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Azadi ka Amrit Mahotsav: पीटी उषा ओलंपिक मेडल से चूकने के बावजूद बनीं 'उड़न परी', आजाद भारत की सबसे बड़ी एथलीट की कहानी

 Written By: Ranjeet Mishra
 Published : Aug 13, 2022 08:04 pm IST,  Updated : Aug 13, 2022 08:04 pm IST

Azadi ka Amrit Mahotsav: देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। पिछले 75 सालों में कई एथलीट्स आए पर आजाद भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में पीटी उषा से बेहतर खिलाड़ी शायद आज तक नहीं देखा। उषा आज भी शिखर पर हैं।

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PT Usha Image Source : GETTY

Highlights

  • आजादी के अमृत महोत्सव का जश्न पीटी उषा के साथ
  • 1984 ओलंपिक में सेकेंड के 1/1000 हिस्से से चूक गईं कांस्य पदक
  • एशियन चैंपियनशिप में बनाए कई नए कीर्तिमान

Azadi ka Amrit Mahotsav: भारत को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष हो चुके हैं। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इन 75 वर्षों में भारत में कई एथलीट आए, कई उपलब्धियां अपने नाम की और अपने प्रदर्शन से नई इबारत लिखी। इन तमाम एथलीटों में पीटी उषा का नाम आज भी शिखर पर मौजूद है। आजाद भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में उनसे बेहतर खिलाड़ी शायद आज तक नहीं देखा। उषा आज भी शिखर पर हैं। 27 जून 1964 को केरल में जन्मीं पीटी उषा ने 20 वर्ष की आयु में जो करिश्माई प्रदर्शन किया वह आज तक किसी भी भारतीय धावक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का मानक बना हुआ है।

1984 ओलंपिक ने पीटी उषा को बनाया ‘उड़न परी’

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1984 लॉस एंजलिस ओलंपिक में उन्होंने अपने प्रदर्शन से पूरे विश्व को हैरान कर दिया। भारतीय धाविका ने 400 मीटर हर्डल रेस मे हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हुए ओलंपिक ट्रायल में एशियाई चैंपियन एमडी वलसम्मा को हराकर क्वॉलीफाई किया। ओलंपिक से पहले हुए एक ट्रायल में, उन्होंने 55.7 सेकंड का समय निकालकर अमेरिकी टॉप एथलीट जूडी ब्राउन को हराया। 1984 ओलंपिक के सेमीफाइनल में 55.54 सेकेंड का समय निकालकर फाइनल में जगह बनाते हुए एक नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड भी बनाया। फाइनल में वह 55.42 सेकेंड के साथ चौथे स्थान पर आईं, जो ब्रॉन्ज मेडलिस्ट से सिर्फ 1/100 सेकेंड ज्यादा का वक्त था। पीटी उषा के कांस्य पदक से चूकने का फैसला फोटो फिनिश तकनीक की मदद से किया गया। उनके इस प्रदर्शन को आज भी ओलंपिक में किसी भारतीय महिला एथलीट का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। इसके बाद ही उन्हें भारत की ‘उड़न परी’ कहा गया।

पीटी उषा ने जकार्ता एशियाई चैंपियनशिप में बनाए कई रिकॉर्ड

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इसके एक साल बाद, 1985 जकार्ता एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय धाविका ने जीत और कीर्तिमान की कई नई इबारतें लिखीं। यहां उन्होंने छह पदक जीते जिसमें पांच स्वर्ण और एक कांस्य शामिल थे। पीटी उषा 11.64 सेकेंड में 100 मीटर रेस की विजेता बनीं और 23.05 सेकेंड में 200 मीटर रेस को अपने नाम किया। उन्होंने 52.62 सेकेंड में 400 मीटर रेस को खत्म करके एक नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया और 400 मीटर हर्डल रेस 56.64 सेकेंड में जीतीं। उषा ने ये दोनों रेस 35 मिनट के अंतराल में जीतीं। उनका पांचवां गोल्ड 4x400 मीटर रिले में और 4x100 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल आया। भारतीय एथलीट ने चैंपियनशिप के इतिहास में एक ही इवेंट में सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया।

1986 एशियन गेम्स में दर्ज की कई स्वर्णिम सफलताएं

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पीटी उषा का 1986 के सियोल एशियन गेम्स में प्रदर्शन काफी हद तक जकार्ता चैंपियनशिप के प्रदर्शन का दोहराव था। हालांकि 100 मीटर रेस में उन्हें 11.67 सेकंड के समय के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा पर बाकी के रेस में उनका प्रभुत्व कायम रहा। उन्होंने 200 मीटर रेस में 23.44 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड, 400 मीटर में 52.16 सेकेंड के साथ गोल्ड और 4x400 मीटर रिले रेस में 3:34.58 समय के साथ एक और गोल्ड जीता। ये सभी गोल्ड मेडल्स नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ आए।

उन्हें इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने करियर मे 4 एशियन गेम्स गोल्ड मेडल और 7 सिल्वर मेडल जीते। आजादी का अमृत महोत्सव मनाने की इस घड़ी में भारतीय एथलेटिक्स की रानी राज्यसभा सदस्य के रूप में देश की सेवा कर रही हैं।

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