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2027 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की तैयारी शुरू, 11 जिला अध्यक्ष चुने, जातीय समीकरण का खास ध्यान रखा

 Reported By: Ruchi Kumar Edited By: Shakti Singh
 Published : Feb 26, 2026 10:57 pm IST,  Updated : Feb 26, 2026 11:20 pm IST

यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 11 जिलों के अध्यक्षों के नाम का ऐलान किया है। इसमें जातीय समीकरण का विशेष ध्यान रखा गया है। ग्यारह जिला अध्यक्षों में से तीन ब्राह्मण हैं। इसके अलावा तीन ओबीसी, दो दलित, एक ठाकुर, एक बनिया और एक कायस्थ है।

Pankaj Chaudhary- India TV Hindi
समर्थकों के साथ पंकज चौधरी Image Source : PTI

भारतीय जनता पार्टी ने एक साल पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू कर दी है। यूपी बीजेपी के 11 जिला अध्यक्षों के नाम का ऐलान कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने  भाजपा जिलाध्यक्षों की घोषणा की। यूपी में 2027 में विधान सभा चुनाव हैं। ऐसे में यूपी में जिन  11 जिला अध्यक्षों के नाम का ऐलान किया गया है, उसमें जातीय संतुलन पर खास ध्यान रखा गया है।

हाल के दिनों में ब्राह्मणों के बीजेपी से नाराज होने की खबरें आई थीं। ऐसे में गुरुवार को घोषित किए गए ग्यारह जिला अध्यक्षों में से तीन ब्राह्मण हैं। इसके अलावा तीन ओबीसी, दो दलित, एक ठाकुर, एक बनिया और एक कायस्थ है। बीजेपी ने यूपी को छह क्षेत्रों, 98 संगठनात्मक जिलों और 1918 मंडलों में बांट रखा है।

इन जाति के लोगों को मिला प्रतिनिधित्व

बीजेपी ने पश्चिम, ब्रज, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र के अलग-अलग जिलों के अध्यक्षों के नाम का ऐलान किया है। इनमें कश्यप, ब्राह्मण, ठाकुर, मौर्य, वैश्य, पासी और कायस्थ समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे पहले बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष का चयन करते समय भी जातीय समीकरणों का ध्यान रखा था।

माघ कुंभ और यूजीसी ने बिगाड़ा खेल

सियासी जानकारों के अनुसार माघ कुंभ और यूजीसी के नियमों ने सामान्य वर्ग के लोगों के बीच बीजेपी की लोकप्रियता कमजोर की है। यूजीसी ने शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए जो नए नियम बनाए थे। उनका जमकर विरोध हुआ और अब नए नियम संसोधन के बाद ही लागू किए जाएंगे। इन नियमों को बनाने में बीजेपी का कोई योगदान नहीं था, लेकिन लोगों ने इसके लिए केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार माना और यूपी में इसका विरोध सबसे ज्यादा देखने को मिला। वहीं, माघ कुंभ के दौरान शंकराचार्य के साथ मारपीट का मामला हो या मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियां टूटने की घटना हो। दोनों मामलों पर बीजेपी को नुकसान हुआ है। इसी वजह से अब बीजेपी के लिए सामान्य वर्ग के लोगों को साधना आसान नहीं होगा। हालांकि, विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय है और योगी जैसी लोकप्रियता वाले नेता के लिए एक वर्ग की नाराजगी दूर करना मुश्किल काम नहीं होगा। इसकी शुरुआत अभी से ही हो चुकी है।

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