Friday, February 27, 2026
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रिटायर्ड डॉक्टर से ₹1.58 करोड़ की ठगी, एक हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट रखा, FD तुड़वाकर पैसे हड़पे

Edited By: Shakti Singh Published : Feb 27, 2026 09:08 pm IST, Updated : Feb 27, 2026 09:08 pm IST

डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई बुज़ुर्ग महिला, साइबर ठगों ने ईडी और एनआईए अधिकारी बनकर रिटायर्ड डॉक्टर से ₹1.58 करोड़ हड़प लिए। उन्होंने बुजुर्घ महिला को 8 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।

Lady doctor fraud- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT महिला डॉक्टर से ठगी

यूपी के गोरखपुर में साइबर ठगों ने 64 वर्षीय रिटायर्ड आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव को डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने खुद को एटीएस, एनआईए और ईडी का अधिकारी बताकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। एक हफ्ते तक घर के अंदर डॉक्टर को हाउस अरेस्ट कर निगरानी करते रहे। व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिये निगरानी में रखकर उनसे विभिन्न खातों में रकम ट्रांसफर कराई। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की जांच चल रही है। खातों का डिटेल्स मांगा गया है।

गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र के नहर रोड निवासी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुई हैं। पति के निधन के बाद वह अकेले ही घर में रहती हैं। उनके बच्चे शहर के बाहर रहते हैं। डॉ. मंजुला ने साइबर थाने पर तहरीर दी कि 13 फरवरी को व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस और एनआईए का अफसर बताया और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आया है।

एटीएम कार्ड दिखाकर डराया

ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान एक एटीएम कार्ड दिखाया, जिस पर बुजुर्ग महिला का नाम था। जालसाजों ने दावा किया कि केनरा बैंक के खाते से 50 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। जांच के नाम पर सहयोग करने और डिजिटल अरेस्ट में रहने को कहा गया। डर के कारण उन्होंने यह बात अपने बच्चों तक को नहीं बताई। जब बताने की और घर से निकलने कि कोशिश की तो लोग निकलने नहीं दिए। पीड़िता के अनुसार 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी करते रहे। मोबाइल 24 घंटे चार्जिंग पर लगा रहता था। उन्हें किसी से भी संपर्क करने से रोका गया। जालसाजों ने कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें निर्देशों का पालन करना होगा, अन्यथा एक साल की जेल हो सकती है।

एफडी तुड़ाकर ट्रांसफर कराए पैसे

एसपी साइबर क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि पीड़िता डॉ. मंजुला के अनुसार  उन्हें ऑनलाइन लेन-देन की जानकारी नहीं है। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने उनकी सभी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। 21 फरवरी को बची हुई 30 लाख रुपये की एफडी भी तुड़वाकर भेज दी। ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता द्वारा जानकारी मिली कि जालसाज खुद को ईडी अधिकारी बताकर फर्जी रसीद भेजते रहे। उन्होंने पुणे से कॉल करने का दावा किया। उन्हें भरोसा दिलाया कि फंड लीगलाइजेशन के बाद सारा पैसा वापस खाते में आ जाएगा। 24 फरवरी को बैंक खाते में रकम आने का आश्वासन दिया गया, लेकिन पैसा नहीं लौटा। सवाल करने पर आरोपी ने कहा कि घबराइए मत माताजी, पैसा वापस आ जाएगा। आप जैसे 247 लोग जांच की जद में हैं। थोड़ा समय लगेगा। जब रकम वापस नहीं आई तो ठगी का अहसास हुआ।

आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही पुलिस

पुलिस अधिकारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जिन बैंक खातों में पैसा गया है, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है और ट्रांजेक्शन डिटेल्स के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

(गोरखपुर से राज श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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