ज्योतिष शास्त्र अनुसार मंगल एक क्रूर ग्रह है जो ऊर्जा, भूमि, शक्ति, साहस, शौर्य का कारक माना जाता है। इसे मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामित्व प्राप्त है। मकर में ये उच्च का होता है जबकि कर्क में नीच का हो जाता है। यह मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी है। कहते हैं अगर मंगल अच्छा है तो व्यक्ति स्वभाव से निडर होता है और शत्रुओं पर हमेशा विजय प्राप्त करता है। वहीं अगर ये ग्रह अशुभ स्थिति में बैठा है तब जीवन के कई क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गरुण पुराण के अनुसार मनुष्य के शरीर में नेत्र मंगल का स्थान माने जाते हैं। यहां हम आपको बताएंगे मंगल भारी होने पर क्या संकेत मिलते हैं।
मंगल भारी कब होता है?
ज्योतिष अनुसार यदि जन्म कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में बैठा हो तो यह स्थिति कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण करती है।
मंगल भारी होने के लक्षण क्या हैं?
- शादी में देरी होना।
- मन में डर और संकोच बना रहना।
- हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।
- बार-बार चोट लगना या एक्सीडेंट होना।
- किसी न किसी कानूनी मामले में उलझे रहना।
- वैवाहिक जीवन में अशांति रहना।
- मेहनत का फल देर से प्राप्त होना।
- जल्दबाजी में फैसले लेना और बिना सोचे समझे काम करना।
- खून से संबंधित बीमारियां, त्वचा की समस्याएं और पाचन संबंधी परेशानियां होना।
मंगल भारी होने पर क्या करें?
- ज्योतिष परामर्श से मूंगा रत्न धारण कर सकते हैं।
- तीन मुखी रुद्राक्ष पहन सकते हैं।
- लाल रंग का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।
- मंगलवार का व्रत धारण करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- मंगल से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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