Premanand Maharaj on kalyug: वृंदावन के संत और राधारानी के परम भक्त प्रेमानंद महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। महाराज जी का जलवा केवल वृंदावन या भारत तक ही सीमित हैं, बल्कि दुनिया भर में बड़ी संख्या में उनके फॉलोअर्स हैं। प्रेमानंद महाराज को मानने वाले बड़ी दूर-दूर से उनकी एक झलक देखने के लिए आते हैं। प्रेमानंद महाराज से भेंट वार्ता के दौरान लोग अपनी समस्याएं महाराज जी के सामने रखते हैं, जिसका महाराज जी आसान उपाय बताकर समस्या का समाधान कर देते हैं। इस दौरान महाराज जी द्वारा छोटी से छोटी बातों पर दी गई सीख के वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाते हैं। ऐसे कई वीडियो अक्सर आपको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिल जाएंगे। आज हम आपके लिए ऐसे ही एक वायरल हो रहे उनके वीडियो में प्रेमानंद महाराज द्वारा दी गई सीख लेकर आए हैं, जो हर किसी के काम की है, क्या है वो बात आइए जानते हैं?
कैसे कलियुग सबसे सम्माननीय युग है?
कलियुग को अक्सर पाप और पतन का युग कहा जाता है, लेकिन प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज इससे बिल्कुल अलग दृष्टिकोण रखते हैं। अपने प्रवचनों में महाराज जी बताते हैं कि कलियुग को केवल दोषों से नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक शक्ति से समझना चाहिए। उनका कहना है कि भले ही आज पाप बढ़ते दिखते हों, लेकिन इसी युग में भगवान की भक्ति सबसे सहज और प्रभावी है। महाराज जी उदाहरणों और कथाओं के माध्यम से समझाते हैं कि कलियुग वास्तव में कैसे सबसे सम्माननीय युग है और इंसान इसमें रहते हुए भी सतयुग का आनंद कैसे पा सकता है।
दरअसल, एक व्यक्ति ने कलियुग को लेकर महाराज जी से सवाल किया। सवाल था, 'किसी भी युग में इतना पाप नहीं होता था जितना कलियुग में हो रहा है, इस कलियुग में हम कैसे बचे?' इससे पहले कि उस व्यक्ति का सवाल पूरा होता प्रेमानंद महाराज जी ने अपनी बात रखी। इसका जवाब प्रेमानंद महाराज ने कुछ इस तरह से दिया। प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि किसी भी युग में पाप की तुलना केवल सुनने से नहीं की जा सकती। त्रेता युग का उदाहरण देते हुए वे बताते हैं कि उस समय ऋषियों को राक्षस खा जाते थे और उनकी हड्डियों के ढेर लगे रहते थ, जबकि कलियुग में ऐसी अमानवीय घटनाएं नहीं दिखतीं। महाराज जी कहते हैं कि कलियुग इसलिए महान है क्योंकि जहां पहले हजारों वर्षों की तपस्या से सिद्धि मिलती थी, वहीं अब केवल 24 घंटे के नाम कीर्तन से ही भगवान की कृपा प्राप्त हो सकती है।
सवाल- किसी भी युग में इतना पाप नहीं होता था जितना कलियुग में हो रहा है, इस कलियुग में हम कैसे बचे?
इस पर प्रेमानंद जी महाराज उससे सवाल करते हुए कहते हैं कि क्या जिस समय कि तुम बात कर रहे हो उस युग में तुम थे। आगे समझाते हुए महाराज जी कहते हैं कि जब रामजी त्रेता युग में अवतरित हुए, तब जैसे मुर्गे की हड्डियां कोई खाकर फेंक देता है, ऐसे ही ऋषियों की हड्डियों के ढेर लगे रहते थे। कलियुग में तो कभी ऐसा नहीं होता, कभी आपने ये नहीं सुना होगा कि महात्मा को जिंदा आदमी खा रहा है। भगवान राम जी ने पूछा कि ये हड्डियां किनकी हैं, तब ऋषियों ने कहा कि जानकर के अनजान की तरह पूछते हो प्रभु। ये सब ब्रह्म ऋषियों की हड्डियां हैं, जो राक्षसों ने खा-खा कर जमा कर दी है।
क्यों महाराज जी ने कहा कलियुग के समान कोई युग नहीं
आगे महाराज जी कह हैं कि बच्चा कलियुग बहुत सम्माननीय युग है, इसे तुम समझ नहीं पा रहे। कलियुग के समान कोई युग नहीं है। जो दस-दस हजार वर्ष तपस्या करने पर बात बनती थी, वो केवल 24 घंटे नाम कीर्तन करने पर बात बन जाएगी। जय हो कलियुग की। कैसी बात करते हो बच्चा। जब हम पाप आचरण करते हैं तो हर युग में कलियुग है और जब हम भगवान का भजन करते है तो समय सतयुग है। अब बताओ कहां कलियुग है। शराब का सेवन न करें, पराई माताओं-बहनों पर गंदी नजर न डालें, जुआ न खेलें, मांस न खाएं (हिंसा) और चोरी न करें। ये पांच चीजें कभी न करें, कलियुग तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, कभी बाधा नहीं पहुंचाएगा, लेकिन ये पांच चीजें करोगे तो कलियुग मटियामेट कर देगा।
अंत में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बुरे आचरण से दूर रहना चाहिए, तब कलियुग एकदम आपका कुछ बिगड़ने नहीं देगा, लेकिन इन पांच कर्मों से दूर रहकर आप कलियुग में रहते हुए ही सतयुग का आनंद ले सकते हैं।