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संपत्ति का बंटवारा हो या परिजनों के नाम करना हो, अब 5000 हजार में आराम से हो जाएगा सेटलमेंट, योगी सरकार जनता को देने जा रही यह बड़ी सुविधा

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Pankaj Yadav
 Published : Aug 06, 2024 02:11 pm IST,  Updated : Aug 06, 2024 02:11 pm IST

उत्तर प्रदेश में अब संपत्तियों के बंटवारे पर या फिर परिजनों के नाम करने पर स्टाम्प शुल्क केवल 5000 रुपया लगेगा। योगी सरकार ने आम आदमी के ईज़ ऑफ़ लिविंग के लिए एक नई और सहुलियत भरी पहल की है।

योगी आदित्यनाथ- India TV Hindi
योगी आदित्यनाथ Image Source : SOCIAL MEDIA

यूपी और बिहार जैसे राज्यों में आमतौर पर वाद-विवाद पुरानी संपत्ति को लेकर ही होता है। इस चक्कर में लोग सालों साल तक कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रह जाते हैं। कई कत्ल हो जाते हैं, अपराध बढ़ने में इस मुद्दे का योगदान बहुत है। लेकिन अब यूपी सरकार अपने लोगों को इस परेशानी से छुटकारा दिलाने पर काम कर रही है। सरकार आम आदमी के लिए ईज़ ऑफ़ लिविंग का परिवेश तैयार कर रही है। जिसमें संपत्ति विभाजन और व्यवस्थापन के लिए नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने जा रही है। इस व्यवस्था में अब बिना किसी विवाद के पीढ़ियों की संपत्तियों का बंटवारा आसानी से हो सकेगा। इसके अलावा व्यक्ति खुद के जीवित रहते अपनी अचल संपत्ति को अपने परिवार जनों के नाम भी कर सकेगा। 

स्टाम्प शुल्क होगा 5000

मात्र 5,000 रुपये के स्टाम्प शुल्क के साथ आप अपनी अचल संपत्ति को रक्त संबंधियों के नाम करने की बड़ी सहूलियत देने के बाद उत्तर प्रदेश में अब पारिवारिक विभाजन और व्यवस्थापन में भी बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि एक परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के बंटवारे तथा जीवित व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति को अपने परिवार जनों के नाम किए जाने पर देय स्टाम्प शुल्क भी 5,000 रुपये तय किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक खर्च के कारण प्रायः परिवार में विभाजन की स्थिति में विवाद की स्थिति बनती है और कोर्ट मुकदमे भी होते हैं। न्यूनतम स्टाम्प शुल्क होने से परिवार के बीच सेटलमेंट आसानी से हो सकेगा। 

संपत्ति विभाजन में होगा सरलीकरण

मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा आम आदमी के ईज़ ऑफ़ लिविंग के लिए अनेक प्रयास किये गए हैं। संपत्ति विभाजन और व्यवस्थापना प्रक्रिया में सरलीकरण से लोगों को और सुविधा होगी। 

यह होता है विभाजन

  • विभाजन विलेख में सभी पक्षकार विभाजित सम्पत्ति में संयुक्त हिस्सेदार होते हैं एवं विभाजन उनके मध्य होता है।
  • विभाजन विलेख में प्रस्तावित छूट एक ही मृतक व्यक्ति के समस्त लीनियल डीसेंडेंट्स, जो सहस्वामी हों, को आच्छादित करेगी अर्थात यदि दादा की मूल सम्पत्ति में वर्तमान जीवित हिस्सेदार चाचा/भतीजा / भतीजी हैं, तो वह इसका उपयोग कर सकते हैं।

यह होता है व्यवस्थापन

  • वस्थापन विलेख में व्यवस्थापन कर्ता पक्षकार (जीवित) अपनी व्यापक सम्पत्ति को कई पक्षकारों के मध्य निस्तारित करता है।
  • व्यवस्थापन विलेख में प्रस्तावित छूट के अधीन व्यवस्थापन कर्ता पक्षकार अपने समस्त लीनियल डीसेंडेंट्स/डीसेंडेंट्स, जो किसी भी पीढ़ी के हों, के पक्ष में व्यवस्थापन कर सकता है। अर्थात सम्पत्ति यदि परदादा परदादी जीवित हों, तो उनके पक्ष में, एवं यदि प्रपौत्र/प्रपौत्री जीवित हों, तो उनके पक्ष में भी किया जा सकता है।

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