द्घारे॥8॥

    कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी।

    अति शुचि पावन मंगलकारी॥9॥

    एक समय गिरिराज कुमारी।

    पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥10॥

    भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।

    तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥11॥

    अतिथि जानि कै गौरि सुखारी।

    बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥12॥

    अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा।

    मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥13॥

    मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।

    बिना गर्भ धारण, यहि काला॥14॥

    गणनायक, गुण ज्ञान निधाना।

    पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥15॥

    अस कहि अन्तर्धान रुप है।

    पलना पर बालक स्वरुप है॥16॥

    बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना।

    लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥17॥

    सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।

    नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥18॥

    शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं।

    सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥19॥

    लखि अति आनन्द मंगल साजा।

    देखन भी आये शनि राजा॥20॥

    निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।

    बालक, देखन चाहत नाहीं॥21॥

    गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।

    उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥22॥

    कहन लगे शनि, मन सकुचाई।

    का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥23॥

    नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।

    शनि सों बालक देखन कहाऊ॥24॥

    पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा।

    बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा॥25॥

    गिरिजा गिरीं विकल हुए धरणी।

    सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥26॥

    हाहाकार मच्यो कैलाशा।

    शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥27॥

    तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।

    काटि चक्र सो गज शिर लाये॥28॥

    बालक के धड़ ऊपर धारयो।

    प्राण, मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥29॥

    नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।

    प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे॥30॥

    बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।

    पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥31॥

    चले षडानन, भरमि भुलाई।

    रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई॥32॥

    धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।

    नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥33॥

    चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।

    तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥34॥

    तुम्हरी महिमा बुद्ध‍ि बड़ाई।

    शेष सहसमुख सके न गाई॥35॥

    मैं मतिहीन मलीन दुखारी।

    करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥36॥

    भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।

    जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥37॥

    अब प्रभु दया दीन पर कीजै।

    अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥38॥

    श्री गणेश यह चालीसा।

    पाठ करै कर ध्यान॥39॥

    नित नव मंगल गृह बसै।

    लहे जगत सन्मान॥40॥

    दोहा

    सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

    पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

  • 10:05 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणाधीश गजानन दीनदयाल गणपति जी की आरती

    • गणाधीश गजानन दीनदयाल आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल लिरिक्स आरती
    • ॐ गणाधीश गजानन दीनदयाल,
    • आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……
    • लम्बोदर चतुर्भुज लीला तेरी न्यारी है,
    • वक्रतुण्ड महाकाय मूसे की सवारी है।।
    • भक्त जन भर भर लाये लड्डुअन के थाल
    • आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……..
    • रिद्धि सिद्धि पत्नी तेरी यश लाभ दो है सुत
    • तेरी पूजा करने वाला हो जाये पापों से मुक्त।।
    • बुद्धि के प्रदाता तेरी जय हो ओमकार
    • आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल।।बोलो गणाधीश…..
    • ब्रम्हा विष्णु रुद्र से भी पहले पूजा तेरी है
    • कार्य सिद्ध हेतु तेरी कृपा भी जरूरी है।।
    • शंख बाजे घंटा बाजे झाँझरो के ताल
    • आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल ।। बोलो गणाधीश…
    • माटी से बनाया तुमको माटी तेरी पूजा है
    • तेरे जैसा एकदन्त और नहीं दूजा है ।
    • शंकर के दुलारे प्यारे गौरा जी के लाल
    • आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल। बोलो गणाधीश..
  • 9:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Ji Ki Aarti: गणेश भगवान की आरती

  • 9:09 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    आरती श्री गणपति जी: गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती लिरिक्स

    गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।

    तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।

    धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।

    सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।

    लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।

    श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।

    देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।

    पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।

    चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं

    पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

    गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।

    सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥

    गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

  • 8:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    ​गणेश जी की आरती सुखकर्ता दुखहर्ता (sukhkarta dukhharta lyrics)

    • सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
    • नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
    • सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
    • कंठी झलके माल मुकताफळांची
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
    • चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
    • हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
    • रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
    • सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
    • दास रामाचा वाट पाहे सदना
    • संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
    • दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
    • हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
    • महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
    • जय जय जय जय जय
    • जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
    • धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
    • जय देव जय देव
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