Tulsi Vivah Samagri: तुलसी विवाह कैसे कराया जाता है? जानिए इसमें क्या-क्या सामग्री लगती है
Tulsi Vivah Samagri: तुलसी विवाह कैसे कराया जाता है? जानिए इसमें क्या-क्या सामग्री लगती है
Written By: Laveena Sharma@laveena1693
Published : Oct 28, 2025 02:25 pm IST,
Updated : Oct 31, 2025 10:22 am IST
तुलसी विवाह का आयोजन कार्तिक शु्क्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में भक्त तुलसी माता का विवाह भगवान शालिग्राम से कराते हैं। ऐसे में इस अनुष्ठान के समय कई सामग्रियों की जरूरत होती है। यहां आप जानेंगे तुलसी विवाह में क्या-क्या सामान लगता है।
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तुलसी विवाह सामग्री
Tulsi Vivah Samagri List In Hindi: पंचांग अनुसार तुलसी विवाह का आयोजन इस साल 2 नवंबर को किया जाएगा। इस शुभ अवसर पर लोग विधि विधान तुलसी माता और शालिग्राम जी का विवाह कराते हैं। कहते हैं तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के बराबार पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है। कहते हैं जिन लोगों के घर कन्या नहीं होती उन्हें तो तुलसी विवाह कराकर कन्या दान का पुण्य फल जरूर प्राप्त करना चाहिए। चलिए बताते हैं तुलसी विवाह कैसे कराया जाता है और इस दौरान किन सामग्रियों की जरूरत पड़ती है।
तुलसी विवाह की सामग्री (Tulsi Vivah Samgri list)
तुलसी का पौधा
भगवान विष्णु या शालीग्राम जी की प्रतिमा
लाल रंग का वस्त्र
कलश
आम के पत्ते
पूजा की चौकी
सुगाह की सामग्री (बिछुए, सिंदूर, बिंदी, चुनरी, सिंदूर, मेहंदी आदि)
फल (मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, अमरुद आदि)
केले के पत्ते
हल्दी की गांठ
नारियल
कपूर
रोली
गंगाजल
घी
धूप
चंदन
तुलसी विवाह कैसे कराते हैं (Tulsi Vivah Kaise Karate Hain)
तुलसी विवाह संपन्न कराने के लिए एक चौकी पर आसन लगाएं और उस पर तुलसी के पौधे को रखें।
इस बात का ध्यान रखें कि तुलसी का गमला गेरू से जरूर रंगा हो। अब दूसरी चौकी पर शालिग्राम भगवान को स्थापित करें।
अब गन्ने की सहायता से दोनों चौकियों के ऊपर मंडप बनाएं।
एक कलश में जल भरकर रखना है और उसमें पांच आम के पत्ते लगाकर पूजा स्थान पर रख लें।
अब घी का दीपक जलाएं।
भगवान शालिग्राम और तुलसी के पौधे पर गंगाजल छिड़कें। साथ ही रोली लगाएं।
तुलसी माता को चुनरी या साड़ी पहनाएं। साथ ही श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
इसके बाद चौकी समेत शालिग्राम भगवान को हाथों में लेकर तुलसी के पौधे की सात परिक्रमा करें। ये रस्म तुलसी जी और शालिग्राम भगवान के सार फेरे कराने का प्रतीक होती है।
ध्यान रहे कि शालिग्राम भगवान को किसी पुरुष को ही उठाकर फेरे करवाने हैं।
अंत में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान की आरती करें।