निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान को प्रसन्न करने के निमित्त रखा गया व्रत आपको सभी एकादशियों के व्रत जितना फल दे सकता है। साथ ही इस दिन विष्णु मंत्रों और स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन आप श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विष्णु कृपा से आपको परिवारिक जीवन में भी खुशियां प्राप्त होती हैं।
श्री विष्णु स्तोत्र
किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुनः पुनः।
यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव।। 1
मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम्।
गोविंदं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम्।। 2
पद्नाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम्।
गोवर्धनं हृषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम्।। 3
विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम्।
दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम्।। 4
अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम्।
गवां कोटिप्रदस्य अश्वमेधशतस्य च।। 5
कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानवः।
अमायां वा पूर्णमास्यामेकादश्यां तथैव च।। 6
सायंकाले स्मरेन्नित्यं प्रातःकाले तथैव च।
मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते।। 7
इति श्री विष्णु स्तोत्र सम्पूर्णम्।।
श्री विष्णु स्तोत्र पाठ के लाभ
निर्जला एकादशी के साथ ही धार्मिक तिथियों पर श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। एकाग्रता, भय मुक्ति, पारिवारिक सुख, मानसिक शांति के लिए श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक माना जाता है। श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने से आपको पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव दिखते हैं। इसके साथ ही श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने से ग्रह-नक्षत्रों की प्रतिकूल स्थिति भी अनुकूल होने लगती है। इस स्तोत्र का पाठ करने से विष्णु भगवान आपकी इच्छाओं की भी पूर्ति करते हैं। इसके साथ ही जो लोग आध्यात्मक के पथ पर अग्रसर हैं उनको भी अलौकिक अनुभव इस स्तोत्र का पाठ करने से प्राप्त हो सकते हैं।
किसी समय करें श्री विष्णु स्तोत्र पाठ
श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने के लिए सबसे शुभ समय सुबह 5 बजे से 7 बजे तक का है। इसके अलावा सूर्यास्त से आधा घंटा पहले और सूर्यास्त के 1 घंटे बाद तक भी इस स्तोत्र का पाठ आप कर सकते हैं। निर्जला एकादशी के दिन इस स्तोत्र का पाठ आपको सुबह के समय ही करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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