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Meta के एनक्रिप्शन फीचर पर फिर उठे सवाल, कोर्ट फाइलिंग में हुआ बड़ा खुलासा

Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh Published : Feb 24, 2026 04:10 pm IST, Updated : Feb 24, 2026 04:10 pm IST

Meta के खिलाफ मैक्सिको कोर्ट में एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें कंपनी के एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर पर फिर से सवाल उठाया गया है। कंपनी के खिलाफ 40 से ज्यादा एटर्नी जनरल ने मुकदमा दायर किया है।

Meta- India TV Hindi
Image Source : META मेटा

Meta का एनक्रिप्शन फीचर एक बार फिर से सवालों के दायरों में आ गया है। WhatsApp की तरह ही मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक मैसेंजर और Instagram के डायरेक्ट मैसेजिंग फीचर में एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर की वजह से चाइल्ड एब्यूज और टेररिस्ट एक्टिविटीज जैसे मामलों को रिपोर्ट करना मुश्किल हो गया है। मैक्सिको स्टेट कोर्ट में दायर दस्तावेज के मुताबिक, मेटा के टॉप एग्जीक्यूटिव्स ने मार्क जुकरबर्ग को इससे संबंधित ई-मेल किए थे और इस फीचर को WhatsApp के अलावा अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में इंट्रोड्यूस करने से रोकने की गुजारिश की थी।

मैक्सिकन कोर्ट में दायर फाइलिंग में कंपनी के एक आंतरिक दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि 2019 में कंपनी ने कंटेंट पॉलिसी हेड मोनिका बिकर्ट (Monica Bickert) ने मार्क जुकरबर्ग को ई-मेल के जरिए एनक्रिप्शन फीचर को लेकर आगाह किया था। मोनिका ने अपने ई-मेल में कहा,'हम एक कंपनी के तौर पर गलत चीज करने जा रहे हैं, यह गैर-जिम्मेदाराना है।' यह बातचीत Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग और मोनिका बिकर्ट के बीच 2019 में हुई थी। मोनिका ने फेसबुक मैसेंजर और इंस्टाग्राम DM में एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन लाने से मना किया था।

कैसे हुआ खुलासा?

मार्क जुकरबर्ग और मेटा के कंटेंट हेड के बीच एक्सचेंज हुआ यह इंटरनल कम्युनिकेशन शुक्रवार को मैक्सिको कोर्ट में दायर एक याचिका की वजह से रिवील हुआ है। न्यू मैक्सिको के एटर्नी जनरल राउल टोरेज ने Meta पर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी की पॉलिसी प्रीडेटर्स को बच्चों के साथ कनेक्ट होने की आजादी देती है। प्रायः यह रीयल वर्ल्ड अब्यूज और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को बढ़ावा देता है। मेटा के खिलाफ यह ट्रायल इसी महीने शुरू हुआ है। इससे पहले भी मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ग्लोबली कई तरह के आरोप और रेगुलेटरी थ्रेट्स में फंसी हुई है।

मैक्सिको कोर्ट में 40 से ज्यादा अटर्नी जनरल ने आरोप लगाया है कि मेटा चाइल्ड प्रिडेशन में पूरी तरह फेल हो गई है। इनमें दावा किया गया है कि कंपनी के प्रोडक्ट युवाओं के मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका के कुछ स्कूलों ने भी कंपनी के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं। अमेरिका के लॉस एंजल्स सुपीरियर कोर्ट में मेटा के खिलाफ इन मुकदमों पर सुनवाई हो रही है।

एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के रिस्क

मेटा ने 2023 में फेसबुक मैसेंजर और इंस्टाग्राम में भी वॉट्सऐप वाला एंट-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर रोल आउट किया है। इस फीचर में सेंडर और रिसीवर के बीच की बात को केवल सेंडर और रिसीवर के डिवाइस में ही डीकोड किया जा सकता है। एप्पल, गूगल जैसी कंपनियां भी अपने मैसेज में इस फीचर को यूज करती हैं। हालांकि, कई चाइल्ड सेफ्टी एडवोकेट्स का मानना है कि यह टेक्नोलॉजी पब्लिक सोशल नेटवर्क के लिए बड़ा खतरा पैदा करती है। इसके जरिए बच्चों को अनजान लोग कनेक्ट कर सकते हैं और उनके बीच की बात को डिकोड नहीं किया जा सकता है।

मैक्सिको कोर्ट में दायर फाइलिंग में कंपनी के सीनियर सेफ्टी एग्जीक्यूटिव ने इसी रिस्क का जिक्र किया है। मोनिका बिकर्ट ने कहा कि मैनें कभी भी मार्क जुकरबर्ग को इस फीचर को बेचने में मदद की है। इस तरह का एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन चाइल्ड अब्यूज की तरह है आतंकवादी हमलों की प्लानिंग में भी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, इस मामले में मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि कंपनी ने फैसबुक और इंस्टाग्राम पर की गई बातचीज को सुरक्षित बनाने के लिए इस फीचर को रोल आउट किया था। यूजर्स चाहें तो किसी तरह के ऑब्जेक्शनेबल मैसेज को मेटा के पास रिव्यू के लिए रिपोर्ट कर सकते हैं।

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