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SIR ने 28 साल बाद बुजुर्ग को अपनों से मिलाया, परिवार ने मान लिया था मृत, जानें पूरा मामला

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jan 01, 2026 09:06 pm IST,  Updated : Jan 01, 2026 10:18 pm IST

बुजुर्ग शरीफ ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पश्चिम बंगाल के वेदानपुर में पिछले 28 सालों से रह रहा है।

अपनों के साथ बुजुर्ग शरीफ - India TV Hindi
अपनों के साथ बुजुर्ग शरीफ Image Source : REPORTER

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद स्थित खतौली कस्बे के एक परिवार में भावुक भरा पर उस समय देखने को मिला जब मृतक मान लिए गए एक बुजुर्ग चाचा शरीफ 28 साल बाद अपने घर लौटे, आपको बता दे कि एसआईआर प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों के लिए चाचा शरीफ को अपने घर लौटना पड़ा जिसके बाद घर वालों की खुशियों का ठिकाना ना रहा। बुजुर्ग व्यक्ति शरीफ 24 दिसंबर को मुजफ्फरनगर पहुंचे थे और कुछ दिन अपने बिछड़े हुए परिवार के साथ चद वक्त बिताकर 30 दिसंबर मंगलवार को दिल्ली से ट्रेन पड़कर वापस पश्चिम बंगाल के लिए निकल गए हैं। उन्हें दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ने के लिए उनके भतीजे और पोते भी दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचे और उन्हें ट्रेन में बैठक उन्हें खुशियों के साथ विदा किया।

28 साल बाद परिवार से मिला बुजुर्ग

दरसअल खतौली कस्बा स्थित मोहल्ला बालक राम निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति शरीफ की पहली पत्नी का इंतकाल सन 1997 में हो गया था। इसके चलते दूसरी शादी करने के बाद अपनी पत्नी के साथ शरीफ पश्चिम बंगाल चले गए थे। कुछ समय तक तो उस समय परिवार से संपर्क रहा लेकिन धीरे-धीरे वह संपर्क टूट गया। इसके बाद परिवार के लोगों ने शरीफ के बताए गए पश्चिम बंगाल के पते पर जाकर भी उन्हें ढूंढने की कोशिश की लेकिन जब कुछ पता ना चला तो परिवार वालों ने शरीफ को मृत मान कर संतोष कर लिया लेकिन शुरू हुई एसआईआर में जब बुजुर्ग शरीफ को दस्तावेजों की जरूरत हुई तो वह अचानक से 2 दिन पूर्व 28 साल बाद अपने घर वापस लौटा, जिसके बाद उसके परिवार वालों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। इस दौरान बुजुर्ग शरीफ को यह भी पता चला कि इन 28 सालों में उसके परिवार के बहुत से लोगों का इंतकाल भी हो चला है।

परिवार वालों ने ढूढा लेकिन नहीं मिले थे चाचा शरीफ

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बुजुर्ग शरीफ के भतीजे मोहम्मद अकलिम का कहना है कि मोहम्मद अकलीम वालिद मोहम्मद इदरीश मेरे चाचा हैं। शरीफ हमारे वालिद साहब से छोटे सन 1997 से हमारी चाची का इंतकाल हो गया थातो फिर उन्होंने दूसरा निकाह किया था। उस वक्त लैंड लाइन फोन थे। मोबाइल नहीं थे। सन 1997 में दो नंबर अपने और एक नंबर चाचा का तीन नंबर मैंने उनको दिए थे। लेकिन उसके बाद से इनका कोई अता-पता नहीं चला। इन्होंने हमें बताया था कि खड़कपुर के अंदर एक मोती टेलर है मालूम कर लेना। वहां रहता हूं। मैं खड़कपुर भी गया मोती ट्रेलर के बारे में मालूम किया तो पता चला कि वह मोती टेलर उधर नहीं है। फिर मैं तकरीबन सन 2011 आसनसोल गया। तो हमने वहां जमात के बहुत से लोगों से भी मालूम किया। लेकिन पता नहीं चला। 

रिपोर्ट- योगेश त्यागी, मुजफ्फरनगर

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