लेकिन अक्सर लोग यह समझ नहीं पाते कि उनकी थकान शरीर की है या दिमाग की। कई बार हम शारीरिक थकान को मानसिक तनाव समझ लेते हैं और कई बार मानसिक थकावट को शरीर की कमजोरी मान लेते हैं। यही भ्रम स्ट्रेस को और बढ़ा देता है। पीएसआरआई अस्पताल में मनोवैज्ञानिक अर्पिता कोहली, के अनुसार, सही कारण पहचानना ही इस समस्या से बाहर निकलने का पहला कदम है।
मानसिक थकान के लक्षण:
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मानसिक थकान के लक्षणों में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, चिड़चिड़ापन, नींद न आना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना शामिल है।
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ऐसे में शरीर भले ही आराम कर ले, लेकिन दिमाग को सुकून नहीं मिलता। यही वजह है कि छुट्टी लेने के बाद भी लोग खुद को फ्रेश महसूस नहीं करते।
शारीरिक थकान के लक्षण:
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शारीरिक थकान लंबे समय तक काम करना, नींद की कमी, गलत खान-पान और व्यायाम की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
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इसके लक्षणों में शरीर में दर्द, भारीपन, कमजोरी और जल्दी थक जाना शामिल है। इस तरह की थकान में सही नींद, पोषण और आराम से सुधार देखा जा सकता है।
असली पहचान है ज़रूरी
स्ट्रेस का असली कारण पहचानने के लिए जरूरी है कि आप अपने लक्षणों को ध्यान से समझें। अगर आप आराम करने के बाद भी थकान महसूस कर रहे हैं, तो यह मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। वहीं अगर नींद पूरी करने और आराम के बाद आप बेहतर महसूस करते हैं, तो समस्या शारीरिक हो सकती है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आजकल की जीवनशैली में मानसिक और शारीरिक थकान एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अगर दिमाग लगातार तनाव में रहता है, तो इसका असर शरीर पर भी दिखता है, जैसे सिरदर्द, मांसपेशियों में जकड़न और थकावट। वहीं अगर शरीर लगातार थका हुआ है, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति तनावग्रस्त और उदास महसूस कर सकता है।
कैसे करें बचाव?
इस समस्या से निपटने के लिए संतुलित जीवनशैली जरूरी है। नियमित व्यायाम, सही डाइट, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्रेक लेना जरूरी है। इसके साथ ही मेडिटेशन, योग और डिजिटल डिटॉक्स जैसे उपाय मानसिक थकान को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।