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Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर माता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, आरती, कथा, मंत्र, भोग और गीत, यहां जानिए सबकुछ

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Updated : Mar 21, 2026 08:07 am IST

Gangaur Puja 2026: गणगौर पर्व महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए मां गौरी की पूजा करती हैं, तो वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छा वर पाने की कामना से व्रत रखती हैं। यहां जानिए गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, गणगौर पूजा की विधि, मंत्र, भोग की सामग्री, गणगौर माता की आरती, गीत।

गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती- India TV Hindi
गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती Image Source : INDIA TV

Gangaur Puja 2026 Live Updates, Puja Vidhi, Aarti, Geet: गणगौर पर्व आज 21 मार्च को मनाया जा रहा है। यह पर्व विशेष तौर पर पूरे राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। गणगौर पर्व महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए देवी पार्वती की पूजा करती हैं, तो वहीं अविवाहित लड़कियां सुयोग्य वर पाने की कामना से मां गौरी को प्रसन्न करना चाहती हैं। गणगौर उत्सव करीब 18 दिनों तक चलता है, लेकिन इसका सबसे विशेष दिन है चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन, जिसे गणगौर तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शिव और पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। फिर भगवान शिव और मां गौरी (ईसर-गौरा) की प्रतिमाओं की विधि-विधान पूजा होती है और माता को पारंपरिक भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान मंत्रों का जाप होता है, लोकगीत गाए जाते हैं। यहां आप गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, गणगौर पूजा की विधि, मंत्र, भोग की सामग्री, गणगौर माता की आरती, गणगौर पूजा से जुड़े गीत आदि के बारे में जान सकते हैं। ऐसे में हमारे साथ बने रहिए...

 

Live updates :Gangaur Puja 2026 Live Updates

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  • 8:06 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: Gangaur Puja Aarti (नीव ढलती बेलड़ी जी)

    नीव ढलती बेलड़ी जी,
    मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी,
    मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी।
    आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी,
    डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
    गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
    गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी,
    आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी।
    बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी।

  • 7:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त 2026 (Gangaur Puja 2026 Timings)

    ब्रह्म मुहूर्त - 05:07 AM से 05:54 AM
    प्रातः सन्ध्या - 05:31 AM से 06:42 AM
    अभिजित मुहूर्त - 12:21 PM से 01:10 PM
    गोधूलि मुहूर्त - 06:48 PM से 07:12 PM
    सायाह्न सन्ध्या - 06:50 PM से 08:01 PM
    अमृत काल - 05:58 PM से 07:27 PM

  • 7:56 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर की आरती (Gangaur Aarti Lyrics)

    आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
    गौरी शंकर शिव पार्वती की -2

    देसी घी को दीप जलायो
    तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
    लाला फूला की थाने हार पहनायो
    आरती कीजिए...

    महिमा थारी सब कोई गावे
    खीर ढोकला को भोग लगावे
    भंडार उसके भर देते हो
    आरती कीजिए...

    ईसर म्हारा छैल छबीला
    गोरा म्हारी रूप की रानी
    सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं
    आरती कीजिए...

    जो कोई आपकी शरण में आवे
    सर्व सुहाग परम पथ पावे
    आरती कीजिए...

  • 7:54 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर का महत्व (Gangaur Puja Significance)

    गण का मतलब है भगवान शिव और गौर का मतलब है माता पार्वती। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतिक है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने कड़ी तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन आने वाली यह पूजा महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होती है।

    गणगौर पर्व की खास बात यह है कि इसमें विवाहित महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित युवतियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। जहां विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित युवतियां अच्छे वर की कामना के साथ गणगौर की पूजा करती हैं। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेती हैं। 

  • 7:22 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    सूर्य को अर्घ्य देने का गीत

    अल खल नदी जाय यो पाणी कहा जाय
    आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी
    ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो
    अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ
    सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा
    सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा
    सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।
    गणगौर को पानी पिलाने का गीत
    म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।
    म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो
    म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।
    (यहां आपको बह्मदास जी की जगह अपने पिता और ईशरदास जी की जगह अपने पुत्र का नाम लेना हैं )

  • 7:09 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर व्रत की कथा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय की बात है भगवान शिव और देवी पार्वती नारद मुनि के साथ पृथ्वी भ्रमण पर आए। संयोग से वह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। माता पार्वती ने भगवान शिव से अनुमति लेकर नदी में स्नान करने का निश्चय किया। स्नान के पश्चात माता पार्वती ने नदी के किनारे बालू से एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ उसका पूजन किया। पूजन में माता ने बालू से बने पदार्थों का भोग अर्पित किया और उसी में से थोड़े कणों को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

    पूजन के बाद उन्होंने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की और पूरे विधि विधान के साथ पूजा संपन्न की। माता पार्वती की भक्ति और समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उसी पार्थिव शिवलिंग से प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया। भगवान शिव ने कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा। साथ ही वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी। यह वरदान देकर भगवान शिव वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

    पूजा में समय लग जाने के कारण माता पार्वती लौटने में थोड़ी देर हो गईं। जब वे भगवान शिव के पास पहुंचीं, तो वहां देवर्षि नारद भी उपस्थित थे। भगवान शिव ने उनसे देरी का कारण पूछा। माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि नदी किनारे उनके मायके के लोग मिल गए थे। उन्होंने आग्रह करके माता को दूध-भात ग्रहण करने और थोड़ी देर विश्राम करने को कहा।

    भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भी उस भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं और तुरंत नदी की ओर चल पड़े। माता पार्वती मन ही मन चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि वे उनकी प्रतिष्ठा और व्रत की रक्षा करें।

    नदी तट पर पहुंचने पर माता पार्वती ने एक विशाल और भव्य महल देखा। महल में प्रवेश करने पर उनके भाई-भौजाई और कुटुम्ब जन वहां उपस्थित थे। उन्होंने भगवान शिव का भव्य सत्कार किया और उनकी स्तुति की। प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां दो दिन तक रुके। तीसरे दिन माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन शिव जी और अधिक समय रुके रहना चाहते थे। माता पार्वती ने अकेले ही वहां से प्रस्थान किया, और अंततः भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़े।

    चलते-चलते भगवान शिव को याद आया कि उन्होंने अपनी माला वहीं छोड़ दी है। माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोकते हुए देवर्षि नारद को भेजा। नारद जी जब नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां कोई महल नहीं है। जगह पर घना जंगल था, जिसमें कई हिंसक जानवर विचरण कर रहे थे। नारद जी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए।

    तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी को एक वृक्ष पर भगवान शिव की माला लटकी दिखाई दी। उन्होंने माला उठाई और भगवान शिव को पूरी घटना सुनाई। नारद जी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे संभव हुआ कि महल और लोग गायब होकर जंगल में बदल गए।

    इस पर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है। उन्होंने अपने पूजन और व्रत को गुप्त रखने के लिए यह मायावी दृश्य रचा। माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब उनकी नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ।

    देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना करते हुए कहा कि वे पतिव्रताओं में सर्वोत्तम हैं। उनके स्मरण मात्र से स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होता है। नारद जी ने आगे कहा कि गुप्त पूजन सामान्य पूजा से अधिक फलदायी होता है। जो महिलाएं अपने पति की भलाई और मंगलकामना के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा। इसी प्रकार जो कन्याएं यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा।

  • 6:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर माता की पूजा

    गणगौर पर्व के दिन शिव और पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। इसके बाद भगवान शिव और मां गौरी (ईसर-गौरा) की इन प्रतिमाओं की विधि-विधान पूजा की जाती है और माता को पारंपरिक भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान मंत्रों का जाप होता है, लोकगीत गाए जाते हैं।

  • 6:57 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    गणगौर का गीत - ज्वारा का (Jwara Ka)

    म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या
    गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
    म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
    गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
    मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    (यहां आपको सभी घर वालों के नाम लेने हैं )

  • 6:56 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    चांद चढ़यो गिरनार: Chand Chadyo Girnaar

    चांद चढ़यो गिरनार, किरत्यां ढल रही जी ढल रही,
    जा बाई रोवा घरा पधार माऊजी मारेला जी मारेला।
    बापू जी देवला गाल, बडोड़ो बीरो बरजेलो जी बरजेलो,
    थे मत दयो म्हारी बाई न गाल,
    बाई म्हारी चिड़कोली जी चिड़कोली।
    आज उड़ पर बात सवार बाई उड़ ज्यासी जी उड़ ज्यासी,
    गोरायारं दिन चार जावईडो ले जासी जी ले जासी।
    (यहां घर की बहन बेटियों का नाम लेना है )

  • 6:54 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    इस गीत को गाते समय आपको अपने घर वालों के नाम लेने है।

    Odo Kodo Geet (ओड़ो कोड़ो)

    ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख
    ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल
    ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल
    बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार
    बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार
    अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार
    चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,
    गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,
    वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए
    पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो
    गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो
    गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,
     

  • 6:52 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा सामग्री लिस्ट (Gangaur Puja Samagri List)

    लकड़ी की चौकी
    तांबे का कलश
    गणगौर माता की प्रतिमा
    दो मिट्टी के बर्तन
    मिट्टी के दीये
    काली मिट्टी या होली की राख
    कुमकुम
    चावल
    पूजा थाली
    फूल
    घास
    दो मिट्टी के कुंडे/गमले
    हल्दी
    मेहन्दी
    गुलाल
    अबीर
    मिठाई
    चावल
    मूंग
    माता की चुनरी
    काजल
    लाल या पीले रंग का कपड़ा
    घी
    आम के पत्ते
    पानी से भरा बर्तन
    पान के पत्ते
    बेताल और अशोक चले जाते हैं
    गणगौर के कपड़े
    गेहूं
    लकड़ी की टोकरी
    नारियल

  • 6:49 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मंत्र (Gangaur Puja Mantra)

    • 'ॐ ह्रीं गौरीपतये स्वाहा' मंत्र का जाप देवी गौरी को फूल, हल्दी, कुमकुम और पवित्र जल अर्पित करते समय करना है।

    विवाह और वैवाहिक सुख के लिए ये मंत्र जपना है-

    • कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः॥
  • 6:48 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा विधि (Gangaur Puja Vidhi)

    • वैसे तो गणगौर पूजा पर्व 18 दिनों तक मनाया जाता है। लेकिन इस पर्व का मुख्य दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी नवरात्रि का तीसरा दिन होता है।
    • कई महिलाएं नवरात्रि के तीसरे दिन ही गणगौर पूजा मनाती हैं।
    • इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • इसके बाद माता गौरी और शिव जी की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
    • फिर मिट्टी से ईसर-गौर की प्रतिमा बनाएं और उनकी विधि विधान स्थापना करें।
    • गणगौर का श्रृंगार जरूर करें। उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं।
    • इसके बाद गणगौर के गीत गाएं।
    • फिर घर की किसी दीवार पर या फिर पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल लगाएं।
    • फिर एक थाल में चांदी का सिक्का, दही, सुपारी, पान, दूध, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम और दूर्वा डालकर सुहाग जल तैयार कर लें।
    • फिर दूर्वा को हाथों में लेकर इस सुहाग जल को भगवान शिव और माता गौरी यानी गणगौर पर छिड़के। इसके बाद इस जल को घर के सदस्यों पर भी छिड़कें।
    • इसके बाद भगवान शिव और गौरी माता को चूरमे का भोग लगाएं।
    • फिर गणगौर की कथा भी जरूर सुनें या पढ़ें।
    • फिर शाम में गणगौर को पानी पिलाएं।
    • इसके बाद सरोवर या कुंड में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जित कर दें।
  • 6:47 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर का त्योहार

    गणगौर का त्योहार चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव को ईसर जी तो वहीं माता पार्वती को गौरा माता के रूप में पूजा जाता है। ये व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए तो अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। मुख्य रूप से ये त्योहार हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं बालू और मिट्टी से ईसर और गौरा जी की प्रतिमाएं बनाती हैं और उनका श्रृंगार करती हैं। फिर विधि विधान इनकी पूजा करने के बाद लोकगीतों का गायन करती हैं। चलिए जानते हैं इस साल गणगौर पूजा कब है और इसकी पूजा विधि क्या है।

  • 6:45 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त (Gangaur Puja 2026 Date And Time)

      हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन इसी दिन रात में 11 बजकर 56 मिनट पर हो जाएगा। पंचांग को देखते हुए 21 मार्च दिन शनिवार को गणगौर व्रत किया जाएगा।
       
    1. 6:43 AM (IST)
      Posted by Arti Azad

      Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त 2026 (Gangaur Puja 2026 Timings)

      1. ब्रह्म मुहूर्त - 05:07 AM से 05:54 AM
      2. प्रातः सन्ध्या - 05:31 AM से 06:42 AM
      3. अभिजित मुहूर्त - 12:21 PM से 01:10 PM
      4. गोधूलि मुहूर्त - 06:48 PM से 07:12 PM
      5. सायाह्न सन्ध्या - 06:50 PM से 08:01 PM
      6. अमृत काल - 05:58 PM से 07:27 PM
    2. 6:43 AM (IST)
      Posted by Arti Azad

      Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा कब है 2026 (Gangaur Puja 2026 Date)

      गणगौर पूजा पर्व 21 मार्च 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि का प्रारम्भ 21 मार्च 2026 को 02:30 AM पर होगा और समापन 21 मार्च 2026 को 11:56 PM पर होगा।

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