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लोकपाल डीके जैन का का करार बढाने को लेकर बीसीसीआई ने नहीं लिया अभी तक कोई फैसला

 Reported By: Bhasha
 Published : Apr 29, 2020 04:15 pm IST,  Updated : Apr 29, 2020 04:15 pm IST

डीके जैन के एक साल का करार फरवरी माह में समाप्त हो गया था। जिसके बाद से लेकर अभी तक बीसीसीआई की तरफ से उनका करार बढाने को लेकर किसी भी प्रकार की सुचना नहीं आई है।

BCCI- India TV Hindi
BCCI Image Source : BCCI

नई दिल्ली| भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के लोकपाल और आचरण अधिकारी डीके जैन के एक साल का करार फरवरी माह में समाप्त हो गया था। जिसके बाद से लेकर अभी तक बीसीसीआई की तरफ से उनका करार बढाने को लेकर किसी भी प्रकार की सुचना नहीं आई है। हालांकि अब उनका करार बढ़ाने का फैसला बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह पर निर्भर है।

न्यायमूर्ति जैन ने बुधवार को पीटीआई से कहा, ‘‘कुछ समय पहले सीईओ (राहुल जौहरी) ने मौखिक रूप से मुझसे पूछा था कि क्या अनुबंध बढ़ाने में मेरी रुचि है और मैंने हां कहा था। लेकिन इसके बाद अब तक उनकी ओर से कोई सूचना नहीं मिली। बेशक अब लॉकडाउन के कारण स्थिति अलग है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बीसीसीआई को औपचारिक (लिखित) पेशकश के साथ आने दीजिए और मैं निश्चित रूप से इस पर विचार करूंगा।’’ यह पूछने पर कि क्या उन्हें नई शिकायतें मिली है, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे जानकारी नहीं है क्योंकि बीसीसीआई मुझे सूची भेजता है। फिलहाल लॉकडाउन के कारण कार्यालय बंद है। मुझे नहीं लगता कि हितों के टकराव का कोई नया मामला है।’’

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न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि उनके पास पांच मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुझे सही याद है तो चार या पांच मामले लंबित हैं। इनमें से एक मयंक पारिख का हितों के टकराव का मामला है।’’ पारिख भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मीडिया अधिकारी रह चुके हैं। पारिख के खिलाफ एक शिकायत यह भी है कि मुंबई में वह छह क्लबों का संचालन करते हैं। बीसीसीआई में न्यायमूर्ति जैन के कार्यकाल की शुरुआत लोकेश राहुल और हार्दिक पंड्या के ‘काफी विद करण’ कार्यक्रम के विवाद के साथ हुई थी।

इसके बाद उन्होंने हितों के टकराव के कई मामलों की सुनवाई की जिसमें क्रिकेट सलाहकार समिति के पूर्व सदस्यों सचिन तेंदुलकर, गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण से जुड़े मामले भी शामिल हैं। फरवरी में शीर्ष परिषद की बैठक के दौरान अलग-अलग लोकपाल और आचरण अधिकारी की नियुक्ति का मामला एजेंडा में था लेकिन इस मामले में अधिक प्रगति नहीं हुई। 

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