1. Hindi News
  2. धर्म
  3. जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...गणेशोत्सव के दौरान बप्पा की ये आरती जरूर करें

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...गणेशोत्सव के दौरान बप्पा की ये आरती जरूर करें

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Updated : Aug 31, 2025 09:14 am IST

Ganesh Ji Ki Aarti Pdf Download, Jai Ganesh Jai Ganesh Deva (गणेश जी की आरती) Live: अगर आपने अपने घर पर बप्पा की प्रतिमा स्थापित की है तो रोज सुबह शाम गणेश जी की आरती जरूर करें। यहां आप देखेंगे गणपति जी की आरती के लिरिक्स।

ganesh ji ki aarti- India TV Hindi
गणेश जी की आरती Image Source : FREEPIK

Ganesh Ji Ki Aarti Pdf Download, Jai Ganesh Jai Ganesh Deva (गणेश जी की आरती) Live: 27 अगस्त 2025 से गणेशोत्सव पर्व की शुरुआत हो गई है और अब इसका समापन अनंत चतुर्दशी पर यानी 6 सितंबर को होगा। इस दौरान लोग घर पर स्थापित की गई बप्पा की प्रतिमा की विधि विधान पूजा करते हैं उन्हें भिन्न-भिन्न प्रकार के भोग लगाते हैं। साथ ही सुबह शाम उनकी आरती उतारते हैं। अगर आपके घर में भी गणपति जी विराजे हैं तो पूजा के समय इन आरतियों को करना बिल्कुल भी न भूलें। यहां आप देखेंगे गणेश जी की आरती के लिरिक्स।

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,

चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे,

मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,

और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे,

संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,

कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत,

निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,

सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,

शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो,

जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,

जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती,

पिता महादेवा ॥

Ganesh Ji Ki Aarti Pdf Download

ganesh ji ki aarti
Image Source : CANVAगणेश जी की आरती के लिरिक्स

आरती श्री गणपति जी: गणपति की सेवा मंगल मेवा आरती लिरिक्स

गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।

तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।

धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।

सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।

लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।

श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।

देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।

पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।

चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं

पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।

सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा...॥

गणेश जी की आरती सुखकर्ता दुखहर्ता (sukhkarta dukhharta lyrics)

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची

नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची

सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची

कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति

जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा

चंदनाची उटी कुमकुम केशरा

हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा

रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति

जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना

सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना

दास रामाचा वाट पाहे सदना

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति

जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को

दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को

हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को

महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता

जय देव जय देव

Sukhkarta Dukhharta Aarti Lyrics Pdf Download

Ganesh Chaturthi 2025- Ganesh Ji Ki Aarti

Auto Refresh
Refresh
  • 2:49 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेशोत्सव के दौरान जरूर करें गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ, पूरी होंगी मनोकामनाएं

    श्री गणपति अथर्वशीर्ष
     
    ॐ नमस्ते गणपतये।
    त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि
    त्वमेव केवलं कर्ताऽसि
    त्वमेव केवलं धर्ताऽसि
    त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
    त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि

    त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।।
    ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।।
    अव त्व मां। अव वक्तारं।
    अव श्रोतारं। अव दातारं।
    अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं।
    अव पश्चातात। अव पुरस्तात।
    अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्।
    अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।।
    सर्वतो मां पाहि-पाहि समंतात्।।3।।
    त्वं वाङ्‍मयस्त्वं चिन्मय:।
    त्वमानंदमसयस्त्वं ब्रह्ममय:।
    त्वं सच्चिदानंदाद्वितीयोऽसि।
    त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
    त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।4।।
    सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।
    सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
    सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।
    सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।
    त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभ:।
    त्वं चत्वारिवाक्पदानि।।5।।
    त्वं गुणत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
    त्वं देहत्रयातीत:। त्वं कालत्रयातीत:।
    त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यं।
    त्वं शक्तित्रयात्मक:।
    त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
    त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं
    रूद्रस्त्वं इंद्रस्त्वं अग्निस्त्वं
    वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
    ब्रह्मभूर्भुव:स्वरोम्।।6।।
    गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।
    अनुस्वार: परतर:। अर्धेन्दुलसितं।
    तारेण ऋद्धं। एतत्तव मनुस्वरूपं।
    गकार: पूर्वरूपं। अकारो मध्यमरूपं।
    अनुस्वारश्चान्त्यरूपं। बिन्दुरूत्तररूपं।
    नाद: संधानं। सं हितासंधि:
    सैषा गणेश विद्या। गणकऋषि:
    निचृद्गायत्रीच्छंद:। गणपतिर्देवता।
    ॐ गं गणपतये नम:।।7।।
    एकदंताय विद्‍महे।
    वक्रतुण्डाय धीमहि।
    तन्नो दंती प्रचोदयात।।8।।
    एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
    रदं च वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्।
    रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
    रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।।
    भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
    आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृ‍ते पुरुषात्परम्।
    एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:।।9।।
    नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।
    नम: प्रमथपतये।
    नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
    विघ्ननाशिने शिवसुताय।
    श्रीवरदमूर्तये नमो नम:।।10।।
    एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।
    स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
    स सर्व विघ्नैर्नबाध्यते।
    स सर्वत: सुखमेधते।
    स पञ्चमहापापात्प्रमुच्यते।।11।।
    सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
    प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
    सायंप्रात: प्रयुंजानोऽपापो भवति।
    सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
    धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति।।12।।
    इदमथर्वशीर्षमशिष्याय न देयम्।
    यो यदि मोहाद्‍दास्यति स पापीयान् भवति।
    सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत्।13।।
    अनेन गणपतिमभिषिंचति
    स वाग्मी भवति
    चतुर्थ्यामनश्र्नन जपति
    स विद्यावान भवति।
    इत्यथर्वणवाक्यं।
    ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्
    न बिभेति कदाचनेति।।14।।
    यो दूर्वांकुरैंर्यजति
    स वैश्रवणोपमो भवति।
    यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति
    स मेधावान भवति।
    यो मोदकसहस्रेण यजति
    स वाञ्छित फलमवाप्रोति।
    य: साज्यसमिद्भिर्यजति
    स सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।
    अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा
    सूर्यवर्चस्वी भवति।
    सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ
    वा जप्त्वा सिद्धमंत्रों भवति।
    महाविघ्नात्प्रमुच्यते।
    महादोषात्प्रमुच्यते।
    महापापात् प्रमुच्यते।
    स सर्वविद्भवति से सर्वविद्भवति।
    य एवं वेद इत्युपनिषद्‍।।16।।

  • 1:31 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि भजन

  • 1:09 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी के इन मंत्रो का जप करने से शिक्षा क्षेत्र में मिलती है सफलता

    1. ॐ गं गणपतये नमः।
    2. एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्।
    3. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  • 7:38 AM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    पूजा में सबसे पहले क्यों होती है गणेश जी की आरती?

    हर शुभ कार्य या पूजा में सबसे पहले गणेश जी की आरती की जाती है, यानि गणेश जी प्रथम पूज्य हैं। एक धार्मिक कथा की मानें तो भगवान शिव से जब देवताओं ने पूछा कि, प्रथम पूज्य कौन होना चाहिए तो शिव जी ने कहा कि जो ब्रह्मांड की सबसे पहले परिक्रमा करके लौटेगा वही प्रथम पूज्य होगा। इस पर सारे देवता तो ब्रह्मांड की परिक्रमा पर निकल गए लेकिन गणेश जी ने माता-पिता को ही अपना संसार बताया और शिव-पार्वती के इर्द-गिर्द चक्कर लगाया। तब भगवान शिव ने गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। हालांकि इस पर अन्य देवताओं ने आपत्ति जताई लेकिन शिव जी ने यह कहकर उनको शांत किया कि यह बात तो शास्त्र प्रमाणित है कि माता-पिता के चरणों में संपूर्ण ब्रह्मांड है। इसके अतिरिक्त गणेश जी को बुद्धि, चिंतन, ग्रहणशीलता और धैर्य का प्रतीक भी माना जाता है इसलिए भी सर्वप्रथम उनकी पूजा की जाती है। 

  • 2:27 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Ji Bhajan: गणेश भगवान का भजन

    • वक्रतुण्ड महाकाय,
    • ​सूर्यकोटि समप्रभ:,
    • निर्विघ्नं कुरु मे देव,
    • सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
    • पूजा होती है आपकी,
    • हे सिद्धि के दाता सर्वदा,
    • जय हो आपकी।
    • आप घर आए मेरे,
    • हम पर कृपा हुई,
    • हम सब भक्तो की बप्पा,
    • दुनिया ही गुलशन हुई।
    • अपनी दया की दृष्टि से,
    • किरपा करो सब भक्तो पर,
    • सेवा करेंगे हम सभी,
    • आकर के तेरी चौखट पर ॥
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आये है,
    • लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
    • देव सरताज आए है,
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आए है ॥
    • नयन गंगा बहाकर के,
    • पखारों इनके चरणों को,
    • मेरे गणराया के संग संग,
    • मेरे गणराया के संग संग,
    • ये मूषकराज आए है,
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आए है ॥
    • कभी रीझे ना ये धन पे,
    • पुकारा हमने है मन से,
    • दुखो को दूर कर सबके,
    • दुखो को दूर कर सबके,
    • बचाने लाज आए है,
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आए है ॥
    • उमड़ आई मेरी अँखियाँ,
    • देखकर अपने बप्पा को,
    • हमारी बिगड़ी किस्मत को,
    • हमारी बिगड़ी किस्मत को,
    • बनाने आज आए है,
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आए है ॥
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आये है,
    • लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
    • देव सरताज आए है,
    • सजा दो घर को फूलों से,
    • मेरे गणराज आए है ॥
  • 12:48 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की स्तुति

  • 11:42 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी के 108 नाम

    1. ॐ गजाननाय नमः ।

    2. ॐ गणाध्यक्षाय नमः ।

    3. ॐ विघ्नराजाय नमः ।

    4. ॐ विनायकाय नमः ।

    5. ॐ द्वैमातुराय नमः ।

    6. ॐ द्विमुखाय नमः ।

    7. ॐ प्रमुखाय नमः ।

    8. ॐ सुमुखाय नमः ।

    9. ॐ कृतिने नमः ।

    10. ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।

    11. ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः ॥

    12. ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः ।

    13. ॐ जिष्णवे नमः ।

    14. ॐ विष्णुप्रियाय नमः ।

    15. ॐ भक्त जीविताय नमः ।

    16. ॐ जितमन्मधाय नमः ।

    17. ॐ सुप्रदीपाय नमः ॥

    18. ॐ सुखनिधये नमः ।

    19. ॐ सुराध्यक्षाय नमः ।

    20. ॐ सुरारिघ्नाय नमः ।

    21. ॐ महागणपतये नमः ।

    22. ॐ मान्याय नमः ।

    23. ॐ महाकालाय नमः ।

    24. ॐ महाबलाय नमः ।

    25. ॐ हेरम्बाय नमः ।

    26. ॐ लम्बजठरायै नमः ।

    27. ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः ॥

    28. ॐ महोदराय नमः ।

    29. ॐ मदोत्कटाय नमः ।

    30. ॐ महावीराय नमः ।

    31. ॐ मन्त्रिणे नमः ।

    32. ॐ मङ्गल स्वराय नमः ।

    33. ॐ प्रमधाय नमः ।

    34. ॐ प्रथमाय नमः ।

    35. ॐ प्राज्ञाय नमः ।

    36. ॐ विघ्नकर्त्रे नमः ।

    37. ॐ विघ्नहर्त्रे नमः ॥

    38. ॐ बल नमः ॥

    39. ॐ बलोत्थिताय नमः ।

    40. ॐ भवात्मजाय नमः ।

    41. ॐ पुराण पुरुषाय नमः ।

    42. ॐ पूष्णे नमः ।

    43. ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः ।

    44. ॐ अग्रगण्याय नमः ।

    45. ॐ अग्रपूज्याय नमः ।

    46. ॐ अग्रगामिने नमः ।

    47. ॐ मन्त्रकृते नमः ।

    48. ॐ चामीकरप्रभाय नमः ॥

    49. ॐ सर्वाय नमः ।

    50. ॐ सर्वोपास्याय नमः ।

    51. ॐ सर्व कर्त्रे नमः ।

    52. ॐ सर्वनेत्रे नमः ।

    53. ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।

    54. ॐ सिद्धये नमः ।

    55. ॐ पञ्चहस्ताय नमः ।

    56. ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः ।

    57. ॐ प्रभवे नमः ।

    58. ॐ कुमारगुरवे नमः ॥

    59. ॐ अक्षोभ्याय नमः ।

    60. ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः ।

    61. ॐ प्रमोदाय नमः ।

    62. ॐ मोदकप्रियाय नमः ।

    63. ॐ गम्भीर निनदाय नमः ।

    64. ॐ वटवे नमः ।

    65. ॐ अभीष्टवरदाय नमः ।

    66. ॐ ज्योतिषे नमः ।

    67. ॐ भक्तनिधये नमः ।

    68. ॐ भावगम्याय नमः ।

    69. ॐ मङ्गलप्रदाय नमः ।

    70. ॐ अव्यक्ताय नमः ।

    71. ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः ।

    72. ॐ सत्यधर्मिणे नमः ॥

    73. ॐ सखये नमः ।

    74. ॐ सरसाम्बुनिधये नमः ।

    75. ॐ महेशाय नमः ।

    76. ॐ दिव्याङ्गाय नमः ।

    77. ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः ।

    78. ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः ।

    79. ॐ सहिष्णवे नमः ।

    80. ॐ सततोत्थिताय नमः ।

    81. ॐ विघातकारिणे नमः ।

    82. ॐ विश्वग्दृशे नमः ॥

    83. ॐ विश्वरक्षाकृते नमः ।

    84. ॐ कल्याणगुरवे नमः ।

    85. ॐ उन्मत्तवेषाय नमः ।

    86. ॐ अपराजिते नमः ।

    87. ॐ समस्त जगदाधाराय नमः ।

    88. ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः ।

    89. ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः ।

    90. ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः ॥

    91. ॐ विश्वनेत्रे नमः ।

    92. ॐ विराट्पतये नमः ।

    93. ॐ श्रीपतये नमः ।

    94. ॐ वाक्पतये नमः ।

    95. ॐ शृङ्गारिणे नमः ।

    96. ॐ अश्रितवत्सलाय नमः ।

    97. ॐ शिवप्रियाय नमः ।

    98. ॐ शीघ्रकारिणे नमः ।

    99. ॐ शाश्वताय नमः ।

    100. ॐ कान्तिमते नमः ।

    101. ॐ धृतिमते नमः ।

    102. ॐ कामिने नमः ।

    103. ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः ।

    104. ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः ।

    105. ॐ ज्यायसे नमः ।

    106. ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।

    107. ॐ गङ्गा सुताय नमः ।

    108. ॐ गणाधीशाय नमः ॥

  • 11:01 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणाधीश गजानन दीनदयाल गणपति जी की आरती (Ganadhish Gajanan Deendayal Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics Hindi)

    गणाधीश गजानन दीनदयाल आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल लिरिक्स आरती
    ॐ गणाधीश गजानन दीनदयाल,
    आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……
    लम्बोदर चतुर्भुज लीला तेरी न्यारी है,
    वक्रतुण्ड महाकाय मूसे की सवारी है।।
    भक्त जन भर भर लाये लड्डुअन के थाल
    आरती उतारू गौरा जी के लाल।। बोलो गणाधीश……..
    रिद्धि सिद्धि पत्नी तेरी यश लाभ दो है सुत
    तेरी पूजा करने वाला हो जाये पापों से मुक्त।।
    बुद्धि के प्रदाता तेरी जय हो ओमकार
    आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल।।बोलो गणाधीश…..
    ब्रम्हा विष्णु रुद्र से भी पहले पूजा तेरी है
    कार्य सिद्ध हेतु तेरी कृपा भी जरूरी है।।
    शंख बाजे घंटा बाजे झाँझरो के ताल
    आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल ।। बोलो गणाधीश…
    माटी से बनाया तुमको माटी तेरी पूजा है
    तेरे जैसा एकदन्त और नहीं दूजा है ।
    शंकर के दुलारे प्यारे गौरा जी के लाल
    आरती उतारू तेरी गौरा जी के लाल। बोलो गणाधीश..

  • 10:06 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की आरती के नियम

    आरती शुरू करने से पहले 3 बार शंख बजाएं। आरती करते हुए ताली बजाएं। घंटी एक लय में बजाएं और आरती भी सूर और लय का ध्यान रखते हुए गाएं। आरती के लिए शुद्ध कपास यानी रूई से बनी घी की बत्ती होनी चाहिए। तेल की बत्ती का उपयोग करने से बचना चाहिए। कपूर आरती भी की जाती है। 

  • 7:15 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की आरती का वीडियो

  • 9:37 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी की रात्रि में इन मंत्रों के जप से मिलेगी बप्पा की कृपा

    • ॐ गं गणपतये नमः
    • ॐ वक्रतुण्डाय हुं:
    • ॐ एकदंताय नमः
    • ॐ लंबोदराय नमः
    • ॐ विघ्ननाशाय नमः
  • 7:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी के मौके पर इस आरती का पाठ करना होता है बेहद शुभ

    सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
    नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
    सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
    कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
     
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
    दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति॥ जय देव...
     
    रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा।
    चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।
    हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा।
    रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥ जय देव...
     
    लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना।
    सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
    दास रामाचा वाट पाहे सदना।
    संकष्टी पावावें, निर्वाणी रक्षावे,
    सुरवरवंदना॥ 
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
    दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति॥ जय देव

     

  • 5:53 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी के इन मंत्र का जप करने से दूर होती हैं विघ्न-बाधाएं

    1. ऊँ सुमुखाय नम:
    2. ऊँ एकदंताय नम:
    3. ऊँ कपिलाय नम:
    4. ऊँ गजकर्णाय नम:
    5. ऊँ लंबोदराय नम:
    6. ऊँ विकटाय नम:
    7. ऊँ विघ्ननाशाय नम:
    8. ऊँ विनायकाय नम:
    9. ऊँ धूम्रकेतवे नम:
    10. ऊँ गणाध्यक्षाय नम:
    11. ऊँ भालचंद्राय नम:
    12. ऊँ गजाननाय नम:
  • 5:05 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी का यह मंत्र करियर और सामाजिक स्तर पर दिलाता है सफलता

    भगवान गणेश का एक ऐसा मंत्र है जिसका 108 बार जप करने से करियर और सामाजिक स्तर पर आने वाली समस्याएं दूर हो जाती हैं। नीचे यह मंत्र दिया गया है। 

    मंत्र- ॐ विज्ञाननाशनाय नमः। 

  • 4:42 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी के व्रत का पारण करते समय करें इन मंत्रों का जप

    गणेश चतुर्थी के व्रत के पारण से पहले की पूजा के दौरान आपको नीचे दिए गए मंत्रों के जप से लाभ होता है। 

    • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ 
    • ॐ गं गणपतये नमः। 
    • ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा। 
    • ॐ एकदन्तये विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोद्यात्॥ 
  • 3:57 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    सुख-समृद्धि और शांति के लिए गणेश जी का चमत्कारी मंत्र

    मंत्र- ॐ नमो सिद्ध विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रेय सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्वार्जाय वश्यकर्णाय सर्वजन सर्वास्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रृंग ॐ स्वाहा:।

  • 2:52 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पूजा मंत्र

    • “ॐ गं गणपतये नमः”
    • “जय गणेश देवा”
  • 2:03 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    ॐ जय जगदीश हरे आरती

    • ॐ जय जगदीश हरे,
    • स्वामी जय जगदीश हरे ।
    • भक्त जनों के संकट,
    • दास जनों के संकट,
    • क्षण में दूर करे ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • जो ध्यावे फल पावे,
    • दुःख बिनसे मन का,
    • स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
    • सुख सम्पति घर आवे,
    • सुख सम्पति घर आवे,
    • कष्ट मिटे तन का ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • मात पिता तुम मेरे,
    • शरण गहूं किसकी,
    • स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
    • तुम बिन और न दूजा,
    • तुम बिन और न दूजा,
    • आस करूं मैं जिसकी ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • तुम पूरण परमात्मा,
    • तुम अन्तर्यामी,
    • स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
    • पारब्रह्म परमेश्वर,
    • पारब्रह्म परमेश्वर,
    • तुम सब के स्वामी ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • तुम करुणा के सागर,
    • तुम पालनकर्ता,
    • स्वामी तुम पालनकर्ता ।
    • मैं मूरख फलकामी,
    • मैं सेवक तुम स्वामी,
    • कृपा करो भर्ता॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • तुम हो एक अगोचर,
    • सबके प्राणपति,
    • स्वामी सबके प्राणपति ।
    • किस विधि मिलूं दयामय,
    • किस विधि मिलूं दयामय,
    • तुमको मैं कुमति ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
    • ठाकुर तुम मेरे,
    • स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
    • अपने हाथ उठाओ,
    • अपने शरण लगाओ,
    • द्वार पड़ा तेरे ॥
    • ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
    • विषय-विकार मिटाओ,
    • पाप हरो देवा,
    • स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
    • श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
    • श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
    • सन्तन की सेवा ॥
    • ॐ जय जगदीश हरे,
    • स्वामी जय जगदीश हरे ।
    • भक्त जनों के संकट,
    • दास जनों के संकट,
    • क्षण में दूर करे ॥
  • 1:47 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    भगवान श्री गणेश स्तुति मंत्र:

    • विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय!
    • नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते!!
    • भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय!
    • विद्याधराय विकटाय च वामनाय , भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते!!
    • नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नम:!
    • नमस्ते रुद्राय्रुपाय करिरुपाय ते नम:!!
    • विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारणे!
    • भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक!!
    • लम्बोदर नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय!
    • निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!
    • त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति ,
    • भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति!
    • विद्याप्रत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति,
    • तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव!!
    • गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम !
    • तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोSस्तु सदा मम !!
  • 1:21 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    श्री सिद्धिविनायक आरती: जय देव जय देव (Shri Siddhivinayak Aarti: Jai Dev Jai Dev)

    सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची । नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची । सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची । कंठी झलके माल मुकताफळांची । जय देव जय देव..

  • 12:52 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की भोग आरती

    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • दुर्योधन को मेवा त्यागो,
    • साग विदुर घर खायो प्यारे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • भिलनी के बैर सुदामा के तंडुल
    • रूचि रूचि भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • वृदावन की कुञ्ज गली मे,
    • आओं रास रचाओ मेरे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • राधा और मीरा भी बोले,
    • मन मंदिर में आओ मेरे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • गिरी, छुआरा, किशमिश मेवा,
    • माखन मिश्री खाओ मेरे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • सत युग त्रेता दवापर कलयुग,
    • हर युग दरस दिखाओ मेरे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • जो कोई तुम्हारा भोग लगावे
    • सुख संपति घर आवे प्यारे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • ऐसा भोग लगाओ प्यारे मोहन
    • सब अमृत हो जाये प्यारे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • जो कोई ऐसा भोग को खावे
    • सो त्यारा हो जाये प्यारे मोहन,
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
    • आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
  • 12:32 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी मंत्र इन संस्कृत

    1. वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

    निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

    2. द्वविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिवं।

    राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम्॥

    3. गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं।

    उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

  • 12:23 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Sindoor Lal Chadhayo Aarti Lyrics in hindi, स‍िंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गणेश आरती

    • स‍िंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको।
    • दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको।
    • हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको।
    • महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥1॥
    • जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
    • धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ॥धृ॥
    • अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि।
    • विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी।
    • कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी।
    • गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥2॥
    • जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
    • धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ॥
    • भावभगत से कोई शरणागत आवे।
    • संतत संपत सबही भरपूर पावे।
    • ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।
    • गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥3॥
    • जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
    • धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ॥
  • 11:33 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Sindoor Lal Chadhayo Aarti Lyrics in hindi: स‍िंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको

    स‍िंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको। हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको। महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको...

  • 11:06 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Chaturthi Bhajan: जागो गौरी नंदन जागो

    जागो गौरी नंदन जागो,

    जागो गौरी नँदन जागो,

    जग उजियारा फैला तेज तिहारा,

    जागो गौरी नँदन जागो ॥

    माँ गिरिजा ने तुझे जन्म दिया है,

    शिव भोले ने उपदेश दिया है,

    प्रथमे तुझको सब ही मनाए,

    जागो गौरी नँदन जागो,

    जग उजियारा फैला तेज तिहारा,

    जागो गौरी नँदन जागो ॥

    अरब खरब के हो वरदाता,

    रिद्धि सिद्धि नवनिधि के दाता,

    भक्तन के भंडार भराए,

    जागो गौरी नँदन जागो,

    जग उजियारा फैला तेज तिहारा,

    जागो गौरी नँदन जागो ॥

    जनम जनम के दास तिहारे,

    हाथ जोड़ कर खड़े है द्वारे,

    हर मुश्किल में तुम ही सहारे,

    जागो गौरी नँदन जागो,

    जग उजियारा फैला तेज तिहारा,

    जागो गौरी नँदन जागो ॥

    जागो गौरी नंदन जागो,

    जागो गौरी नँदन जागो,

    जग उजियारा फैला तेज तिहारा,

    जागो गौरी नँदन जागो ॥

  • 11:02 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की सूंड किस ओर होनी चाहिए

    जब भी आप घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें तो ध्यान रखें कि गणेश जी की सूंड बाएं हाथ की ओर होनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसी मूर्ति से घर में सकारात्मकता बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आप घर में सीधी सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति भी स्थापित कर सकते हैं। ऐसी मूर्ति से घर का माहौल खुशनुमा रहता है और सुख-शांति बनी रहती है।

  • 10:49 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    क्या घर में गणपति की मूर्ति स्थापना की जा सकती है?

    जी हां, शुद्ध मन, श्रद्धा और नियम से बप्पा की मूर्ति घर में स्थापित कर सकते हैं। ध्यान रहे कि मूर्ति मिट्टी की हो और विसर्जन तक रोज पूजा की जाए।

  • 10:37 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    भगवान गणेश का प्रिय भोग (Ganesh Puja Bhog)

    बप्पा को मोदक सबसे प्रिय है खासकर उकड़ीचे मोदक यानी गुड़-नारियल से भरे चावल के मोदक। गणेश चतुर्थी के दिन इसका भोग बप्पा को जरूर लगाएं।

  • 10:12 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की आरती

  • 9:27 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश स्थापना की विधि

    • घर की सफाई करें और उस स्थान को शुद्ध करें जहां गणपति जी विराजमान होंगे।
    • लकड़ी की चौकी या पट्टा लें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
    • उस स्थान पर एक स्वस्तिक चिह्न बनाएं और चावल से हलका सा चौकोर मंडप बनाएं।
    • शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को घर लाएं, मूर्ति को लात समय गणपति बप्पा मोरया का जयघोष करें।
    • मूर्ति को मंडप पर स्थापित करें और उनके दाएं हाथ में अक्षत, बाएं हाथ में दूर्वा रखें।
    • उनके सामने एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें।
    • ध्यान रखें कि मूर्ति मिट्टी या शुद्ध पर्यावरण अनुकूल होनी चाहिए।
    • विसर्जन तक गणेश जी को अकेला न छोड़ें और दिन में कम से कम एक बार भजन, आरती अवश्य करें।
  • 8:55 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश स्थापना शुभ मुहूर्त 2025

    • पुणे - 11:21 ए एम से 01:51 पी एम 
    • नई दिल्ली - 11:05 ए एम से 01:40 पी एम 
    • चेन्नई - 10:56 ए एम से 01:25 पी एम 
    • जयपुर - 11:11 ए एम से 01:45 पी एम 
    • हैदराबाद - 11:02 ए एम से 01:33 पी एम 
    • गुरुग्राम - 11:06 ए एम से 01:40 पी एम 
    • चण्डीगढ़ - 11:07 ए एम से 01:42 पी एम
    • कोलकाता - 10:22 ए एम से 12:54 पी एम 
    • मुम्बई - 11:24 ए एम से 01:55 पी एम 
    • बेंगलूरु - 11:07 ए एम से 01:36 पी एम
    • अहमदाबाद - 11:25 ए एम से 01:57 पी एम 
    • नोएडा - 11:05 ए एम से 01:39 पी एम
  • 8:36 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

  • 8:19 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर राशि अनुसार मंत्र

    • मेष राशि- ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये नमः ।
    • वृषभ राशि- ॐ वक्रतुण्डाय हुं ।
    • मिथुन राशि- ॐ गं गणपतये नमः ।
    • कर्क राशि- ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
    • सिंह राशि- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः गणेशाय नमः ।
    • कन्या राशि- ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
    • तुला राशि- ॐ लम्बोदराय नमः ।
    • वृश्चिक राशि- ॐ गजवक्त्राय नमः ।
    • धनु राशि- ॐ ध्रां ध्रीं ध्रौं सः सिद्धिविनायकाय नमः ।
    • मकर राशि- ॐ एकदन्ताय नमः ।
    • कुंभ राशि- ॐ विघ्नराजाय नमः ।
    • मीन राशि- ॐ सुमुखाय नमः ।
  • 7:58 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी 2025 पर इन मंत्रों का करें जाप

    • ॐ गण गणपतये नमः ।
    • ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा ।
    • वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
    • ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

     

  • 7:25 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की चालीसा

    ।। श्री गणेश चालीसा ।।

    ॥ दोहा ॥

    जय गणपति सदगुण सदन,

    कविवर बदन कृपाल ।

    विघ्न हरण मंगल करण,

    जय जय गिरिजालाल ॥

    ॥ चौपाई ॥

    जय जय जय गणपति गणराजू ।

    मंगल भरण करण शुभः काजू ॥

    जै गजबदन सदन सुखदाता ।

    विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

    वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।

    तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

    राजत मणि मुक्तन उर माला ।

    स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

    पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।

    मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

    सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।

    चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

    धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।

    गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥

    ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।

    मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

    कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।

    अति शुची पावन मंगलकारी ॥

    एक समय गिरिराज कुमारी ।

    पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

    भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।

    तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥

    अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।

    बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

    अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।

    मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

    मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।

    बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

    गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।

    पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

    अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।

    पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

    बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।

    लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥

    सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।

    नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

    शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।

    सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

    लखि अति आनन्द मंगल साजा ।

    देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥

    निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।

    बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

    गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।

    उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

    कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।

    का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

    नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।

    शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

    पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।

    बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

    गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।

    सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

    हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।

    शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥

    तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।

    काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

    बालक के धड़ ऊपर धारयो ।

    प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

    नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।

    प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

    बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।

    पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

    चले षडानन, भरमि भुलाई ।

    रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

    चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।

    तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

    धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।

    नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

    तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।

    शेष सहसमुख सके न गाई ॥

    मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।

    करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

    भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।

    जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥

    अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।

    अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

    ॥ दोहा ॥

    श्री गणेश यह चालीसा,

    पाठ करै कर ध्यान ।

    नित नव मंगल गृह बसै,

    लहे जगत सन्मान ॥

    सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,

    ऋषि पंचमी दिनेश ।

    पूरण चालीसा भयो,

    मंगल मूर्ती गणेश ॥

  • 7:02 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Ji Ki Aarti Ka Time: गणेश जी की आरती का समय

    गणेश चतुर्थी पर गणेश भगवान की आरती का समय 11:05 ए एम से 01:40 पी एम तक रहेगा।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।