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Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर माता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, आरती, कथा, मंत्र, भोग और गीत, यहां जानिए सबकुछ

 Written By: Arti Azad
 Updated : Mar 21, 2026 06:37 pm IST

Gangaur Puja 2026: गणगौर पर्व महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए मां गौरी की पूजा करती हैं, तो वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छा वर पाने की कामना से व्रत रखती हैं। यहां जानिए गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, गणगौर पूजा की विधि, मंत्र, भोग की सामग्री, गणगौर माता की आरती, गीत।

गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती- India TV Hindi
गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती Image Source : INDIA TV

Gangaur Puja 2026 Live Updates, Puja Vidhi, Aarti, Geet: गणगौर पर्व आज 21 मार्च को मनाया जा रहा है। यह पर्व विशेष तौर पर पूरे राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। गणगौर पर्व महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। गणगौर उत्सव करीब 18 दिनों तक चलता है, लेकिन इसका सबसे विशेष दिन है चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन, जिसे गणगौर तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शिव और पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। फिर भगवान शिव और मां गौरी (ईसर-गौरा) की प्रतिमाओं की विधि-विधान पूजा होती है और माता को पारंपरिक भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान मंत्रों का जाप होता है, लोकगीत गाए जाते हैं। यहां आप गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, गणगौर पूजा की विधि, मंत्र, भोग की सामग्री, गणगौर माता की आरती, गणगौर पूजा से जुड़े गीत आदि के बारे में जान सकते हैं। ऐसे में हमारे साथ बने रहिए...

 

Gangaur Puja 2026 Live Updates

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  • 2:49 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणगौर माता की पूजा

    गणगौर माता की पूजा
    Image Source : PTIगणगौर माता की पूजा
     गणगौर का पर्व राजस्थान में विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 

  • 2:47 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणगौर के खास पकवान

    • गेंहू के आटे और गुड़ की लापसी
    • राजस्थान की खास मिठाई घेवर 
    • आटे का हलवा
    • कचौरी और पूरी
    • ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स
    • 'गुने' नाम की पारंपरिक मिठाई 
    • चूरमा
  • 2:34 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    पारंपरिक वेशभूषा पहन सोलह श्रृंगार करती हैं महिलाएं

    पारंपरिक वेशभूषा पहन सोलह श्रृंगार करती हैं महिलाए
    Image Source : PTIपारंपरिक वेशभूषा पहन सोलह श्रृंगार करती हैं महिलाएं
     धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणगौर का व्रत माता गौरी ने भगवान शिव के लिए रखा था, इसलिए यह व्रत को वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर माता गौरी की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा अर्चना करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और वे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरा करती हैं। 

     

  • 2:23 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates:गणगौर को पानी प्यान का गीत इन हिंदी

    म्हारी गोर ती साईं ओ,
    राज घाट्यांरी मुकुट करो।
    ब्रह्मदास बीरा,
    ईसरदास राज घाट्यांरी मुकुट करो।
    ब्रह्मदासजी रा कानीराम,
    राज घाट्यांरी मुकुट करो।
    म्हारी गोरां न पाणीड़ा प्याई ओ,
    राज घाट्यांरी मुकुट करो।

  • 2:02 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणगौर तीज 2026

    गणगौर तीज 2026
    Image Source : PTIगणगौर तीज 2026
    गणगौर पूजा को गणगौर तीज के नाम से भी जाना जाता है। गणगौर पूजा के दौरान महिलाएं सुंदर प्रतिमाएं बनाकर उनका शृंगार करती हैं और लोकगीत गाते हुए पूजा-अर्चना करती हैं। ये लोकगीत गणगौर पर्व की आत्मा माने जाते हैं, जिनमें शिव-पार्वती के रिश्ते को पारिवारिक रूप में दर्शाया जाता है। 

  • 1:28 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणगौर पर्व की परंपरा

    गणगौर पर्व की परंपरा
    Image Source : PTIगणगौर पर्व की परंपरा

    गणगौर का उत्सव होलिका दहन के दूसरे दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से प्रारंभ होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक कुल 18 दिनों तक चलता है। लोक मान्यता के अनुसार, मां गौरी इस अवधि में अपने मायके आती हैं और भगवान शिव उन्हें विदा कराने के लिए आते हैं। अंतिम दिन यानी तीज पर उनका विदाई समारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

  • 1:09 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    राजस्थान में बड़ी धूमधाम से मनाते हैं गणगौर पर्व

    राजस्थान की पहचान है गणगौर पूजा
    Image Source : PTIराजस्थान की पहचान है गणगौर पूजा

    गणगौर का त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाता है, लेकिन इसकी धूम अब उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिलती है। 

  • 12:55 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026: आस्था और परंपरा का संगम

    आस्था और परंपरा का संगम
    Image Source : PTIआस्था और परंपरा का संगम

    गणगौर व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहरी मान्यताओं, आस्था और प्रेम का प्रतीक है। पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना के साथ किया जाने वाला यह व्रत हर साल उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

  • 12:54 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Katha: गणगौर व्रत की कथा

    एक समय की बात है भगवान शिव और देवी पार्वती नारद मुनि के साथ पृथ्वी भ्रमण पर आए। संयोग से वह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। माता पार्वती ने भगवान शिव से अनुमति लेकर नदी में स्नान करने का निश्चय किया। स्नान के पश्चात माता पार्वती ने नदी के किनारे बालू से एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ उसका पूजन किया। पूजन में माता ने बालू से बने पदार्थों का भोग अर्पित किया और उसी में से थोड़े कणों को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

    पूजन के बाद उन्होंने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की और पूरे विधि विधान के साथ पूजा संपन्न की। माता पार्वती की भक्ति और समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उसी पार्थिव शिवलिंग से प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया। भगवान शिव ने कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा। साथ ही वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी। यह वरदान देकर भगवान शिव वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

    पूजा में समय लग जाने के कारण माता पार्वती लौटने में थोड़ी देर हो गईं। जब वे भगवान शिव के पास पहुंचीं, तो वहां देवर्षि नारद भी उपस्थित थे। भगवान शिव ने उनसे देरी का कारण पूछा। माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि नदी किनारे उनके मायके के लोग मिल गए थे। उन्होंने आग्रह करके माता को दूध-भात ग्रहण करने और थोड़ी देर विश्राम करने को कहा।

    भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भी उस भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं और तुरंत नदी की ओर चल पड़े। माता पार्वती मन ही मन चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि वे उनकी प्रतिष्ठा और व्रत की रक्षा करें।

    नदी तट पर पहुंचने पर माता पार्वती ने एक विशाल और भव्य महल देखा। महल में प्रवेश करने पर उनके भाई-भौजाई और कुटुम्ब जन वहां उपस्थित थे। उन्होंने भगवान शिव का भव्य सत्कार किया और उनकी स्तुति की। प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां दो दिन तक रुके। तीसरे दिन माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन शिव जी और अधिक समय रुके रहना चाहते थे। माता पार्वती ने अकेले ही वहां से प्रस्थान किया, और अंततः भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़े।

    चलते-चलते भगवान शिव को याद आया कि उन्होंने अपनी माला वहीं छोड़ दी है। माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोकते हुए देवर्षि नारद को भेजा। नारद जी जब नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां कोई महल नहीं है। जगह पर घना जंगल था, जिसमें कई हिंसक जानवर विचरण कर रहे थे। नारद जी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए।

    तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी को एक वृक्ष पर भगवान शिव की माला लटकी दिखाई दी। उन्होंने माला उठाई और भगवान शिव को पूरी घटना सुनाई। नारद जी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे संभव हुआ कि महल और लोग गायब होकर जंगल में बदल गए।

    इस पर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है। उन्होंने अपने पूजन और व्रत को गुप्त रखने के लिए यह मायावी दृश्य रचा। माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब उनकी नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ।

    देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना करते हुए कहा कि वे पतिव्रताओं में सर्वोत्तम हैं। उनके स्मरण मात्र से स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होता है। नारद जी ने आगे कहा कि गुप्त पूजन सामान्य पूजा से अधिक फलदायी होता है। जो महिलाएं अपने पति की भलाई और मंगलकामना के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा। इसी प्रकार जो कन्याएं यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा।

  • 12:35 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026: गणगौर पूजा की फोटो

    गणगौर पूजा की फोटो
    Image Source : PTIगणगौर पूजा की फोटो

  • 12:21 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पर पति को डंडे से क्यों पीटती है पत्नियां?

    गणगौर पूजा पर पत्नियां एक ओर जहां पति की लंबी आु के लिए व्रत रखती हैं, तो वहीं दूसरी ओर डंडे लाठी से उनकी पिटाई भी करती हैं। इस रस्म के पछे स्थानीय लोगों की गहरी आस्था भी जुड़ी है। परंपरा के अनुसार, गुड़ तोड़ने की प्रथा है, जिसके लिए एक ऊंची लकड़ी के सिरे में नारियल या गुड़ लगी पोटली को बांधा जाता है। इस पोटली को पतियों की टोली को लेना होता है। वहीं, दूसरी ओर महिलाएं पुरुषों को पोटली लेने से रोकती है। पोटली लेने से रोकने के लिए पत्नियां इमली के पेड़ की लकड़ी से मारती है। अपने बचाव के लिए पुरुष भी ढाल का इस्लेमाल करते हैं। खेल की यह प्रकिया पूरे सात बार होती है, जिसमें पुरुषों को चोट भी लगती है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस दिन पतियों को लगने वाली चोट मां गौरी का ही आशीर्वाद होता है।

  • 12:04 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026: गणगौर की पूजा सामग्री

    1. मांगौरी और भगवान शिव (ईसर-गौरी) की मिट्टी या लकड़ी की प्रतिमा
    2. पूजा की चौकी और साफ लाल या पीला कपड़ा
    3. कलश (जल से भरा) और आम/अशोक के पत्ते
    4. रोली (कुमकुम), हल्दी और अक्षत (चावल)
    5. मेहंदी 
    6. फूल और फूलों की माला
    7. धूप और अगरबत्ती
    8. कपास, घी या तेल (दीपक के लिए)
    9. नारियल
    10. फल
    11. गेहूं या जौ (पूजन में रखने के लिए)
    12. पान, सुपारी और इलायची
    13. लाल धागा (मौली)
    14. पूजा की थाली
    15. गंगाजल
    16. व्रत कथा की पुस्तक
    17. मिठाई (घर की बनी या बाजार की)
    18. चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल, चुनरी आदि शृंगार सामग्री
    19. अर्घ्य देने के लिए पानी का लोटा और चम्मच
  • 12:00 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या गीत

    म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या
    गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
    म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
    गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
    मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    (यहां आपको सभी घर वालों के नाम लेने हैं )

  • 11:24 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    प्रसाद और गुने का महत्व

    गणगौर पूजा में जो प्रसाद अर्पित किया जाता है, उसे केवल महिलाएं ही ग्रहण करती हैं। पूजा में चढ़ाए गए सिंदूर से महिलाएं अपनी मांग भरती हैं, जिसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान में इस दिन गुने बनाए जाते हैं। गुने मैदा, बेसन और हल्दी से बनाए जाते हैं और गहनों के आकार में माता पार्वती को अर्पित किए जाते हैं। जितने अधिक गुने अर्पित किए जाते हैं, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है। पूजा के बाद ये गुने महिलाएं अपनी सास, ननद या जेठानी को देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

  • 11:11 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणगौर बिदाई गीत (Gangaur Bidai Geet)

    शुक्र को तारो रे ईश्वर उंगी रह्यो।
    कि तेकी मख टिकी घड़ाव।
    तेकी मख तबोल रंगाव
    सरग कि बिजलई रे ईश्वर चमकी रही
    तेकी मख मगजी लगाव
    नव लाख तारा ,रे ईश्वर चमकी रह्य
    तेकी मख अंगिया सिलाओ
    चाँद और सूरज रे ईश्वर चमकी रह्या।
    कि तेखी मख बदन घड़ाव
    कि तेकी मख येणी गुन्थाव
    बड़ी हट वालाई रे गोरल -गोरड़ी
    गणगौर की बिदाई
    पिताजी कि गोद बठी रनुबाई बिनय।
    कहो तो पिताजी हम रमवा हो जावा
    जावो बेटी रनुबाई रमवा जाओ
    लंबो बाजार देखि दौड़ी मत चलजो
    उच्चो व्ट्लो देखि जाई मत बठ्जो
    परायो पुरुष देखि हंसी मत बोलजो
    नीर देखि न चीर मत धोवजो
    पाठो देखि न बेटी ,आड़ी मत घसजो
    परायो बालो देखि न हाय मत करजो
    संपत देखि न बेटी चढ़ी मत चलजो
    विपद देखि न बेटी रडी मत बठ्जो
    जाओ बेटी राज करजो
    देवी गणगौर कि भावपूर्ण बिदाई।
    म्हारा दादाजी के जी मांडी गणगौर
    म्हारा दादाजी के जी मांडी गणगौर
    म्हारा काकाजी के मांडी गणगौर
    रसीया घडी दोय खेलवाने जावादो 
    घडी दोय जावता पलक दोय आवता
    सहेलियां में बातां चितां लागी हो रसीया
    घडी दोय खेलवाने जावादो 
    थारो नथ भलके थारो चुड़लो चमके
    थारा नेना रा निजारा प्यारा लागे हो मारुजी
    थारा बिना जिवडो भुल्यो डोले। 

  • 10:47 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    सूरज को अरक देने का गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    सूरज को अरक देने का गीत
    अल खल नदी जाय यो पाणी कहा जाय
    आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी
    ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो
    अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ
    सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा
    सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा
    सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।
    गणगौर को पानी पिलाने का गीत
    म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।
    म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो
    म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।
    (यहां आपको बह्मदास जी की जगह अपने पिता और ईशरदास जी की जगह अपने पुत्र का नाम लेना हैं )

  • 10:12 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet)

    गोर ए गणगौर माता खोल किंवाडी
    गोर ए गणगौर माता खोल किंवाडी,
    बाहर ऊबी थारी पूजन वाली,
    पूजो ए पुजावो संइयो कांई-कांई मांगा,
    मांगा ए म्हें अन-धन लाछर लिछमी जलहर जामी बाबुल मांगा,
    रातां देई मांयड, कान्ह कंवर सो बीरो मांगा, राई (रुक्मणी) सी भौजाई,
    ऊंट चढ्यो बहनोई मांगा, चूनडवाली बहना,
    पून पिछोकड फूफो मांगा, मांडा पोवण भूवा,
    लाल दुमाल चाचो मांगा, चुडला वाली चाची,
    बिणजारो सो मामो माँगा, बिणजारी सी मामी,
    इतरो तो देई माता गोरजा ए, इतरो सो परिवार,
    दे ई तो पीयर सासरौ ए,
    सात भायां री जोड
    परण्यां तो देई माता पातळा (पति)
    ए सारां में सिरदार

  • 9:18 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: पति से छुपाकर क्यों रखा जाता है व्रत

    गणगौर व्रत की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं इसे अपने पति से छुपाकर रखती हैं। मान्यता है कि यदि व्रत गुप्त रूप से किया जाए तो इसका पूर्ण फल मिलता है। महिलाएं इस दिन मिट्टी की शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद भी पुरुषों को नहीं दिया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है, माता पार्वती के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

    शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था। उन्होंने पूजा विधिपूर्वक की, लेकिन भगवान शिव को इसके बारे में नहीं बताया। वे इसे गुप्त रूप से पूरा करना चाहती थीं। इसी कारण से आज भी सुहागिन महिलाएं गणगौर व्रत और पूजा छुपाकर करती हैं।

  • 9:05 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: पूजा में बनाए जाते हैं खास पकवान

    1. गुड़ की लापसी पूजा में बेहद शुभ मानी जाती है।
    2. राजस्थान की खास मिठाई घेवर गणगौर का मुख्य प्रसाद माना जाता है। 
    3. पारंपरिक भोग आटे का हलवा पूजा में चढ़ाया जाता है।
    4. तीखे और कुरकुरे स्वाद वाले कचौरी और पूरी त्योहार के खाने को खास बनाते हैं और प्रसाद के साथ परोसे जाते हैं।
    5. पूजा में ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स भी चढ़ाए जाते हैं।
    6. गणगौर पर 'गुने' नाम की पारंपरिक मिठाई का विशेष महत्व होता है। यह मैदा और चीनी से तैयार की जाती है और देवी पार्वती को अर्पित की जाती है।
    7. चूरमा का भोग भी गणगौर में खास माना जाता है। चूरमा विशेष रूप से माता गौरी को अर्पित किया जाता है।
  • 8:28 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: Gangaur Puja Ki Aarti (गणगौर पूजा आरती)

    म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी,
    म्हारी मालण फुलडा से लाय। 
    सूरज जी थाको आरत्यों जी,
    चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी। 
    ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी,
    ईसर जी थाको आरत्यो जी।
    थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू,
    पान की पचास मेलू।
    पीली पीली मोहरा मेलू , रुपया मेलू,
    डेड सौ सुपारी मेलू , मोतीडा रा आखा मेलू।
    राजा जी रो सुवो मेलू , राणी जी री कोयल मेलू,
    करो न भाया की बहना आरत्यो जी।
    करो न सायब की गौरी आरत्यो जी।।

  • 8:07 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: माता पार्वती जी की आरती

    माता पार्वती जी की आरती (Parvati Mata Ki Aarti)
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता
    ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
     
    जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
    देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
     
    हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
    सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
     
    नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
     
    देवन अरज करत हम चित को लाता
    गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
     
    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
    श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
     
    सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
    जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

  • 8:06 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: Gangaur Puja Aarti (नीव ढलती बेलड़ी जी)

    नीव ढलती बेलड़ी जी,
    मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी,
    मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी।
    आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी,
    डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
    गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
    गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
    गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी,
    आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी।
    बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी।

  • 7:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त 2026 (Gangaur Puja 2026 Timings)

    ब्रह्म मुहूर्त - 05:07 AM से 05:54 AM
    प्रातः सन्ध्या - 05:31 AM से 06:42 AM
    अभिजित मुहूर्त - 12:21 PM से 01:10 PM
    गोधूलि मुहूर्त - 06:48 PM से 07:12 PM
    सायाह्न सन्ध्या - 06:50 PM से 08:01 PM
    अमृत काल - 05:58 PM से 07:27 PM

  • 7:56 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर की आरती (Gangaur Aarti Lyrics)

    आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
    गौरी शंकर शिव पार्वती की -2

    देसी घी को दीप जलायो
    तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
    लाला फूला की थाने हार पहनायो
    आरती कीजिए...

    महिमा थारी सब कोई गावे
    खीर ढोकला को भोग लगावे
    भंडार उसके भर देते हो
    आरती कीजिए...

    ईसर म्हारा छैल छबीला
    गोरा म्हारी रूप की रानी
    सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं
    आरती कीजिए...

    जो कोई आपकी शरण में आवे
    सर्व सुहाग परम पथ पावे
    आरती कीजिए...

  • 7:54 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर का महत्व (Gangaur Puja Significance)

    गण का मतलब है भगवान शिव और गौर का मतलब है माता पार्वती। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतिक है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने कड़ी तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन आने वाली यह पूजा महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होती है।

    गणगौर पर्व की खास बात यह है कि इसमें विवाहित महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित युवतियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। जहां विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित युवतियां अच्छे वर की कामना के साथ गणगौर की पूजा करती हैं। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेती हैं। 

  • 7:22 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    सूर्य को अर्घ्य देने का गीत

    अल खल नदी जाय यो पाणी कहा जाय
    आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी
    ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो
    अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ
    सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा
    सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा
    सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।
    गणगौर को पानी पिलाने का गीत
    म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।
    म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो
    म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।
    म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।
    (यहां आपको बह्मदास जी की जगह अपने पिता और ईशरदास जी की जगह अपने पुत्र का नाम लेना हैं )

  • 7:09 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर व्रत की कथा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय की बात है भगवान शिव और देवी पार्वती नारद मुनि के साथ पृथ्वी भ्रमण पर आए। संयोग से वह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। माता पार्वती ने भगवान शिव से अनुमति लेकर नदी में स्नान करने का निश्चय किया। स्नान के पश्चात माता पार्वती ने नदी के किनारे बालू से एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ उसका पूजन किया। पूजन में माता ने बालू से बने पदार्थों का भोग अर्पित किया और उसी में से थोड़े कणों को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

    पूजन के बाद उन्होंने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की और पूरे विधि विधान के साथ पूजा संपन्न की। माता पार्वती की भक्ति और समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उसी पार्थिव शिवलिंग से प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया। भगवान शिव ने कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा। साथ ही वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी। यह वरदान देकर भगवान शिव वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

    पूजा में समय लग जाने के कारण माता पार्वती लौटने में थोड़ी देर हो गईं। जब वे भगवान शिव के पास पहुंचीं, तो वहां देवर्षि नारद भी उपस्थित थे। भगवान शिव ने उनसे देरी का कारण पूछा। माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि नदी किनारे उनके मायके के लोग मिल गए थे। उन्होंने आग्रह करके माता को दूध-भात ग्रहण करने और थोड़ी देर विश्राम करने को कहा।

    भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भी उस भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं और तुरंत नदी की ओर चल पड़े। माता पार्वती मन ही मन चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि वे उनकी प्रतिष्ठा और व्रत की रक्षा करें।

    नदी तट पर पहुंचने पर माता पार्वती ने एक विशाल और भव्य महल देखा। महल में प्रवेश करने पर उनके भाई-भौजाई और कुटुम्ब जन वहां उपस्थित थे। उन्होंने भगवान शिव का भव्य सत्कार किया और उनकी स्तुति की। प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां दो दिन तक रुके। तीसरे दिन माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन शिव जी और अधिक समय रुके रहना चाहते थे। माता पार्वती ने अकेले ही वहां से प्रस्थान किया, और अंततः भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़े।

    चलते-चलते भगवान शिव को याद आया कि उन्होंने अपनी माला वहीं छोड़ दी है। माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोकते हुए देवर्षि नारद को भेजा। नारद जी जब नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां कोई महल नहीं है। जगह पर घना जंगल था, जिसमें कई हिंसक जानवर विचरण कर रहे थे। नारद जी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए।

    तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी को एक वृक्ष पर भगवान शिव की माला लटकी दिखाई दी। उन्होंने माला उठाई और भगवान शिव को पूरी घटना सुनाई। नारद जी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे संभव हुआ कि महल और लोग गायब होकर जंगल में बदल गए।

    इस पर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है। उन्होंने अपने पूजन और व्रत को गुप्त रखने के लिए यह मायावी दृश्य रचा। माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब उनकी नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ।

    देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना करते हुए कहा कि वे पतिव्रताओं में सर्वोत्तम हैं। उनके स्मरण मात्र से स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होता है। नारद जी ने आगे कहा कि गुप्त पूजन सामान्य पूजा से अधिक फलदायी होता है। जो महिलाएं अपने पति की भलाई और मंगलकामना के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा। इसी प्रकार जो कन्याएं यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा।

  • 6:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर माता की पूजा

    गणगौर पर्व के दिन शिव और पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। इसके बाद भगवान शिव और मां गौरी (ईसर-गौरा) की इन प्रतिमाओं की विधि-विधान पूजा की जाती है और माता को पारंपरिक भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान मंत्रों का जाप होता है, लोकगीत गाए जाते हैं।

  • 6:57 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    गणगौर का गीत - ज्वारा का (Jwara Ka)

    म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या
    गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
    म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
    गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
    मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
    वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
    (यहां आपको सभी घर वालों के नाम लेने हैं )

  • 6:56 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    चांद चढ़यो गिरनार: Chand Chadyo Girnaar

    चांद चढ़यो गिरनार, किरत्यां ढल रही जी ढल रही,
    जा बाई रोवा घरा पधार माऊजी मारेला जी मारेला।
    बापू जी देवला गाल, बडोड़ो बीरो बरजेलो जी बरजेलो,
    थे मत दयो म्हारी बाई न गाल,
    बाई म्हारी चिड़कोली जी चिड़कोली।
    आज उड़ पर बात सवार बाई उड़ ज्यासी जी उड़ ज्यासी,
    गोरायारं दिन चार जावईडो ले जासी जी ले जासी।
    (यहां घर की बहन बेटियों का नाम लेना है )

  • 6:54 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर के गीत (Gangaur Geet Lyrics In Hindi)

    इस गीत को गाते समय आपको अपने घर वालों के नाम लेने है।

    Odo Kodo Geet (ओड़ो कोड़ो)

    ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख
    ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल
    ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल
    बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार
    बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार
    अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार
    चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,
    गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,
    वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए
    पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो
    गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो
    गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,
     

  • 6:52 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा सामग्री लिस्ट (Gangaur Puja Samagri List)

    लकड़ी की चौकी
    तांबे का कलश
    गणगौर माता की प्रतिमा
    दो मिट्टी के बर्तन
    मिट्टी के दीये
    काली मिट्टी या होली की राख
    कुमकुम
    चावल
    पूजा थाली
    फूल
    घास
    दो मिट्टी के कुंडे/गमले
    हल्दी
    मेहन्दी
    गुलाल
    अबीर
    मिठाई
    चावल
    मूंग
    माता की चुनरी
    काजल
    लाल या पीले रंग का कपड़ा
    घी
    आम के पत्ते
    पानी से भरा बर्तन
    पान के पत्ते
    बेताल और अशोक चले जाते हैं
    गणगौर के कपड़े
    गेहूं
    लकड़ी की टोकरी
    नारियल

  • 6:49 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मंत्र (Gangaur Puja Mantra)

    • 'ॐ ह्रीं गौरीपतये स्वाहा' मंत्र का जाप देवी गौरी को फूल, हल्दी, कुमकुम और पवित्र जल अर्पित करते समय करना है।

    विवाह और वैवाहिक सुख के लिए ये मंत्र जपना है-

    • कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः॥
  • 6:48 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा विधि (Gangaur Puja Vidhi)

    • वैसे तो गणगौर पूजा पर्व 18 दिनों तक मनाया जाता है। लेकिन इस पर्व का मुख्य दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी नवरात्रि का तीसरा दिन होता है।
    • कई महिलाएं नवरात्रि के तीसरे दिन ही गणगौर पूजा मनाती हैं।
    • इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • इसके बाद माता गौरी और शिव जी की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
    • फिर मिट्टी से ईसर-गौर की प्रतिमा बनाएं और उनकी विधि विधान स्थापना करें।
    • गणगौर का श्रृंगार जरूर करें। उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं।
    • इसके बाद गणगौर के गीत गाएं।
    • फिर घर की किसी दीवार पर या फिर पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल लगाएं।
    • फिर एक थाल में चांदी का सिक्का, दही, सुपारी, पान, दूध, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम और दूर्वा डालकर सुहाग जल तैयार कर लें।
    • फिर दूर्वा को हाथों में लेकर इस सुहाग जल को भगवान शिव और माता गौरी यानी गणगौर पर छिड़के। इसके बाद इस जल को घर के सदस्यों पर भी छिड़कें।
    • इसके बाद भगवान शिव और गौरी माता को चूरमे का भोग लगाएं।
    • फिर गणगौर की कथा भी जरूर सुनें या पढ़ें।
    • फिर शाम में गणगौर को पानी पिलाएं।
    • इसके बाद सरोवर या कुंड में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जित कर दें।
  • 6:47 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर का त्योहार

    गणगौर का त्योहार चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव को ईसर जी तो वहीं माता पार्वती को गौरा माता के रूप में पूजा जाता है। ये व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए तो अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। मुख्य रूप से ये त्योहार हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं बालू और मिट्टी से ईसर और गौरा जी की प्रतिमाएं बनाती हैं और उनका श्रृंगार करती हैं। फिर विधि विधान इनकी पूजा करने के बाद लोकगीतों का गायन करती हैं। चलिए जानते हैं इस साल गणगौर पूजा कब है और इसकी पूजा विधि क्या है।

  • 6:45 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त (Gangaur Puja 2026 Date And Time)

      हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन इसी दिन रात में 11 बजकर 56 मिनट पर हो जाएगा। पंचांग को देखते हुए 21 मार्च दिन शनिवार को गणगौर व्रत किया जाएगा।
       
    1. 6:43 AM (IST)
      Posted by Arti Azad

      Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा मुहूर्त 2026 (Gangaur Puja 2026 Timings)

      1. ब्रह्म मुहूर्त - 05:07 AM से 05:54 AM
      2. प्रातः सन्ध्या - 05:31 AM से 06:42 AM
      3. अभिजित मुहूर्त - 12:21 PM से 01:10 PM
      4. गोधूलि मुहूर्त - 06:48 PM से 07:12 PM
      5. सायाह्न सन्ध्या - 06:50 PM से 08:01 PM
      6. अमृत काल - 05:58 PM से 07:27 PM
    2. 6:43 AM (IST)
      Posted by Arti Azad

      Gangaur Puja 2026 Live Updates: गणगौर पूजा कब है 2026 (Gangaur Puja 2026 Date)

      गणगौर पूजा पर्व 21 मार्च 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि का प्रारम्भ 21 मार्च 2026 को 02:30 AM पर होगा और समापन 21 मार्च 2026 को 11:56 PM पर होगा।

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