Gupt Navratri: माघ माह की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 30 जनवरी से हुई थी। हर साल चार बार गुप्त नवरात्रि का पावन त्योहार आता है जिसमें दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ माह में मनाई जाती है। इसके अलावा चैत्र और आश्विन माह में नवरात्रि आती है। आपके बता दें कि गुप्त नवरात्रि को साधना, ध्यान आदि के लिए बेहद शुभ माना जाता है। माघ माह की गुप्त नवरात्रि की समाप्ति 7 फरवरी 2025 को होगी। इसलिए आपको गुप्त नवरात्रि के समाप्त होने से पहले क्या कार्य करके माता रानी की कृपा मिल सकती है, आइए जानते हैं।
आर्थिक समृद्धि के लिए करें ये कार्य
गुप्त नवरात्रि के बचे दो दिनों में आपको माँ दुर्गा के चरणों में कमल का फूल चढ़ाकर ‘श्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। यह कार्य आप गुप्त नवरात्रि समाप्त होने के बाद भी कर सकते हैं। माना जाता है कि इस आसान से उपाय को करने से धन से जुड़ी आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
वैवाहिक जीवन में सुख के लिए
अगर आपके वैवाहिक जीवन में परेशानियां आ रही हैं तो माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन आपको करनी चाहिए। इसके साथ ही “ॐ वज्रैकरण शिवे रुध रुध भवे ममाई अमृत कुरु कुरु स्वाहा” मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की बड़े से बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।
पारिवारिक खुशियों के लिए करें ये काम
अगर आप पारिवारिक जीवन में खुशहाली चाहते हैं, तो हल्दी से रंगे पीले कपड़े में चने की दाल बांधकर माँ दुर्गा को अर्पित आपको करनी चाहिए। यह कार्य आप गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन करके साल भर शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
संतान सुख के लिए उपाय
अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे जीवन में उन्नति करें तो आपको “ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नंद गोप सुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके साथ ही गुप्त नवरात्रि से शुरू करके नौ दिनों तक गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए।
सिद्धि प्राप्ति के लिए उपाय
गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त साधना करने से कई सिद्धियां भक्तों को प्राप्त होती हैं। इस दौरान “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” जप करने से आपको आलौकिक अनुभव हो सकते हैं। वहीं तंत्र साधना करने वाले लोग इस दिन माता काली और भैरव जी की साधना से लाभ पा सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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