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राधा का प्रेम या राहु का दोष क्यों किया था श्रीकृष्ण ने मोर मुकुट धारण?

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Aug 13, 2025 01:05 pm IST,  Updated : Aug 13, 2025 01:05 pm IST

भगवान कृष्ण के मस्तक पर मोर मुकुट तो आप सभी ने देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान कृष्ण यह मुकुट धारण क्यों करते हैं? इससे जुड़ी कुछ रोचक कहानियां हैं जिनके बारे में आज हम आपको जानकारी देंगे।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 Image Source : FREEPIK

भगवान कृष्ण के सिर पर मोरपंख का मुकुट तो आप सभी ने देखा होगा। मोर मुकुट धारण करने की वजह से ही श्रीकृष्ण का एक नाम मोर मुकुटधारी भी है। हालांकि, भगवान कृष्ण क्यों ये मोर मुकुट धारण करते हैं इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी रोचक वजहों के बारे में बताने वाले हैं, जिसके चलते ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने मोर मुकुट धारण किया था।

मोरपंख है राधा कृष्ण का प्रतीक

कुछ शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण के मस्तक पर सजा मोरपंख राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है। माना जाता है कि श्रीकृष्ण की बंसी की धुन पर एक बार राधा रानी नृत्य कर रही थीं, उनके साथ ही मोर भी नृत्य करने लगे। नृत्य के दौरान एक मोर का पंख जमीन पर गिर गया। भगवान कृष्ण ने इस मोरपंख को उठाया और अपने मस्तक पर धारण कर दिया। तब से यह मोरपंख राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक स्वरूप भगवान कृष्ण के सिर पर सुसज्जित हो गया।

क्या राहु का दोष है मोरपंख धारण करने की वजह?

कुछ ज्योतिषीय विद्वानों के अनुसार भगवान कृष्ण राहु के दोष को दूर करने के लिए यह मोरपंख धारण करते थे। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण की कुंडली में राहु-केतु के विशेष संयोग से बनने वाला कालसर्प दोष था। इस दोष के चलते ही श्रीकृष्ण को आजीवन परेशानियों का सामना भी करना पड़ा था। उनका जन्म कारागार में हुआ, जन्म के बाद ही माता-पिता से वो अलग हो गए। उनके मामा ने ही उनका वध करना चाहा और इसी तरह की कई अप्रिय घटनाएं भगवान कृष्ण के जीवन में हुईं। इसलिए विद्वानों का मानना है कि श्रीकृष्ण कालसर्प दोष से पीड़ित थे और इसीलिए राहु और केतु के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए मोर मुकुट पहनते थे। आपको बता दें की कालसर्प दोष में मोर मुकुट इसलिए पहना जाता है कि मोर, सर्प की शक्ति को क्षीण कर देता है, ऐसे में मोरपंख धारण करने से कालसर्प दोष का प्रभाव भी कम हो जाता है।  

श्री राम के जीवन से जुड़ी कथा

एक धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान राम एक बार मां सीता और लक्ष्मण के साथ वन में जल की तलाश कर रहे थे। हालांकि, उन्हें दूर-दूर तक भी जलाशय नहीं दिख रहा था। ऐसे में एक मोर ने उन्हें जलाशय का रास्ता दिखाया था और रास्ता दिखाने के लिए वो रास्ते में अपने पंखों को गिरा रहा था ताकि श्रीराम रास्ता न भटक जाएं। जलाशय तक पहुंचते-पहुंचते मोर के सारे पंख टूट गए। पंख टूटने के कारण उसका अंतिम समय निकट आ गया, तब भगवान राम ने मोर से कहा कि तुम्हारे इस ऋण को इस जन्म में तो मैं नहीं चुका पाऊंगा लेकिन अगले जन्म में मैं अवश्य तुम्हारे इस उपकार का मूल्य चुकाऊंगा। माना जाता है कि जब श्रीराम जी ने कृष्ण का अवतार लिया तो मोर के ऋण को चुकाने के लिए ही मोर मुकुट को अपने मस्तक पर धारण किया।  

भगवान कृष्ण के मोर मुकुट धारण करने के पीछे ऊपर दी गई वजहें हैं। इनमें से राधा रानी के प्रेम के चलते या फिर मोर के उपकार का बदला चुकाने के लिए भगवान कृष्ण का मोर मुकुट धारण करना ज्यादा प्रासंगिक लगता है। ज्योतिषाचार्य राहु के दोष के कारण मोर मुकुट धारण करने की बात कहते हैं, यह बात इसलिए सही प्रतीत होती है कि मानव रूप में भगवान भी ग्रहों के प्रकोप से नहीं बच सकते, ये संदेश श्रीकृष्ण ने दिया। वजह कुछ भी हो लेकिन मोर मुकुट पहनकर भगवान कृष्ण ने प्रेम और समभाव का संदेश हमको दिया है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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