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Google ने यूरोपीय यूनियन से फिर लिया 'पंगा', नई पॉलिसी मानने से किया इंकार

Google ने यूरोपीय यूनियन की नई पॉलिसी को मानने से इंकार कर दिया है। गूगल ने यूरोपीय यूनियन को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। साथ ही, कंपनी ने कहा है कि वो ऐसा कोई कमिटमेंट नहीं करने वाली है।

Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
Published : Jan 17, 2025 01:28 pm IST, Updated : Jan 17, 2025 01:28 pm IST
Google, EU, Google Fact Check- India TV Hindi
Image Source : FILE गूगल और अल्फाबेट सीईओ सुंदर पिचाई

Google ने यूरोपीय यूनियन से एक बार फिर से पंगा ले लिया है। अमेरिकी टेक कंपनी ने EU को बयाया कि वो उनकी नई डिसइन्फॉर्मेशन कोड ऑफ प्रैक्टिस वाली पॉलिसी को नहीं मानेगी। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल ने यूरोपीय यूनियन से कहा कि वह अपने सर्च रिजल्ट और यूट्यूब वीडियो में फैक्ट चैकिंग वाले नियम के तहत कॉन्टेंट की रैंकिंग और उसे हटाने के रिजल्ट को प्रभावित करने के लिए इसका उपयोग नहीं करेगा। गूगल ने यूरोपीय यूनियन के कॉन्टैंट और टेक्नोलॉजी डिवीजन के डिप्टी डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखकर यह बात कही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के ग्लोबल अफेयर्स के प्रेसिडेंट केंट वाकर ने अपने पत्र में बताया कि यूरोपीय यूनियन के नए डिसइन्फॉर्मेशन कोड ऑफ प्रैक्टिस के तहत गूगल सर्विसेज के लिए फैक्ट चैकिंग सही और प्रभावी नहीं होगी। अपने पत्र में वाकर ने कहा कि गूगल इसके लिए प्रतिबद्ध नहीं है।

क्या है EU की नई पॉलिसी?

यूरोपीय यूनियन की नई डिसइन्फॉर्मेशन कोड ऑफ प्रैक्टिस को पहले 2018 में लाया गया था, जिसे बाद में 2022 में अपडेट किया गया। इस पॉलिसी में टेक कंपनियों के लिए अफवाहों से निपटने के लिए स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं की रूपरेखा तैयार की गई। यूरोपीय यूनियन द्वारा प्रस्तावित कोड ऑफ कंडक्ट में गूगल समेत तमाम प्लेटफॉर्म्स को फैक्ट चैक को सर्च रिजल्ट और यूट्यूब वीडियो के रिजल्ट में दिखाने के लिए कहा गया। साथ ही, फैक्ट चैकिंग को उनके रैंकिंग एल्गोरिदम में रखने के लिए कहा गया।

गूगल की क्या है दलील?

गूगल लगातार फैक्ट चेकिंग को अपने कॉन्टेंट मॉडरेशन स्ट्रैटेजी से बाहर रख रहा है। अपने पत्र में वाकर ने कहा कि कंपनी की मौजूदा पॉलिसी के तहत की जाने वाली फैक्ट चेकिंग कितनी प्रभावित है, यह हाल में हुए ग्लोबल चुनावों में देखा जा सकता है। गूगल यूरोपीय यूनियन के नए कोड के तहत फैक्ट चेकिंग करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। कंपनी यूरोपीय यूनियन द्वारा लाए गए नए डिजिटल सर्विस एक्ट (DSA) से पहले से ही फैक्ट चेकिंग कर रहा है।

टेक कंपनी यूरोपीय यूनियन के फैक्ट चेकिंग कोड्स को मानने से इंकार करने के अलावा मौजूदा कॉन्टैंट मॉडरेशन को अपग्रेड करने की तैयारी में है। इसके लिए YouTube में AI ट्रांसपैरेंसी टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि वीडियो कॉन्टेंट के सर्च रिजल्ट में बेहतर कॉन्टेक्स्ट वाले रिजल्ट मिल सके।

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